मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने किसी शेयर की क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए नए नियम का प्रस्ताव किया है। क्लोजिंग प्राइस के लिए फिलहाल वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) का चलन है, जबकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलन में मौजूद क्लोज-ऑक्शन सेशन (CAS) का प्रस्ताव दिया गया है। दरअसल, पैसिव इनवेस्टमेंट में बढ़ोतरी के साथ ही रेगुलटर की चिंता इस बात को लेकर है कि निवेशकों को इंडेक्स ट्रैकिंग में अंतर की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। किसी खास दिन या उतार-चढ़ाव में बढ़ोतरी की संभावना वाले दिन ऐसा होता है।
कॉल सेशन के दौरान बायर्स और सेलर्स अपनी कीमतें कोट करते हैं, जिनका इस्तेमाल एक मानक कीमत तय करने में किया जाता है और इसे क्लोजिंग प्राइस माना जाता है। वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस सिस्टम में आखिरी आधे घंटे के ट्रेडिंग डे की कीमत और वॉल्यूम के हिसाब से कीमत तय की जाती है। सेबी ने 5 दिसंबर को जारी कंसल्टेशन पेपर में कहा है कि इक्विटी कैश सेगमेंट में हर स्टॉक की क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए कॉल ऑक्शन सेशन (CAS) को पेश किया जा सकता है।
सेबी के कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है, 'क्लोजिंग प्राइस तय करने का मौजूदा सिस्टम पिछले आधे घंटे की ट्रेडिंग में निवेशकों की दिलचस्पी पर आधारित होता है, लेकिन यह खरीदारों और बिक्री करने वालों को ठीक-ठीक दिन के क्लोजिंग प्राइस के आधार पर ट्रेडिंग की सुविधा नहीं देता है।' रेगुलेटर के मुताबिक, चूंकि भारत में क्लोजिंग प्राइस पिछले आधे घंटे के VWAP पर तय होता है, लिहाजा कुछ इंटरनेशनल पैसिव फंड हाउसों का कहना है कि मौजूदा प्राइस मेकेनिज्म कई तरह के स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव की वजह बन सकता है और मुमकिन है कि ज्यादा जोखिम वाले बड़े ऑर्डर पूरे नहीं पाएं। बड़े इवेंट वाले दिनों के मामले में यह काफी अहम है, मसलन इंडेक्स रीबैलेंसिंग और डेरिवेटिव एक्सपायरी वाले दिन।