Adani-Hindenburg Row: इमर्जिंग मार्केट के गुरु और दिग्गज निवेशक मार्क मोबियस (Mark Mobius) का मानना है कि अडानी ग्रुप-हिंडनबर्ग रिपोर्ट विवाद का राजनीतिक असर बहुत कम होगा। मनीकंट्रोल के साथ एक विशेष बातचीत में मोबियस कैपिटल पार्टनर्स के फाउंडर मार्क मोबियस ने कहा, "कई लोगों को लगता है कि अडानी ग्रुप की स्थिति भारत के राजनीतिक समीकरण को बिगाड़ सकता है और जो कुछ हुआ उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी को दोषी ठहराया जा सकता है। मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ भी होगा क्योंकि सबूतों की कमी है।"
मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए जिन सुधारों को लागू किया है, वे अडानी ग्रुप से जुड़े जोखिमों को पीछे छोड़ देंगे। उन्होंने कहा, "ऐसे में इसके राजनीतिक असर काफी मामूली होंगे।"
अमेरिकी शॉर्ट-सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने बीते 24 जनवरी को अडानी ग्रुप पर 'अकाउंटिंग हेरफेर और स्टॉक की कीमतों में छेढ़छाड़' का आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट जारी किया था। इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने बीजेपी की अगुआई वाली केंद्र सरकार पर जमकर बोला था। इस बीच कई बैंकों ने सामने आकर बयान जारी किया और बताया कि उनका अडानी ग्रुप को दिया लोन काफी कम है।
मोबियस के मुताबिक, भारतीय कारोबारी समूह पर हिंडनबर्ग के लगाए आरोपों का सिर्फ राजनीतिक स्तर पर नहीं बल्कि शेयर बाजार में भी सीमित असर होगा।
उन्होंने कहा, 'अडानी कंपनियों की इंडेक्स में हिस्सेदारी सिर्फ 6 फीसदी है। मुझे नहीं लगता कि इस मुद्दे का इस बात पर कोई असर पड़ने वाला है कि लोग भारत के बारे में क्या सोचते हैं। आखिरकार आप किसी सूचकांक को नहीं खरीदते हैं, बल्कि आप किसी व्यक्तिगत कंपनियों में निवेश कर रहे होते हैं।"
उन्होंने बताया कि वह कर्ज के ऊंचे स्तर के चलते अडानी ग्रुप की कंपनियों से दूर रहे हैं। उन्होंने सामान्य तौर पर निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों से दूर रहने की सलाह दी है।
मोबियस ने कहा, "ये (इंफ्रा) कंपनियां अपने प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के लिए भारी कर्ज लेती हैं, और ये प्रोजेक्ट्स अपने कंस्ट्रक्शन चरण के दौरान शॉर्ट-टर्म में कोई पैसा नहीं बनाते हैं। दूसरी तरफ, लोन पर ब्याज तेज गति से बढ़ता जाता है।"