अगर आपके मन में यह सवाल है कि स्मॉल और माइक्रोकैप स्टॉक्स की यह तेजी कब तक जारी रहेगी तो आपको उन फंड मैनेजर्स के संकेतों को समझना चाहिए जो स्मॉलकैप और ऐसे दूसरे स्टॉक्स को मैनेज करते हैं। Nippon India Mutual Fund ने गुरुवार को कहा कि वह अपने स्मॉलकैप फंड में एकमुश्त निवेश पर रोक लगाने जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में Tata Small Cap Fund और HDFC Defense Fund ने भी ऐसे ऐलान किए थे। इससे दो बातें पता चलती हैं। पहला, रिटेल इनवेस्टर्स में स्मॉलकैप फंड्स का क्रेज। दूसरा, फंड मैनेजर्स को अच्छे इनवेस्टमेंट आइडियाज तलाशने में हो रही दिक्कत। यह मार्केट का ऐसा फेज है, जिसमें हर स्टॉक अट्रेक्टिव दिख रहा है। मार्केट संभावित रिस्क को नहीं देख रहा है। इनमें बढ़ती प्रतियोगिता, डिमांड में अचानक गिरावट और नियमों में बदलाव जैसी स्थितियां शामिल हैं।
फंड मैनेजर्स सावधानी बरत रहे हैं, यह अच्छी बात है। हिस्ट्री बताती है कि स्मॉल और मिडकैप स्टॉक्स में गिरावट बहुत दर्द देती है। एकमुश्त निवेश ऐसे इनवेस्टर्स करते हैं जो मोमेंटम का फायदा उठाना चाहते हैं। जब मार्केट में गिरावट आती है, यह मार्केट भी कभी करेक्ट होगा तो यही इनवेस्टर्स सबसे पहले अपने पैसे निकालते हैं। इससे फंड मैनेजर्स के लिए दिक्कत बढ़ जाती है। स्मॉलकैप स्टॉक्स में ज्यादा लिक्विडिटी नहीं होती है। इसका मतलब है कि इन्हें बड़ी संख्या में खरीदना और बेचना आसान नहीं होता है। जब रिडेम्प्शन का प्रेशर आएगा तो फंड मैनेजर्स को अपने पोर्टफोलियो के बेस्ट स्टॉक्स को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि गिरावट आने पर इन्हीं शेयरों के लिए खरीदार होते हैं।
पोर्टफोलियो के बेस्ट स्टॉक्स को बेचने पर स्कीम के प्रदर्शन पर असर पड़ता है। इसके चलते स्कीम के निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है। इससे नया रिडेमप्शन देखने को मिलता है। हम यह ट्रेंड 2001, 2008 और हाल में 2018 में देख चुके हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ फंड मैनेजर्स के लिए दिक्कत आती है। हाई नेटवर्थ वैल्यू इनवेस्टर्स भी खुद को प्रॉब्लम में पाते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे निवेशकों ने स्टॉक को खरीदने के कई महीने पहले रिसर्च की होती है। इस दौरान शेयरों की वैल्यूएशन बढ़ जाने के आसार होते हैं। जिससे खरीदने के वक्त वे काफी महंगे हो चुके होते हैं।
ऐसे कई रिटेल इनवेस्टर्स हैं, जिन्होंने पहले कभी म्यूचुअल फंड्स में निवेश नहीं किया है। उन्हें अब निवेश नहीं करने का अफसोस हो रहा होगा। ऐसे इनवेस्टर्स को एक बात याद रखनी चाहिए: 10 साल में म्यूचुअल फंड्स की कई स्कीमों ने शानदार रिटर्न दिए हैं। लेकिन, इन रिटर्न का फायदा उठाने के लिए आपके लिए 10 साल तक अपना निवेश बनाए रखना जरूरी है। इस 10 साल के पीरियड में 3-4 साल ऐसे होते हैं, जब आपके पोर्टफोलियो का रिटर्न निगेटिव में होता है। इससे आप निवेश के अपने फैसले पर अफसोस जताना शुरू कर देते हैं।
2007-2008 में मार्केट के बुल रन के समय इनवेस्ट करने वाले कई निवेशकों ने जैसे ही छह साल बाद जैसे ही मार्केट ब्रेक-इवन प्वाइंट पर आया, अपने पैसे निकाल लिए। इसीलिए अनुभवी इनवेस्टर्स यह कहते हैं कि यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खरीदते हैं, मायने यह रखता है कि आपने किस प्राइस पर खरीदा है। गिरावट में आप अपने पैसे निकाल सकते हैं। लेकिन आपको याद रखना चाहिए कि ज्यादातर स्थितियों में लंबी अवधि में SIP (Mutual Fund) ने बहुत अच्छे रिटर्न दिए हैं।
पिछले दो साल से यह सवाल पूछा जा रहा था कि क्या Titan के शेयरों का प्रीमियम वैल्यूएशन बना रहेगा? अब जब मार्केट का ओवरऑल सेंटिमेंट बुलिश है तो टाइटन को भी इसका फायदा मिल रहा है। कंपनी ने पहली तिमाही में बिजनेस मजबूत रहने के अपडेट दिए हैं, जिससे स्टॉक को सपोर्ट मिला है। हालांकि, जून तिमाही आम तौर पर बेहतर होती है, क्योंकि यह शादियों का सीजन होता है। लेकिन, टाइटन पर दांव लगाने वाले इनवेटस्टर को दो बातें ध्यान में रखनी चाहिए: या तो आप मोमेंटम का फायदा उठाने के लिए निवेश करें या लंबी अवधि के लिए निवेश करें। आपका विजन क्लियर होना चाहिए। टाइटन के शेयरों में ऐसा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलता है जैसा मिड और स्मॉलकैप शेयरों में मिलता है। लेकिन, हवा की दिशा बदलने पर ज्यादा वैल्यूएशन और संस्थागत निवेशकों का ज्यादा निवेश लंबे समय तक इस स्टॉक के कमजोर प्रदर्शन की सबब बन सकता है।
इस स्टॉक में 6 जुलाई को 7 फीसदी तेजी आई। इस स्टॉक को लेकर बुल्स का उत्साह चौंकाने वाला है। इसकी वजह यह है कि इस साल इस कंपनी के प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा 63 Moons को होने वाले पेमेंट में निकल जाएगा। सर्विस और लाइसेंस कॉन्ट्रैक्ट को जारी रखने के लिए एमसीएक्स को 63 Moons को 250 करोड़ रुपये का पेमेंट करना है। फिर इस शेयर में अचानक आई तेजी की क्या वजह है? ऐसा लगता है कि इसकी वजह बेयर्स और बुल्स के बीच का टकराव है। बेयर्स अपने पॉजिशन को कवर करने को मजबूर हुए हैं। पिछले शुक्रवार को 1700 के स्ट्राइक प्राइस पर काफी कॉल राइटिंग हुई थी। हालांकि, पिटाई के बाद यह स्टॉक 1500 रुपये के नीचे चला गया था। तब इस स्टॉक के बेयरिश आउटलुक को देखते हुए कॉल राइटर्स को पैसा बनाने का मौका दिखा होगा। 1700 कॉल का ओपन इंटरेस्ट 3,81,000 कॉन्ट्रैक्ट्स है। हालांकि, पिछले दो सेशन में इसमें गिरावट आई है। अगर इस स्टॉक में तेजी जारी रहती है तो फिलहाल कॉल राइटर्स को बड़े नुकसान की चिंता सता रही होगी।