Market Outlook : लगातार तीसरे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 अक्टूबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल
Market Outlook : LKP सिक्योरिटीज में टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि CAS सेशन के बाद निफ्टी अपने 200-WMA के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। हालांकि,ओवरऑल सेंटीमेंट और प्राइस स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बने हुए हैं
Market Outlook:निफ्टी में लगातार बनी कमजोरी ने इसके नियर टर्म आउटलुक को और कमजोर कर दिया है। इसके लिए 22,200–22,400 का दायरा एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है
Market Outlook : 22 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी इंडेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 22,700 के नीचे फिसल गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 पर बंद हुआ और निफ्टी 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,687.65 पर बंद हुआ। आज लगभग 1323 शेयरों में तेजी आई, 2670 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया,टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स,एचडीएफसी लाइफ,टेक महिंद्रा और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि तेजी दिखाने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,सिप्ला,एसबीआई,बजाज ऑटो और आईसीआईसीआई बैंक शामिल रहे।
सभी सेक्टोरल सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। ऑटो,कंज्यूमर ड्यूरेबल,ऑयल एंड गैस,इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी,एनर्जी और एफएमसीजी (FMCG) सूचकांकों में 0.5 से 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई,जबकि मीडिया सूचकांक 2.3 प्रतिशत नीचे आ गया। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में 1-1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
LKP सिक्योरिटीज में टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि CAS सेशन के बाद निफ्टी अपने 200-WMA के ऊपर बंद होने में कामयाब रहा। हालांकि,ओवरऑल सेंटीमेंट और प्राइस स्ट्रक्चर अभी भी कमजोर बने हुए हैं।
इंडेक्स को अपने 20-DMA के पास भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा और यह इस अहम रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिक नहीं पाया। अगर निफ्टी 22,600 और अपने 200-WMA के नीचे बंद होता है तो 'मीन रिवर्जन रैली'के दौरान बनाई गई लॉन्ग पोजीशन की समीक्षा कर लेनी चाहिए।
ऊपर की तरफ, निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 22,800 (20-DMA ज़ोन) और 23,000 पर है, जबकि 22,600 एक अहम सपोर्ट बना हुआ है। ऐसे में सतर्क रहकर और लेवल्स को ध्यान में रखकर ट्रेडिंग करने की सलाह होगी।
रेलिगेयर ब्रोकिंग में एसवीपी -रिसर्च अजीत मिश्रा का कहना है कि गुरुवार को बाजार दबाव में रहे और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों तथा बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच लगातार तीसरे सत्र में भी गिरावट दर्ज की गई। निचले स्तर पर खुलने के बाद,इंडेक्स में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निचले स्तरों से बीच-बीच में हुई खरीदारी से केवल थोड़ी ही राहत मिल सकी। नतीजतन, निफ्टी में आधे प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। यह बाजार में बने कमजोर सेंटीमेंट का संकेत है।
सेक्टर के नजरिए से देखें तो बिकवाली काफी व्यापक रही। FMCG, IT और एनर्जी सेक्टर सबसे ज्यादा कमजोर रहे। ब्रॉडर मार्केट्स का प्रदर्शन भी कमजोर बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में लगभग 1% की गिरावट आई। बाजार के सभी पॉकेट्स में लगातार बनी कमजोरी यह दिखाती है कि निवेशकों में जोखिम लेने को लेकर काफी हिचकिचाहट है और दिग्गज शेयरों के अलावा अन्य शेयरों में भी लगातार बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
ग्लोबल और घरेलू मैक्रो इकोनॉमिक दिक्कतों का असर बाजार का मूड खराब किए हुए है । मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। इससे महंगाई और कॉरपोरेट मार्जिन से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं। हाल की घटनाओं ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है, जबकि ग्लोबल स्तर पर मिले-जुले संकेतों और विदेशी फंड की लगातार निकासी ने जोखिम लेने की इच्छा को कमजोर कर दिया है।
इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी में लगातार बनी कमजोरी ने इसमें नियर टर्म आउटलुक को और कमजोर कर दिया है। इसके लिए 22,200–22,400 का दायरा एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि 22,900 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। बाजार के सेंटीमेंट को बेहतर बनाने और एक ठोस रिकवरी का संकेत देने के लिए निफ्टी के इस स्तर के ऊपर टिके रहना होगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ब्रॉडर मार्केट में लगातार बनी कमजोरी को देखते हुए,निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए, चुनिंदा शेयरों में मौकों पर ध्यान देना चाहिए और रिस्क मैनेजमेंट का पालन करना चाहिए।
इक्विरस वेल्थ में मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में बाहरी कारणों की वजह से गिरावट का दौर जारी रहा। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गईं, जिसके चलते घरेलू शेयर बाजारों में फिर से बिकवाली का दबाव देखने को मिला। एशियाई और यूरोपीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और डॉलर के मुकाबले रुपये में आई भारी गिरावट ने बाजार के सेंटीमेंट को और खराब कर दिया। हालांकि अब तक कंपनियों के नतीजे मिले-जुले रहे हैं, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने की चिंता और FIIs की ओर से हो रही लगातार बिकवाली निवेशकों का रुझान सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर एसेट्स की ओर बढ़ा सकती है।
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