Mutual Fund Alert: SEBI का बड़ा बदलाव! 1 नवंबर से इस तरीके से होगा निवेश

Mutual Fund News: अगले महीने नवंबर की शुरुआत से म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए काफी कुछ बदलने वाला है। 1 नवंबर से जब किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश शुरू करेंगे और कोई विकल्प नहीं चुनते हैं तो अपने आप निवेश डायरेक्ट प्लान के तहत शुरू हो जाएगा। जानिए इसका मतलब और सेबी ने ऐसा क्यों किया

अपडेटेड Oct 29, 2026 पर 10:04 AM
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Mutual Fund News: डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेश्यो कम होने के कारण समान स्कीम के रेगुलर प्लान की तुलना में निवेशकों को लॉन्ग टर्म में अधिक नेट रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

Mutual Fund News: म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए 1 नवंबर से बड़ा बदलाव होने वाला है। मार्केट रेगुलेटर SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे के मुताबिक AMCs (एसेट मैनेजमेंट कंपनीज) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान डिफॉल्ट विकल्प होगा यानी कि अगर किसी प्लान में निवेश शुरू किया और विकल्प नहीं चुना तो यह अपने आप डायरेक्ट प्लान ले लेगा। सेबी के प्रमुख ने ये बातें एक मीडिया कंपनी के मुंबई में हुए इवेंट में कही। वहीं रेगुलर प्लान चुनने वाले निवेशकों को एक्सपेंस रेश्यो के बारे में जानकारी देनी होगी। सेबी ने यह कदम निवेशकों को निवेश की लागत समझने और सोच-समझकर फैसला लेने में मदद करने के उद्देश्य से उठाया है।

Direct और Regular Mutual Fund में क्या अंतर है?

डायरेक्ट और रेगुलर, दोनों प्लान एक ही म्यूचुअल फंड स्कीम के तहत आते हैं। दोनों का पोर्टफोलियो और फंड मैनेजर समान होता है, लेकिन निवेश करने का तरीका और खर्च अलग-अलग होते हैं। डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे म्यूचुअल फंड कंपनी से निवेश करते हैं, जबकि रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश किया जाता है। रेगुलर प्लान में आमतौर पर डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन शामिल रहता है, जिसके चलते इसमें एक्सपेंस रेशियो अधिक होता है। एक्सपेंस रेश्यो किसी म्यूचुअल फंड स्कीम को संभालने में आने वाला सालाना खर्च है, जिसे स्कीम के एसेट्स से निकाला जाता है तो निवेशक का वास्तविक रिटर्न प्रभावित होता है।


एक्सपेंस रेश्यो कम होने से रिटर्न पर कितना असर

डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेश्यो कम होने के कारण समान स्कीम के रेगुलर प्लान की तुलना में निवेशकों को लॉन्ग टर्म में अधिक नेट रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। लंबे समय में खर्च का अंतर कंपाउंडिंग पर भी असर डाल सकता है। कम खर्च का मतलब है कि निवेश का अधिक पैसा रिटर्न कमाने के लिए फंड में बना रहता है।

क्या बंद हो जाएगा रेगुलर प्लान?

सेबी ने म्यूचु्अल फंड स्कीम के लिए डायरेक्ट प्लान को 1 नवंबर से डिफॉल्ट करने का ऐलान किया है। हालांकि इस ऐलान का मतलब रेगुलर प्लान को बंद करना नहीं है। निवेशक इसे भी चुन सकेंगे, लेकिन म्यूचुअल फंड्स को इसके अधिक एक्सपेंस रेश्यो की जानकारी देनी होगी। डायरेक्ट प्लान को इसलिए डिफॉल्ट बनाया जा रहा है, ताकि निवेशक कम लागत वाले विकल्प को लेकर जागरूक हों। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि नया डिफॉल्ट विकल्प थर्ड-पार्टी निवेश प्लेटफॉर्म पर लागू होगा या नहीं। ऐसे में निवेश से पहले एएमसी के प्लेटफॉर्म पर सभी नियमों को चेक करना जरूरी है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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