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SEBI के फीस की सीमा तय करने से म्यूचुअल फंडों का प्रॉफिट 30% तक घट सकता है, जेफरीज की स्टडी के नतीजे

SEBI ने हाल में म्यूचुअल फंड्स स्कीमों के लिए एक समाना टोटल एक्सपेंस रेशियो लागू करने का प्रस्ताव पेश किया है। ऐसा निवेशकों से लिए जाने वाली फीसी में ज्यादा पारदर्शिता लाने के मकसद से किया गया है। जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों में बदलाव से टॉप 5 म्यूचुअल फंड्स कंपनियों पर काफी ज्यादा असर पड़ेगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 12, 2023 पर 12:08 PM
SEBI के फीस की सीमा तय करने से म्यूचुअल फंडों का प्रॉफिट 30% तक घट सकता है, जेफरीज की स्टडी के नतीजे
इस साल की शुरुआत से ही म्यूचुअल फंड कंपनियों के एसेट अंडर मैनेजमेंट पर दबाव है। इसकी कई वजहें हैं। इनमें डेट फंड के टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लॉन्ग टर्म इंडेक्सेशन बेनेफिट बंद होना शामिल हैं।

म्यूचुअल फंड्स स्कीमों (Mutual Funds Schemes) के लिए अगर फीस की सीमा तय की जाती है तो एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के प्रॉफिट में 30 फीसदी कमी आ सकती है। बड़ी एएमसी पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा। उनके प्रॉफिट में 50 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। बड़े एएमसी की फीस में कमी आने से इस सेक्टर में कंसॉलिडेशन और विलय एवं अधिग्रहण (M&A) में भी कमी आ सकती है। जेफरीज की रिपोर्ट में यह कहा गया है। इसमें कहा गया है कि इक्विटी-लिंक्ड TER में बदलाव की वजह से पॉफिट पर पड़ने वाला अंतर 30 फीसदी तक हो सकता है।

छोटी एएमसी के मार्केट शेयर में आ सकती है कमी

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस बारे में कैलुकलेशन किया है। इसमें बताया गया है कि म्यूचुअल फंडों के इक्विटी-लिंक्ड एसेट्स अंडर मैनेजमेंट की फीस की सीमा तय करने से बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों की इक्विटी फीस 30 बेसिस प्वॉइंट्स तक घट जाएगी। इसके उलट छोटी एएमसी जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट 10 अरब डॉलर से कम है उनकी इक्विटी फीस में करीब 10 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी हो सकती है। फीस में यह अंतर 60 से 100 बेसिस प्वाइंट्स तक हो सकता है। इससे छोटी एएमसी के मार्केट शेयर में कमी आ सकती है, जबकि बड़ी एएमसी को फायदा होगा।

टॉप 5 म्यूचुअल फंंड कंपनियों पर ज्यादा असर पड़ेगा

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