इक्विटी शेयरों और म्यूचुअल फंड्स पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (Long Term Capital Gains Tax) खत्म करने की केंद्र सरकार की कोई योजना नहीं है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को संसद में एक लिखित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और इक्विटी (Equities) के लिए LTCG टैक्स की अवधि को एक साल से बढ़ाकर दो साल करने की भी उसकी कोई योजना नहीं है।
सरकार से संसद में यह पूछा गया था कि क्या वह म्यूचुअल फंड और इक्विटी पर LTCG अवधि को एक साल से बढ़ाकर दो साल करेगी और क्या वह अर्थव्यवस्था के मूड को बढ़ावा देने और कोरोना के बाद रिकवरी की गति को तेज करने के लिए LTCG टैक्स को खत्म करने पर सोच रही है? इस पर सरकार ने कहा, "इस तरह के किसी भी प्रस्ताव पर विचार विमर्श नहीं हो रहा है।"
लिस्टेड इक्विटी शेयरों को बेचने पर मिलने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस को अप्रैल 2018 में टैक्स के दायरे में लाया गया था। शेयरों के संदर्भ में यहां, लॉन्ग-टर्म का मतलब है कि अगर किसी ने शेयर को एक साल या उससे अधिक होल्ड किया है, तो उसे लॉन्ग-टर्म माना जाएगा। लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स, लिस्टेड कंपनियों के शेयरों को बेचने पर मिलने वाले मुनाफे को कहते हैं।
अप्रैल 2018 से पहले शेयरों में निवेश से मिलने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर टैक्स नहीं लगता था।
सरकार ने बताया कि असेसमेंट ईयर 2018-19 से 2020-21 तक LTCG टैक्स से मिली रेवेन्यू का भी खुलासा किया। सरकार ने बताया कि असेसमेंट ईयर 2018-19 में उसने LTCG टैक्स 1,222 करोड़ रुपये कमाए। इसी तरह असेसमेंट ईयर 2019-20 और 2020-21 में क्रमशः 3,460 करोड़ रुपये और 5,311 करोड़ रुपये कमाए हैं।
बता दें कि इक्विटी निवेश में, एक शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स भी लगता है। इसे 12 महीने से कम अवधि में बेचे जाने वाले शेयरों पर 15 पर्सेंट की दर से लगाया जाता है। शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर सभी इनकम टैक्स स्लैब के लिए एक समान है।