Mutual Funds Return: म्यूचुअल फंड में पैसा बढ़ते देखना अच्छा लगता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आपका पैसा सही रफ्तार से बढ़ रहा है या नहीं। कई निवेशक सिर्फ ग्रीन रिटर्न देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि खेल यहां खत्म नहीं होता।
Mutual Funds Return: म्यूचुअल फंड में पैसा बढ़ते देखना अच्छा लगता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या आपका पैसा सही रफ्तार से बढ़ रहा है या नहीं। कई निवेशक सिर्फ ग्रीन रिटर्न देखकर संतुष्ट हो जाते हैं, जबकि खेल यहां खत्म नहीं होता।
असली समझदारी यह जानने में है कि आपका फंड बाजार और बाकी फंड्स से आगे है या पीछे। अगर आपका फंड सिर्फ बढ़ रहा है, लेकिन दूसरों से धीमा है, तो यह उतना अच्छा सौदा नहीं जितना दिखता है। आइए जानते हैं कि आप कैसे आसानी से पता कर सकते हैं कि आपका म्यूचुअल फंड सही रिटर्न दे रहा है या नहीं।
कितना होना चाहिए रिटर्न
किसी भी निवेश का असली मतलब यही होता है कि वह महंगाई से ज्यादा कमाए। अगर महंगाई सालाना 6% के आसपास बढ़ रही है, तो आपका रिटर्न इससे ऊपर होना जरूरी है। वरना असल में आपकी कमाई बढ़ नहीं रही, बल्कि नुकसान हो रहा है।
आज के समय में 6-7% रिटर्न FD और कई सरकारी योजनाओं में भी मिल जाता है। ऐसे में जब आप म्यूचुअल फंड जैसे अपेक्षाकृत ज्यादा जोखिम वाले विकल्प में निवेश कर रहे हैं, तो आपकी उम्मीद भी उससे ज्यादा होनी चाहिए। इक्विटी म्यूचुअल फंड में लंबे समय में औसतन कम से कम 12% रिटर्न देते हैं।

सिर्फ रिटर्न देखना काफी नहीं
अक्सर निवेशक 10-12% रिटर्न देखकर खुश हो जाते हैं। लेकिन यह नहीं देखते कि उसी कैटेगरी के दूसरे फंड कितना रिटर्न दे रहे हैं। अब मान लीजिए आपका फंड 10% दे रहा है, लेकिन उसी कैटेगरी के दूसरे फंड 14-15% दे रहे हैं।
इसका मतलब साफ है कि आपका फंड औसत या कमजोर प्रदर्शन कर रहा है। इसलिए हमेशा रिटर्न को 'तुलना' के साथ देखना जरूरी है, सिर्फ नंबर देखकर नहीं।
बेंचमार्क से तुलना करना क्यों जरूरी है
हर म्यूचुअल फंड का एक बेंचमार्क इंडेक्स होता है, जैसे निफ्टी 50, सेंसेक्स या मिडकैप इंडेक्स। यह एक तरह से फंड के लिए 'मापने का पैमाना' होता है।
आपको यह देखना चाहिए कि आपका फंड अपने बेंचमार्क से बेहतर रिटर्न दे रहा है या फिर लगातार उससे पीछे चल रहा है। अगर कोई फंड लगातार 2-3 साल तक अपने बेंचमार्क से कम रिटर्न दे रहा है, तो यह संकेत है कि उसमें कुछ गड़बड़ हो सकती है।
अलग-अलग अवधि में रिटर्न देखना जरूरी
कई लोग सिर्फ 1 साल का रिटर्न देखकर फैसला ले लेते हैं, जो कि गलत तरीका है। मार्केट हर साल एक जैसा नहीं रहता। इसलिए आपको कम से कम इन तीन अवधि में रिटर्न देखना चाहिए- 1 साल, 3 साल और 5 साल।
अगर फंड लंबे समय में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तभी उसे भरोसेमंद माना जाता है। छोटे समय में उतार-चढ़ाव होना सामान्य है, लेकिन लंबी अवधि में स्थिरता ज्यादा मायने रखती है।

ज्यादा रिटर्न के लिए ज्यादा रिस्क?
कई बार कोई फंड बहुत ज्यादा रिटर्न देता दिखता है, लेकिन उसमें जोखिम भी ज्यादा होता है। अगर कोई फंड बहुत ज्यादा उछलता-कूदता है, तो वह हर निवेशक के लिए सही नहीं होता। इसलिए सिर्फ रिटर्न नहीं, बल्कि रिस्क के साथ रिटर्न देखना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान इंडिकेटर हैं:
Sharpe Ratio: यह बताता है कि फंड ने लिए गए जोखिम के मुकाबले कितना रिटर्न दिया है। यह रेशियो जितना ज्यादा होगा, उतना बेहतर माना जाता है। यानी कम जोखिम में ज्यादा कमाई।
Standard Deviation : यह दिखाता है कि फंड का रिटर्न कितना ऊपर-नीचे होता है। जितना कम Standard Deviation होगा, उतना फंड स्थिर और कम जोखिम वाला माना जाता है।
Beta : यह बताता है कि फंड बाजार के मुकाबले कितना तेजी से ऊपर-नीचे होता है। अगर Beta 1 से ज्यादा है तो उतार-चढ़ाव ज्यादा होगा, और 1 से कम है तो बाजार के मुकाबले कम हलचल होगी।
SIP में असली रिटर्न कैसे देखें
अगर आप SIP के जरिए निवेश करते हैं, तो आपका रिटर्न साधारण तरीके से नहीं, बल्कि XIRR से सही तरीके से समझ आता है। SIP में आप हर महीने अलग-अलग समय पर पैसा लगाते हैं और हर बार बाजार की कीमत अलग होती है। ऐसे में सिर्फ NAV देखकर यह समझना कि आपने कितना कमाया, सही तस्वीर नहीं देता।
XIRR इस पूरे निवेश को जोड़कर बताता है कि अलग-अलग तारीखों पर लगाए गए पैसे पर आपको कुल मिलाकर कितना प्रतिशत रिटर्न मिला। इसका मतलब है कि XIRR ही SIP का असली रिटर्न दिखाता है, क्योंकि यह समय और निवेश दोनों को साथ में ध्यान में रखता है।

फंड मैनेजर और पोर्टफोलियो भी देखें
म्यूचुअल फंड सिर्फ आंकड़ों से नहीं चलता, उसके पीछे एक फंड मैनेजर और पूरी टीम काम करती है, जो निवेश के फैसले लेते हैं। इसलिए आपको यह देखना जरूरी है कि फंड मैनेजर बार-बार बदल तो नहीं रहा, क्योंकि इससे रणनीति पर असर पड़ सकता है। साथ ही यह भी समझें कि फंड किन सेक्टर और कंपनियों में पैसा लगा रहा है और उसका पोर्टफोलियो कितना संतुलित है।
अगर फंड का निवेश बहुत ज्यादा एक ही सेक्टर या कुछ गिने-चुने शेयरों पर निर्भर है, तो जोखिम बढ़ सकता है और उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है।
कब बदलना चाहिए फंड
हर छोटी गिरावट पर फंड बदलना समझदारी नहीं होती, लेकिन कुछ हालात ऐसे होते हैं जब बदलाव पर विचार करना जरूरी हो जाता है। अगर आपका फंड 2-3 साल तक लगातार अपने बेंचमार्क से पीछे चल रहा है, या उसी कैटेगरी के बेहतर फंड्स के मुकाबले कम रिटर्न दे रहा है, तो यह रेड फ्लैग हो सकता है।
अगर फंड में जोखिम ज्यादा है लेकिन रिटर्न उतना नहीं मिल रहा, तो ऐसे में दूसरे बेहतर विकल्पों को देखना समझदारी भरा कदम हो सकता है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
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