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Short Call : यह बाजार की कैसी तेजी है जो फंड मैनेजर्स की मुसीबत बढ़ा रही है, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए क्या है सबक?

Nippon India Mutual Fund ने गुरुवार को कहा कि वह अपने स्मॉलकैप फंड में एकमुश्त निवेश पर रोक लगाने जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में Tata Small Cap Fund और HDFC Defense Fund ने भी ऐसे ऐलान किए थे। इससे दो बातें पता चलती हैं। पहला, रिटेल इनवेस्टर्स में स्मॉलकैप फंड्स का क्रेज। दूसरा, फंड मैनेजर्स को अच्छे इनवेस्टमेंट आइडियाज तलाशने में हो रही दिक्कत

Curated By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jul 07, 2023 पर 10:29 AM
Short Call : यह बाजार की कैसी तेजी है जो फंड मैनेजर्स की मुसीबत बढ़ा रही है, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए क्या है सबक?
यह मार्केट का ऐसा फेज है, जिसमें हर स्टॉक अट्रेक्टिव दिख रहा है। मार्केट संभावित रिस्क को नहीं देख रहा है। इनमें बढ़ती प्रतियोगिता, डिमांड में अचानक गिरावट और नियमों में बदलाव जैसी स्थितियां शामिल हैं।

अगर आपके मन में यह सवाल है कि स्मॉल और माइक्रोकैप स्टॉक्स की यह तेजी कब तक जारी रहेगी तो आपको उन फंड मैनेजर्स के संकेतों को समझना चाहिए जो स्मॉलकैप और ऐसे दूसरे स्टॉक्स को मैनेज करते हैं। Nippon India Mutual Fund ने गुरुवार को कहा कि वह अपने स्मॉलकैप फंड में एकमुश्त निवेश पर रोक लगाने जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों में Tata Small Cap Fund और HDFC Defense Fund ने भी ऐसे ऐलान किए थे। इससे दो बातें पता चलती हैं। पहला, रिटेल इनवेस्टर्स में स्मॉलकैप फंड्स का क्रेज। दूसरा, फंड मैनेजर्स को अच्छे इनवेस्टमेंट आइडियाज तलाशने में हो रही दिक्कत। यह मार्केट का ऐसा फेज है, जिसमें हर स्टॉक अट्रेक्टिव दिख रहा है। मार्केट संभावित रिस्क को नहीं देख रहा है। इनमें बढ़ती प्रतियोगिता, डिमांड में अचानक गिरावट और नियमों में बदलाव जैसी स्थितियां शामिल हैं।

फंड मैनेजर्स सावधानी बरत रहे हैं, यह अच्छी बात है। हिस्ट्री बताती है कि स्मॉल और मिडकैप स्टॉक्स में गिरावट बहुत दर्द देती है। एकमुश्त निवेश ऐसे इनवेस्टर्स करते हैं जो मोमेंटम का फायदा उठाना चाहते हैं। जब मार्केट में गिरावट आती है, यह मार्केट भी कभी करेक्ट होगा तो यही इनवेस्टर्स सबसे पहले अपने पैसे निकालते हैं। इससे फंड मैनेजर्स के लिए दिक्कत बढ़ जाती है। स्मॉलकैप स्टॉक्स में ज्यादा लिक्विडिटी नहीं होती है। इसका मतलब है कि इन्हें बड़ी संख्या में खरीदना और बेचना आसान नहीं होता है। जब रिडेम्प्शन का प्रेशर आएगा तो फंड मैनेजर्स को अपने पोर्टफोलियो के बेस्ट स्टॉक्स को बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, क्योंकि गिरावट आने पर इन्हीं शेयरों के लिए खरीदार होते हैं।

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पोर्टफोलियो के बेस्ट स्टॉक्स को बेचने पर स्कीम के प्रदर्शन पर असर पड़ता है। इसके चलते स्कीम के निवेशकों का भरोसा डगमगाने लगता है। इससे नया रिडेमप्शन देखने को मिलता है। हम यह ट्रेंड 2001, 2008 और हाल में 2018 में देख चुके हैं। ऐसा नहीं है कि सिर्फ फंड मैनेजर्स के लिए दिक्कत आती है। हाई नेटवर्थ वैल्यू इनवेस्टर्स भी खुद को प्रॉब्लम में पाते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे निवेशकों ने स्टॉक को खरीदने के कई महीने पहले रिसर्च की होती है। इस दौरान शेयरों की वैल्यूएशन बढ़ जाने के आसार होते हैं। जिससे खरीदने के वक्त वे काफी महंगे हो चुके होते हैं।

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