बाजार के इस भारी उठापटक के दौर में इक्विटी स्कीमों में रहे बनें या निकल जाएं, जानिए एक्सपर्ट्स की राय

हमारी आपको सलाह होगी कि आप तब तक डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडो में अपना इक्विटी इन्वेस्टमेंट बनाए रखें जब तक की अपने लक्ष्य के बहुत करीब ना पहुंच जाएं

अपडेटेड Jun 02, 2022 पर 2:19 PM
बाजार की वोलैटिलिटी शॉर्ट टर्म में आपके निवेश में भारी उतार-चढ़ाव दिखा सकती है लेकिन लंबी अवधि में वोलैटिलिटी का यह प्रभाव काफी कम हो जाता है

JASH KRIPLANI

वर्तमान कैलेंडर ईयर में स्टॉक मार्केट में हमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। सेंसेक्स और निफ्टी पिछले 2 महीनों में 8 फीसदी से ज्यादा टूटे हैं। इस साल अब तक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 7 फीसदी टूटे हैं। दिग्गज शेयरों की तरह ही छोटे-मझोले शेयरों को भारी मार पड़ी है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स पिछले 2 महीनों में 9 फीसदी टूटा है जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 11 फीसदी टूटा है।

स्टॉक मार्केट में आए इस करेक्शन के चलते म्यूचुअल फंडों के इक्विटी स्कीमों के रिटर्न में भी भारी गिरावट आई है। डायवर्सिफाइड म्यूचुअल फंड स्कीमों पर नजर डालें तो सबसे खराब असर स्मॉलकैप फंडों पर पड़ा है। इस कैटेगरी के औसत रिटर्न में इस साल अब तक 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। इसके बाद दूसरी सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली कैटेगरी मिडकैप फंडों की रही है। इस साल अब तक इसके औसत रिटर्न में 7 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है जबकि लॉर्जकैप फंडों के औसत रिटर्न में इस साल अब तक 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।


इस साल के अब तक के म्यूचुअल फंडों से मिलने वाले रिटर्न और पिछले साल के इसी अवधि के रिटर्न में बहुत बड़ा अंतर है। पिछले साल इसी अवधि में इन तीनों कैटगरियों का औसत रिटर्न 24 फीसदी से 63 फीसदी के रेंज में रहा था। इस साल बाजार की वौलेटिलिटी का अंदाजा India VIX(इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स ) से लगाया जा सकता है जिसमें साल 2022 में अब तक 28 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है।

बढ़ती ब्याज दरों, महंगाई के दबाव और बाजार से विदेशी पैसे की निकासी की दर को देखते हुए उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना रहेगा। ऐसे में आइए देखते हैं कि म्यूचुअल फंड निवेशको की क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति।

पोर्टफोलियों की री-बैलेसिंग

मार्केट की वौलेटिलिटी पोर्टफोलियों की री- बैलेसिंग का अच्छा मौका हो सकती है। उदाहरण के लिए अगर इस उठापटक में आपका इक्विटी डेट एलोकेशन 60:40 से शिफ्ट होकर 50:50 हो गया है तो आप डेट सेगमेंट में अपना 10 फीसदी अतिरिक्त निवेश निकालकर इक्विटी में डाल सकते हैं और अपने मूल एलोकेशन पर आ सकते हैं। एक जाने-माने म्यूचुअल फंड वितरक महेश मीर पुरी का कहना है कि ऐसा करने से आपको सस्ते में मिल रहे अच्छे शेयरों में निवेश करने का मौका मिलता है।

Rupee With Rushabh Investment Services के रुषभ देसाई का कहना है कि पोर्टफोलियो री-बैलेसिंग करते समय किया जाने वाला नया इक्विटी इन्वेस्टमेंट लंबी अवधि के नजरिए से किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि बाजार गिर चुका है लेकिव अभी हमें और वोलेटिलिटी देखने को मिल सकती है। ऐसे में सारा नया निवेश एक ही बार में नहीं कर देना चाहिए । निवेशकों को 3-6 महीने के अवधि में रुक-रुक कर किस्तों में निवेश करना चाहिए। इसके लिए आप अपने एसआईपी इन्वेस्टमेंट प्लान में टॉपअप लेने का तरीका भी अपना सकते हैं या फिर अगर चाहें तो सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान से लिंक्ड स्कीम में पड़े अपने फंड का उपयोग नए निवेश के लिए कर सकते हैं।

अगर आप अपने लक्ष्य से दूर हैं तो निवेशित बने रहें। अगर आपका फाइनेंशियल गोल अभी भी काफी दूर नजर आ रहा है तो अभी भी आपको अपने इक्विटी निवेश को रिडीम करने से बचना चाहिए। बाजार की वोलैटिलिटी शॉर्ट टर्म में आपके निवेश में भारी उतार-चढ़ाव दिखा सकती है लेकिन लंबी अवधि में वोलैटिलिटी का यह प्रभाव काफी कम हो जाता है। लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए इक्विटी में निवेश करना एक बेहतर रणनीति है। इसमें आपको लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना होती है। वहीं दूसरी तरफ अगर आप अपने वित्तीय लक्ष्य के काफी करीब हैं तो आप अपने निवेश से कुछ मुनाफा वसूल सकते हैं और उसको कम वोलैटिलिटी वाले इस्ट्रूमेंट में निवेश करने की रणनीति अपना सकते हैं।

Daily Voice : बाजार अभी भी मुश्किलों से बाहर नहीं, मिड और स्मॉल कैप में नजर आ रहे निवेश के मौके : संतोष जोसेफ

अंत में हमारी आपको सलाह होगी कि आप तब तक डायवर्सिफाइड इक्विटी फंडो में अपना इक्विटी इन्वेस्टमेंट बनाए रखें जब तक की अपने लक्ष्य के बहुत करीब ना पहुंच जाएं। इसके साथ ही सेक्टर और थीम आधारित फंडों में ओवर इन्वेस्टेड होने से बचें क्योंकि सेक्टर और थीम आधारित इक्विटी फंडों में बाजार के वोलेटाइल होने पर ज्यादा असर पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।