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Mid-Day Mood : यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़त ने किया परेशान, लाल निशान में सेंसेक्स-निफ्टी

Mid-Day Mood : वीके विजयकुमार का कहना है कि बाजार जियोपॉलिटिकल तनावों से ज्यादा खराब आर्थिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया कर रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही लगातार बढ़त अमेरिकी बाजारों के साथ ही दुनिया के दूसरे बाजारों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। बाजार ने यह नहीं सोचा था कि यूएस 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 4.95 फीसदी के अप्रत्याशित स्तर पर पहुंच जाएगी

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 19, 2023 पर 1:36 PM
Mid-Day Mood : यूएस बॉन्ड यील्ड में बढ़त ने किया परेशान, लाल निशान में सेंसेक्स-निफ्टी
Mid-Day Mood : अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही लगातार बढ़त अमेरिकी बाजारों के साथ ही दुनिया के दूसरे बाजारों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है

Mid-Day Mood : 19 अक्टूबर को दोपहर तक अपने दिन के निचले स्तरों से सुधरने के बावजूद भारतीय बेंचमार्क सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में ही कारोबार कर रहे थे। ग्लोबल मार्केट में छाई कमजोरी का असर भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। अमरिका में 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 4.95 फीसदी के 16 साल के हाई पर पहुंच गई है। इसके चलते दुनियाभर के बाजारों का मूड खराब हो गया है। दोपहर 01.00 बजे के आसपास सेंसेक्स 97.85 अंक या 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 65,779.17 पर और निफ्टी 18.20 अंक या 0.09 फीसदी की कमजोरी के साथ 19652.90 पर नजर आ रहा था। लगभग 1584 शेयरों में बढ़त देखने को मिल रही थी। वहीं, 1548 शेयर गिरे थे। जबकि 89 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही बढ़त सबसे बड़ी चुनौती

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वीके विजयकुमार का कहना है कि बाजार जियोपॉलिटिकल तनावों से ज्यादा खराब आर्थिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया कर रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हो रही लगातार बढ़त अमेरिकी बाजारों के साथ ही दुनिया के दूसरे बाजारों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। बाजार ने यह नहीं सोचा था कि यूएस 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 4.95 फीसदी के अप्रत्याशित स्तर पर पहुंच जाएगी। बॉन्ड यील्ड में इस अप्रत्याशित बढ़त का इक्विटी बाजारों पर निगेटिव असर पड़ेगा।

वीके विजयकुमार का यह भी कहना है कि सिर्फ मौद्रिक नीतियों के कारण ही बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी नहीं आई है। अमेरिका में भारी वित्तीय घाटा भी बॉन्ड की आपूर्ति बढ़ाकर यील्ड में होने बढ़त में योगदान कर रहा है। ऐसे में वित्तीय और मौद्रिक दोनों फैक्टरों का संयोजन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी कर रहा हैं जो इक्विटी बाजारों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करेगा।

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