Market Outlook : बढ़त के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 10 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल
Market Outlook : नागराज शेट्टी का कहना है कि निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड अभी भी उतार-चढ़ाव वाला और कमजोर बना हुआ है। लेकिन शॉर्ट-टर्म के लिए 23800 के सपोर्ट लेवल के पास से वापसी के संकेत मिल रहे हैं। 24200-24300 के लेवल से ऊपर की टिकाऊ बढ़त से मार्केट में और शॉर्ट कवरिंग देखने को मिल सकती है
Market Outlook : अभिनव तिवारी ने कहा कि आगे जून तिमाही के नतीजों का मौसम अब बाज़ार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर होगा। इसके चलते स्टॉक स्पेसिफिक वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है
Market Outlook : 9 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,950 के ऊपर बना रहा। मार्केट बंद होने पर, सेंसेक्स 238.22 अंक या 0.31 प्रतिशत बढ़कर 76,741.82 पर और निफ्टी 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर बंद हुआ। आज लगभग 2793 शेयरों में बढ़त हुई, 1263 शेयरों में गिरावट आई और 167 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निफ्टी में शामिल शेयरों में सन फार्मा सबसे ज्यादा बढ़त (2.6 प्रतिशत) के साथ टॉप गेनर रहा। इसके बाद भारती एयरटेल (2.2 प्रतिशत), इंटरग्लोब एविएशन (2 प्रतिशत), कोटक महिंद्रा बैंक (1.9 प्रतिशत) और एटरनल (2 प्रतिशत) का नंबर रहा। दूसरी ओर डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज में सबसे ज्यादा गिरावट (5.9 प्रतिशत) देखी गई। इन्फोसिस में 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसके बाद मारुति सुजुकी (1.6 प्रतिशत), एनटीपीसी (1.4 प्रतिशत) और ओएनजीसी (1.3 प्रतिशत) का नंबर रहा।
सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर पॉजिटिव रहा। अधिकांश इंडेक्स में खरीदारी रही। निफ्टी रियल्टी 3.5 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा, इसके बाद निफ्टी मीडिया (2 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (1.6 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.6 प्रतिशत) रहे। वहीं दूसरी तरफ, निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी ऑटो 0.25 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।
छोटे-मझोले शेयरों में तेजी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.8 प्रतिशत की बढ़त हुई। इन्होंने ने बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन किया।
आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी का कहना है कि बुधवार की बड़ी गिरावट के बाद, गुरुवार को उतार-चढ़ाव के बीच निफ्टी ने वापसी की कोशिश की और 80 अंक ऊपर बंद हुआ। डेली चार्ट पर लॉन्ग अपर शैडो (upper shadow) के साथ एक छोटी पॉजिटिव कैंडल बनी। टेक्निकल तौर पर, मार्केट की यह हरकत 'इनवर्टेड हैमर' (inverted hammer) जैसे कैंडल पैटर्न के बनने का संकेत देती है। आम तौर पर, गिरावट के बाद ऐसी बनावट को कन्फर्मेशन मिलने पर 'बुलिश रिवर्सल' (bullish reversal) माना जा सकता है।
निफ्टी का शॉर्ट-टर्म ट्रेंड अभी भी उतार-चढ़ाव वाला और कमजोर बना हुआ है। लेकिन शॉर्ट-टर्म के लिए 23800 के सपोर्ट लेवल के पास से वापसी के संकेत मिल रहे हैं। 24200-24300 के लेवल से ऊपर की टिकाऊ बढ़त से मार्केट में और शॉर्ट कवरिंग (short covering) देखने को मिल सकती है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर ने कहा कि अच्छे ग्लोबल संकेतों से मिली मदद के कारण भारतीय इक्विटी मार्केट में थोड़ी रिकवरी देखने को। हालांकि इन्वेस्टर्स उन जियोपॉलिटिकल घटनाओं पर नज़र बनाए रहे जिनकी वजह से पिछले ट्रेडिंग सेशन में बिकवाली हुई थी। आज की रिकवरी में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों की अहम भूमिका रही। हालिया गिरावट के बाद रियल्टी और PSU बैंकों के शेयरों में भी जबरदस्त उछाल आया।
घरेलू स्तर पर बाज़ार का मूड काफ़ी हद तक मजबूत बना हुआ है, जिसकी वजह साल की दूसरी छमाही (H2) के बेहतर आउटलुक, बारिश की स्थिति में सुधार और बेहतर वैल्यूएशन लेवल हैं। हालांकि, US फ़ेड की हालिया मीटिंग के मिनट्स में महंगाई को लेकर फिर से चिंता जताई गई है, जिसका असर ग्लोबल मार्केट के परफ़ॉर्मेंस पर पड़ सकता है।
इक्विरस वेल्थ के MD और बिज़नेस हेड, अंकुर पुंज का कहना है कि कल की गिरावट के बाद बाजार आज बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि दिन के आखिर में मुनाफावसूली के कारण बढ़त सीमित रही। कई ग्लोबल इंडेक्स में रिकवरी से लोकल मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। लेकिन TCS के तिमाही नतीजों की घोषणा से पहले निवेशक सतर्क नजर आ रहे है। ईरान के साथ सीज़फायर खत्म करने के US के फैसले के बाद ट्रेडर्स अब ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लोकल करेंसी की चाल पर नजर रखेंगे।
बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा कि आज एक अच्छी खबर भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी की आई है। दोनों देश व्यापार, एनर्जी सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। यह भारत के लिए उत्साहजनक खबर है। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ऐसे में यह खबर हमारे लिए काफी अहमियत रखती है। ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूत संबंध एनर्जी सिक्योरिटी को बेहतर बनाने और लंबे समय में भारत के मैन्युफैक्चरिंग और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को सहारा देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि आज की रिकवरी के बावजूद बाजार के लिए चिंताएं बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया 95.5 के स्तर के आसपास कमजोर बना हुआ है।
आगे जून तिमाही के नतीजों का मौसम अब बाज़ार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर होगा। इसके चलते स्टॉक स्पेसिफिक वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की कीमतें बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। कुल मिलाकर, हमें आने वाले सत्रों में सावधानी के साथ पॉजिटिव ट्रेंड की उम्मीद है।
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