Market Outlook : आज भी गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 26 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Market Outlook :सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स में 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि रियल्टी, एनर्जी, मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.9 प्रतिशत नीचे बंद हुआ
Market Outlook :वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे भी शेयरों की चाल तय करेंगे। इसमें डिमांड और मार्जिन को लेकर मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर खास नजर रहेगी
Market Outlook : 23 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 22,600 के आसपास रहा। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 125.56 अंक या 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 87.65 अंक या 0.39 प्रतिशत गिरकर 22,600 पर बंद हुा।
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज करने वालों में श्रीराम फाइनेंस, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, अडानी एंटरप्राइजेज, टाटा स्टील और जियो फाइनेंशियल शामिल रहे। इसके अलावा, अपोलो हॉस्पिटल्स, इंफोसिस, टीसीएस और मारुति सुजुकी में भी गिरावट देखने को मिली।
सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। कंज्यूमर ड्यूरेबल इंडेक्स में 3 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि रियल्टी, एनर्जी, मेटल और पीएसयू बैंक सूचकांकों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.9 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि आज के बाजार में मुख्य चिंता निफ्टी की तुलना में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में आई बहुत तेज गिरावट रही। वैल्यूएशन से जुड़ी चिंताओं, लीवरेज्ड पोजीशन की अनवाइंडिंग, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों ने पूरे बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है।
इंडिया VIX में उछाल यह भी बताता है कि निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जबकि AI के कारण ग्लोबल इक्विटी बाजारों में हो रही बिकवाली निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता पर खराब असर डाल रही है।
आगे महंगाई के रुझान और महंगाई तथा विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय बैंकों के कदम बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। ऐसे माहौल में हमें उम्मीद है कि स्टॉक और सेक्टर स्पेसिफिक अवसर रहेंगे। जिन कंपनियों की अर्निंग्स विजिबिलिटी अच्छी है और वैल्यूएशन का स्तर सही होगा उन पर बाजार का फोकस रहेगा।
LKP सिक्योरिटीज में टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि निफ्टी ने वीकली चार्ट पर अपने 200-WMA और डेली चार्ट पर 20-DMA के स्तर को तोड़ दिया है, जिससे पूरे मार्केट का स्ट्रक्चर कमजोर हो गया है। 'लोअर-हाई' का पैटर्न अभी भी बना हुआ है, जो बताता है कि हाल ही में आई तेजी केवल एक 'पुलबैक' या 'रिलीफ रैली' थी। RSI पर 'हिडन बेयरिश डाइवर्जेंस' भी इस बात का संकेत है कि डाउनट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है। 22,200 का स्तर एक अहम सपोर्ट है। अगर निफ्टी इसके नीचे टूटता है तो बाजार में और बिकवाली देखने को मिल सकती है। फिलहाल 22,500 पर सपोर्ट है, जबकि 22,700–22,800 के स्तर पर रेजिस्टेंस है। ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए, केवल अहम स्तरों के आसपास ही ट्रेड करना चाहिए, अपनी पोजीशन को हल्का रखना चाहिए और ब्रेंट क्रूड पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि अगर इसकी कीमत 110 डॉलर के ऊपर जाती है, तो मार्केट का सेंटीमेंट और खराब हो सकता है।
PL कैपिटल में एडवाइजरी और डीलिंग के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसाट का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप में बड़ी गिरावट बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।
मध्य पूर्व में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड का भाव 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है,जिससे महंगाई का जोखिम बढ़ रहा है। वहीं, रुपया कमजोर होकर 95.15 रुपये प्रति डॉलर के स्तर के करीब आ गया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के दबाव के चलते सोने की कीमत 1,900 रुपये गिरकर 1.42 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। घरेलू संस्थागत निवेशकों के सपोर्ट बावजूद,विदेशी फंडों की लगातार निकासी चिंता का विषय बनी हुई है।
आगे चलकर,कच्चे तेल की कीमतें,मुद्रा में स्थिरता और दूसरी तिमाही (Q2) के नतीजे अहम कारक होंगे जो बाजार की दिशा करेंगे। जब तक ग्लोबल संकेत बेहतर नहीं होते तब तक उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
वेंचुरा में हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ब्रेंट क्रूड मई की शुरुआत के बाद के अपने हाई पर पहुंच गया है।
रुपया अपने हालिया निचले स्तरों से सुधरा तो है, लेकिन अभी भी कमजोर है। FIIs की लगातार निकासी और रुपये को संभालने के लिए RBI के प्रयासों का बाजार के सेंटीमेंट पर निगेटिव असर पड़ा है
इस हफ्ते मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों और FII के निवेश पर नजर रहेगी। अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है और रुपया मजबूत बना रहता है, तो दबाव कुछ कम हो सकता है। US फेड की बैठक एक बड़ा इवेंट है। बाजार को पूरी उम्मीद है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, इसलिए सबकी नजरें फेड के रुख पर होंगी। इस बात पर चर्चा हो सकती है कि क्या दरों में सख्ती (बढ़ोतरी) की जाए और माना जा रहा है कि दिसंबर में दरों में बढ़ोतरी की संभावना अधिक है।
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO भी एक बड़ी घटना है। इसके लिए सब्सक्रिप्शन आज 23 अक्टूबर को बंद हो जाएगा। शेयरों का अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को होगा और लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होगी। भारत के सबसे बड़े IPO में से एक होने के नाते इसकी लिस्टिंग से प्राइमरी मार्केट के सेंटीमेंट का पता चलेगा। साथ ही, इससे सेकेंडरी मार्केट से नकदी कम हो सकती है।
वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही के नतीजे भी शेयरों की चाल तय करेंगे। इसमें डिमांड और मार्जिन को लेकर मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर खास नजर रहेगी। IT शेयरों पर भी फोकस रहेगा, क्योंकि निफ्टी IT में जोरदार तेजी आई है और रुपये की कमजोरी से एक्सपोर्टर्स को फायदा मिलता है। प्राइवेट बैंकों और NBFCs के नतीजों और उनके एसेट क्वालिटी के रुझानों पर नजर रहेगी। वहीं, अगर बाजार कमजोर होता है, तो फार्मा और FMCG जैसे 'डिफेंसिव' सेक्टर बेहतर स्थिति में रह सकते हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण OMC (तेल विपणन कंपनियां), पेंट और एविएशन जैसे सेक्टर दबाव में बने रह सकते हैं।
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