Get App

इंडियन आर्मी में अग्निवीर बनना गल्फ जाने से बेहतर...जानिए गोरखा भर्ती में अड़ंगा लगाना नेपाल को कैसे पड़ रहा भारी

अग्निपथ योजना से पहले भारतीय सेना स्वतंत्रता के समय नेपाल, भारत और ब्रिटेन के बीच साइन की गई त्रिपक्षीय संधि के तहत नेपाली गोरखा सैनिकों की भर्ती करती थी। इस संधि के तहत गोरखा सैनिकों की चार रेजिमेंट (2nd, 6th, 7th और 10th) ब्रिटिश सेना को सौंपी गई थीं। बाकी रेजिमेंट (1st, 3rd, 4th, 5th, 8th और 9th) भारतीय सेना के पास रहीं। आजादी के तुरंत बाद भारत ने 11वीं गोरखा राइफल्स नाम से एक नई रेजिमेंट भी बनाई थी

Edited By: Rajat Kumarअपडेटेड Aug 14, 2026 पर 6:52 PM
इंडियन आर्मी में अग्निवीर बनना गल्फ जाने से बेहतर...जानिए गोरखा भर्ती में अड़ंगा लगाना नेपाल को कैसे पड़ रहा भारी
भारतीय सेना प्रमुख की काठमांडू यात्रा (16 अगस्त) से ठीक पहले नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है।

भारतीय सेना प्रमुख की काठमांडू यात्रा (16 अगस्त) से ठीक पहले नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और उनके समर्थकों ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया है। इन पूर्व सैनिकों की मुख्य मांग है कि भारत सरकार अपनी अग्निपथ योजना के तहत नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती करने की प्रक्रिया को तुरंत फिर से शुरू करे। हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टपोस्ट के एक एक्सप्लेनर आर्टिकल के मुताबिक यह प्रदर्शन बुधवार को इंडियन एक्स-सर्विसमेन गोरखा ब्रिगेड नेपाल पोखरा द्वारा आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने पोखरा स्टेडियम से कास्की जिले के जिला प्रशासन कार्यालय तक रैली निकाली और बाद में नेपाल की फेडरल गवर्नमेंट को दो सूत्री ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में अग्निवीर भर्ती को तत्काल बहाल करने और अपने नाम में सैनिक शब्द का इस्तेमाल करने वाले पूर्व सैनिक संगठनों का नवीनीकरण करने की मांग की गई है।

प्रदर्शन के दौरान पूर्व सैनिक और उनके परिजन अपने हाथों में बैनर और तख्तियां लिए हुए थे। इन पर 'अग्निपथ के तहत नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती करो', 'गृह मंत्रालय के पत्र को रद्द करो' और 'पूर्व सैनिकों की आवाज सुनो' जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्ण बहादुर खत्री ने चेतावनी दी कि सुगौली संधि के दौर से चली आ रही 200 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा अब खतरे में पड़ गई है। उन्होंने कहा कि सुगौली संधि के बाद भारत में नेपाली युवाओं की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी और यह 207 वर्षों से लगातार जारी थी। भारत द्वारा अग्निपथ योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने से रोक दिया है, जिससे सैकड़ों युवाओं के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।

नेपाल की 'रातोपाटी' मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व सैनिकों द्वारा सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले खाड़ी (गल्फ) देशों में जाकर न्यूनतम वेतन पर काम करने की तुलना में भारतीय सेना में नौकरी करना सैकड़ों गुना बेहतर है। अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा के दौरान युवा विभिन्न सुविधाओं के साथ लगभग 45 से 50 लाख रुपये कमा लेते हैं।

क्या है भारत की अग्निपथ योजना?

सब समाचार

+ और भी पढ़ें