MF Investment : पोर्टफोलियो में ज्यादा फंड रखना जरूरी है या सही फंड चुनना? ये सवाल अकसर निवेशकों को परेशान करता है। सामने अगर स्मॉलकैप फंड हो तो समस्या और बढ़ जाती है। क्या वास्तव में स्मॉलकैप के दो फंड रखना फायदेमंद होता है, इसके साथ ही एसेट एलोकेशन का सही फंडा क्या है? पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट और गोल्ड का सही तालमेल तो कितना जरूरी है? इन दोनों सवालों का जवाब देनें के लिए हमारे साथ हैं वाइजइन्वेस्ट के सीईओ हेमंत रुस्तगी।
स्मॉलकैप में निवेश क्यों?
हेमंत रुस्तगी ने कहा कि लंबी अवधि में स्मॉलकैप फंड पोर्टफोलियो का अहम बनते हैं। छोटी कंपनियों में ग्रोथ की संभावना होती है, लेकिन जोखिम भी ज्यादा होते हैं। इसलिए फंड और शेयरों का चयन बेहद जरूरी होता है। स्मॉलकैप में निवेश के दो तरीके हो सकते हैं। मल्टिकैप फंड के जरिए छोटी कंपनियों में निवेश किया जा सकता है। डेडिकेटेड फंड से सीधे इस कैटेगरी पर फोकस किया जा सकता है। निवेश से पहले फंड की रणनीति समझें।
एक से ज्यादा फंड, क्या ओवरलैप बढ़ेगा?
अलग-अलग फंड में एक जैसे शेयर हो सकते हैं। ज्यादा फंड होने से डायवर्सिफिकेशन जरूरी नहीं है कि बढ़े। इसलिए पोर्टफोलियो ओवरलैप की जांच करें।
स्मॉलकैप में दो फंड क्यों?
स्मॉलकैप और माइक्रोकैप शेयरों का दायरा बड़ा है। कई कंपनियों पर रिसर्च सीमित है। अलग फंड मैनेजर अलग शेयर चुन सकते हैं। कई स्मॉलकैप फंड्स में ओवरलैप कम हो सकता है। हर फंड की रणनीति अलग होती है। कुछ फंड सैकड़ों शेयरों में निवेश करते हैं। कुछ चुनिंदा शेयरों पर ज्यादा दांव लगाते हैं। अलग रणनीतियों से निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं।
क्या 2 फंड से जोखिम घटेगा?
कम ओवरलैप से अलग कंपनियों में निवेश का मौका होता है। किसी एक फंड की रणनीति पर निर्भरता कम हो सकती है। लेकिन बाजार गिरने पर दोनों फंड नुकसान दे सकते हैं। निवेशकों के लिए बड़ी सीख यह है कि सिर्फ संख्या बढ़ाने के लिए दूसरा फंड नहीं चुनें। ओवरलैप,रणनीति और प्रदर्शन की तुलना करें। निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता का ध्यान रखें।
एसेट एलोकेशन में सही फंड चुनना क्यों जरूरी?
इससे पोर्टफोलियो में जोखिम और रिटर्न का संतुलन बनाने में मदद मिलती है। एसेट एलोकेशन का मतलब रिटर्न से समझौता करना नहीं होता। सही रणनीति के साथ सही फंड चुनना भी जरूरी होता है। सिर्फ सही एलोकेशन काफी नहीं होता। इक्विटी में कितना निवेश करना है, यह तय करना पहला कदम होना चाहिए। इसके बाद सही कैटेगरी के फंड चुनना अहम होता है। गलत फंड चयन से पोर्टफोलियो का संतुलन बिगड़ सकता है।
फंड चयन में कहां हो सकती है गलती?
इक्विटी का पूरा निवेश सिर्फ लार्ज कैप फंड्स में करना या स्मॉलकैप और सेक्टोरल/थिमेटिक फंड्स पर ज्यादा निर्भर रहना बड़ी गलती हो सकती है। इससे रिटर्न प्रभावित हो सकता है या जोखिम तय सीमा से बढ़ सकता है। इससे बचने को लिए अलग-अलग डाइवर्सिफाइड कैटेगरी के फंड्स में निवेश करें। बहुत ज्यादा आक्रामक फंड्स पर निर्भरता से बचें। निवेश में अनुशासन बनाए रखें।
निवेशकों के लिए बड़ी सीख यह है कि निवेश में एसेट एलोकेशन और फंड चयन,दोनों अहम होते हैं। सिर्फ सही अनुपात तय करना काफी नहीं होता। सही एलोकेशन, सही फंड चयन और अनुशासन से ही बेहतर निवेश अनुभव मिलता है।
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