Market Outlook : बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 9 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और इसके चलते ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़कर 76 डॉलर तक पहुंचने से मार्केट एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में आ गया है। यह स्थिति कब तक बनी रहेगी और इसके क्या नतीजे होंगे, यह अभी अनिश्चित है

अपडेटेड Jul 08, 2026 पर 4:33 PM
Market Outlook : जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज सेशन में घरेलू शेयर बाजार का मूड साफ तौर पर नेगेटिव हो गया, जिससे हालिया बढ़त खत्म हो गई। इसकी वजह वेस्ट एशिया में फिर से तनाव बढ़ना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना रहा

Market Outlook : US-ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव के कारण 8 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,900 के नीचे आ गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,677.12 अंक या 2.15 प्रतिशत गिरकर 76,503.60 पर और निफ्टी 516.65 अंक या 2.12 प्रतिशत गिरकर 23,882.05 पर बंद हुआ। आज लगभग 1023 शेयरों में बढ़त हुई, 3070 शेयरों में गिरावट आई और 159 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में जियो फाइनेंशियल, इंटरग्लोब एविएशन, श्रीराम फाइनेंस, मारुति सुजुकी और HUL शामिल रहे।, जबकि बढ़त वाले शेयरों में ONGC, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया और बजाज ऑटो शामिल रहे। सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी कमजोर रहा, सभी अहम इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि वोलैटिलिटी इंडिया VIX में लगभग 25 प्रतिशत की तेजी आई।

निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में 2.7 प्रतिशत की गिरावट आई, इसके बाद निफ्टी बैंक (-2.5 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-2.5 प्रतिशत), निफ्टी FMCG (-2.5 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (-2.33 प्रतिशत) में गिरावट देखी गई। निफ्टी ऑयल एंड गैस (-2.2 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-2.2 प्रतिशत) और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर (-2 प्रतिशत) में भी बिकवाली का दबाव दिखा। हालांकि, निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 0.97 प्रतिशत और निफ्टी मेटल में 0.9 प्रतिशत की गिरावट आई। छोटे-मझोले शेयरों पर भी दबाव रहा। इसके चलते निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े तनाव और इसके चलते ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़कर 76 डॉलर तक पहुंचने से मार्केट एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में आ गया है। यह स्थिति कब तक बनी रहेगी और इसके क्या नतीजे होंगे, यह अभी अनिश्चित है।


एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह का कहना है कि यूएस राष्ट्रपति ट्रंप के सीजफ़ायर खत्म होने के बयान के बाद बाजार में बड़ी गिरावट आई। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के बाद तेहरान को और कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

इस बयान के बाद डेली चार्ट पर, निफ्टी ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और इसमें 30 मार्च, 2026 के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज की। ADX इंडिकेटर में, DI- ने DI+ को पार कर लिया है, जिससे पता चलता है कि बेचने वालों ने खरीदने वालों पर अपना दबदबा बनाना शुरू कर दिया है। वहीं, RSI में भी भारी गिरावट देखी गई है, जो मंदी के रुझान के बढ़ने का संकेत है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप सीज़फायर खत्म होने के बयान के बाद इन्वेस्टर्स ने जोखिम से दूर रहने की नजरिया अपना लिया, जिससे निफ्टी इंडेक्स 500 अंक से ज्यादा गिर गया। ऊपर की ओर कंसोलिडेशन के बाद इंडेक्स में गिरावट आई, जिससे हालिया उत्साह कम हो गया। हालांकि, इसे 23,070 से 24,348 तक की पिछली रैली के 50% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल (जो 23,800 के आसपास है) के पास सपोर्ट मिला।

आगे यह देखना अहम होगा कि क्या निफ्टी 23,800 के सपोर्ट लेवल को बनाए रख पाता है या नहीं। अगर यह 23,800 के नीचे टूटता है, तो जारी करेक्शन का दौर और लंबा खिंच सकता है। वहीं, अगर यह इस लेवल के ऊपर बना रहता है, तो निकट भविष्य में अच्छी रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज सेशन में घरेलू शेयर बाजार का मूड साफ तौर पर नेगेटिव हो गया, जिससे हालिया बढ़त खत्म हो गई। इसकी वजह वेस्ट एशिया में फिर से तनाव बढ़ना और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आना रहा। महंगाई की चिंताएं भी फिर से बढ़ गईं हैं। इससे भारत और अमेरिका, दोनों जगह बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। बाजार में उतार-चढ़ाव ज़्यादा रहा और इंडिया VIX में जबरदस्त उछाल आया। हर सेक्टर में गिरावट देखने को मिली। यह मैक्रो-इकोनॉमिक कारणों से रिस्क लेने से बचने के ट्रेंड का संकेत है। साथ ही, पहली तिमाही के कमजोर अनुमानों के कारण नतीजों से पहले की घबराहट ने भी बाजार की गिरावट में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, आने वाले नतीजे शायद अकेले दम बाजार में बड़ी उठापटक न कर पाएं, लेकिन निवेशक मैनेजमेंट की कमेंट्री और आगे के अनुमानों पर बारीकी से नजर रखेंगे। वे यह समझने की कोशिश करेंगे कि क्या दूसरी तिमाही में भी कमजोर नतीजे जारी रहेंगे। अगर ऐसा होता है तो FY27 में घरेलू नतीजों और बाजार के प्रदर्शन में सुधार में देरी हो सकती है।

आगे चलकर बाजार की दिशा तय करने में फेड की जुलाई पॉलिसी मीटिंग के नतीजों, अमेरिका के मौजूदा आपसी टैरिफ समझौते की समय-सीमा खत्म होने के असर और मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव के स्तर की अहम भूमिका होगी।

 

 

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