Mid-day Mood : 20 अक्टूबर को दोपहर के कारोबारी सत्र में इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स दिन के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहे थे। दिग्गज कंपनियों के मिलेजुले नतीजों और कमजोर ग्लोबल संकेतों के बीच निवेश जोखिम से बचने की रणनीति पर काम करते दिख रहे हैं। दोपहर 01.00 बजे के आसपास सेंसेक्स 262.57 अंक या 0.40 फीसदी गिरकर 65,366.67 पर और निफ्टी 92.20 अंक या 0.47 टूटकर 19,532.50 पर नजर आ रहा था। लगभग 1216 शेयर बढ़े थे। वहीं, 1901 शेयरों में गिरावट दिख रही थी। जबकि 94 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिल रहा था।
टीसीएस, कोटक महिंद्रा बैंक, इंडसइंड बैंक, नेस्ले इंडिया और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस निफ्टी के टॉप गेनर हैं। जबकि आईटीसी, बीपीसीएल, एचयूएल, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील निफ्टी के टॉप लूजर नजर आ रहे हैं। सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में दिख रहे हैं। कैपिटल गुड्स, एफएमसीजी, ऑयल एंड गैस, रियल्टी और मेटल में 1 फीसदी की गिरावट के साथ लाल रंग में कारोबार कर रहे हैं। छोटे-मझोले शेयरों में मिला-जुला रुझान देखने को मिल रहा है। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.43 फीसदी फिसल गया, लेकिन स्मॉलकैप इंडेक्स 0.24 फीसदी की तेजी दिखा रहा है।
अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखते हुए, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 19 अक्टूबर को शुद्ध रूप से 1093.47 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। जबकि डीआईआई ने 736.15 करोड़ रुपये की खरीदारी की है।
सुस्त नतीजों के बाद HUL और ITC में करीब दो फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। लेकिन अच्छे रिजल्ट के बाद UBL 3 फीसदी से ज्यादा की उछाल के साथ वायदा का टॉप गेनर बना है। उधर दिल्ली की EV ड्रॉफ्ट पॉलिसी IGL पर भारी पड़ी है। इंट्राडे में ये शेयर 12 फीसदी से ज्यादा टूटा है। दो दिन में इसमें 17 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। IGL के पीछे-पीछे महानगर गैस भी 7 फीसदी टूटा है। GAIL में भी 3 फीसदी की गिरावट आई है।
ग्लोबल मार्केट पर नजर डालें तो एशियाई बाजार 20 अक्टूबर को 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। मध्य पूर्व में संघर्ष और लंबी अवधि की यूएस बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़त ने निवेशकों को परेशान कर दिया है। 10-ईयर यूएस बॉन्ड यील्ड में रातोंरात 5 फीसदी की बढ़त ने दुनिया भर में उधार लेने की लागत बढ़ा दी है। इससे वैल्यूएशन पर दबाव पड़ा है। शुक्रवार को, बैंक ऑफ जापान ने जापानी सरकारी बॉन्ड (जेजीबी) बाजार में हस्तक्षेप किया क्योंकि 10-ईयर जेजीबी यील्ड एक दशक के हाई पर पहुंच गई थी।
अपने भाषण में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने महंगाई में नरमी के हालिया संकेतों को स्वीकार करते हुए कहा कि केंद्रीय बैंक महंगाई को 2 फीसदी पर लाने के अपने लक्ष्य पर बना रहेगा।
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स ने अपने एक नोट में कहा है कि ग्रोथ में मजबूती और लेबर डिमांड में तेजी को देखते हुए मौद्रिक नीति के और सख्त होने की संभावना ने बाजार को चौंका दिया है। अब तक बाजार का मानना था कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची नहीं रह सकतीं। लेकिन अब लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर रहेंगी। इससे वित्तीय बाजारों में अराजकता की स्थिति पैदा हो गई है।
इस नोट में आगे कहा गया है कि अमेरिकी सरकारी बांडों की लगातार बिक्री ने ट्रेजरी यील्ड को 16 सालों के हाई पर ला दिया है, जिससे स्टॉक से लेकर रियल एस्टेट बाजार तक सब कुछ प्रभावित हुआ है क्योंकि मॉर्गेज रेट 20 साल के हाई पर दिख रही हैं।
बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के मौके : जियोजित फाइनेंशियल के वी के विजयकुमार
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वी के विजयकुमार का कहना है कि अमेरिका में 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 5 फीसदी के आसपास मंडरा रही है। ये इक्विटी बाजारों के लिए निगेटिव है। पश्चिम एशिया में अस्थिर स्थिति निकट की अवधि में बाजार के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। एफपीआई की बिक्री जारी रहने की उम्मीद है। इससे बैंकिंग शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है जो एफपीआई के एयूएम का प्रमुख हिस्सा हैं। ऐसे में घरेलू निवेशकों को सही वैल्यूएशन पर मिल रहे बैंकिंग शेयरों को खरीदारी करने का मौका मिल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि ताजे आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड ऊंचाई पर है और इससे खाद्य महंगाई को नियंत्रण में रखा जा सकता है। ऐसे में उम्मीद है आरबीआई एमपीसी लंबे समय तक ब्याज दरों में बढ़त पर विराम लागू रखेगी। यह स्थित बैंकिग शेयरों के लिए अनुकूल है।
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