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Market outlook : मिड कैप स्टॉक्स में गिरावट का रिस्क ज्यादा, मज़बूत फंडामेंटल्स और अर्निंग्स विजिबिलिटी वाली कंपनियों पर करें फोकस

Market outlook: रोहित सरीन ने कहा कि जब तक अर्निंग्स ग्रोथ में मजबूत सुधार नहीं होता और यह उम्मीदों के मुताबिक नहीं हो जाती,तब तक ओवरवैल्यूड मिड-कैप शेयरों में और टाइम करेक्शन या प्राइस करेक्शन की गुंजाइश बनी हुई है। इसलिए निवेशकों को सेलेक्टिव रहना चाहिए

Edited By: Sudhanshu Dubeyअपडेटेड Jan 25, 2026 पर 11:07 AM
Market outlook : मिड कैप स्टॉक्स में गिरावट का रिस्क ज्यादा, मज़बूत फंडामेंटल्स और अर्निंग्स विजिबिलिटी वाली कंपनियों पर करें फोकस
Market outlook : यूएस के साथ भारत के संभावित ट्रेड डील पर बात करते हुए रोहित सरीन ने कहा कि US ट्रेड डील फंडामेंटल नज़रिए से ज़्यादा मनोवैज्ञानिक नज़रिए से ज़्यादा ज़रूरी है

Market insight : मिड-कैप स्टॉक्स में वैल्यूएशन अभी भी ज़्यादा हैं। ओवरवैल्यूड स्टॉक्स में और गिरावट का रिस्क है। मिड-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन अपने लॉन्ग-टर्म एवरेज से लगभग एक स्टैंडर्ड डेविएशन ऊपर बने हुए हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इसमें तुरंत कोई बड़ा करेक्शन होगा, लेकिन यह सीमित मार्जिन ऑफ सेफ्टी का संकेत जरूर है। ये बातें मार्केट आउटलुक पर बात करते हुए क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फ़ाउंडर रोहित सरीन ने कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक अर्निंग्स ग्रोथ में मजबूत सुधार नहीं होता और यह उम्मीदों के मुताबिक नहीं हो जाती,तब तक ओवरवैल्यूड मिड-कैप शेयरों में और टाइम करेक्शन या प्राइस करेक्शन की गुंजाइश बनी हुई है। इसलिए निवेशकों को सेलेक्टिव रहना चाहिए और मज़बूत फंडामेंटल्स और टिकाऊ अर्निंग्स विजिबिलिटी वाली कंपनियों पर ही फोकस करना चाहिए।

कंपनीयों के नतीजों पर बात करते हुए रोहित सरीन ने कहा कि उनका मानना ​​है कि अर्निंग में गिरावट शायद अब बॉटम पर पहुंच गई है। यहां से इसमें अब और ज्यादा गिरावट का डर नहीं है। लेकिन हमें तुरंत या तेज़ी से रिकवरी की उम्मीद भी नहीं है। अर्निंग में रिकवरी धीरे-धीरे होगी और अलग-अलग सेक्टर में यह एक जैसी नहीं होगी। जैसे-जैसे डिमांड स्थिर होगी और इनपुट कॉस्ट का दबाव कम होगा, अगले तीन से चार तिमाहियों में अर्निंग में बढ़ोतरी थोड़ी बेहतर हो सकती है।

यूएस के साथ भारत के संभावित ट्रेड डील पर बात करते हुए रोहित सरीन ने कहा कि US ट्रेड डील फंडामेंटल नज़रिए से ज़्यादा मनोवैज्ञानिक नज़रिए से ज़्यादा ज़रूरी है। मैक्रोइकोनॉमिक नज़रिए से US ट्रेड डील का भारत की कुल GDP ग्रोथ बहुत बड़ा असर नहीं होगा। हालांकि,ऐसी घटनाएं मार्केट सेंटीमेंट और इन्वेस्टर के भरोसे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

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