सेबी ने क्रेडिट इंटर-स्कीम ट्रांसफर में गड़बड़ी के लिए PGIM AMC और उसके सीईओ, फंड मैनेजर्स पर ठोका जुर्माना

SEBI ने PGIM AMC पर 25 लाख, सीईओ पर 5 लाख रुपये और तीन फंड मैनेजरों पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है

अपडेटेड Jul 02, 2022 पर 11:41 AM
SEBI ने इससे पहले Kotak Mahindra Asset Management, उसके सीईओ, ट्रस्टी कंपनी और डेट फंड मैनेजरों पर कुल 1.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था

सेबी (Securities and Exchange Board of India (Sebi) ने पीजीआईएम एएमसी (PGIM AMC) पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इसके अतिरिक्त रेग्युलेटर ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अजीत मेनन, पर 5 लाख रुपये और तीन फंड मैनेजर, कुमारेश रामकृष्णन, पुनीत पाल और राकेश सूरी पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। रामकृष्णन फंड हाउस के फिक्स्ड इंकम के पूर्व मुख्य अधिकारी थे। उन्होंने नवंबर 2021 में फंड हाउस छोड़ दिया था। वहीं पाल फंड हाउस के फिक्स्ड इनकम के वर्तमान मुख्य अधिकारी हैं। सूरी फंड हाउस में डेट फंड मैनेजर थे लेकिन उन्होंने भी जून 2019 में फर्म से इस्तीफा दे दिया था।

क्या है इन पर आरोप

सेबी ने पीजीआईएम एएमसी को अपने क्लोज्ड-एंड फंड्स से ओपन-एंडेड फंड्स में अच्छी क्वालिटी के सिक्योरिटीज को ट्रांसफर करने का दोषी पाया। PGIM AMC ने ओपन-एंडेड स्कीम्स से क्लोज-एंड स्कीम्स में स्ट्रेस्ड सिक्योरिटीज को ट्रांसफर करने के दौरान इस अनियमितता को अंजाम दिया था। सेबी ने अपने आदेश में 2018 में सनी व्यू और एसडी कॉरपोरेशन जैसी कुछ सिक्योरिटीज में निवेश करने के फंड हाउस के फैसले पर भी सवाल उठाया है।


PGIM AMC और उसके अधिकारियों पर सेबी का नवीनतम दंड कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (Kotak Mahindra Asset Management Co Ltd) पर उसके हालिया आदेश के बाद आया है। उस मामले में सेबी ने फंड हाउस, उसके सीईओ, उसकी ट्रस्टी कंपनी और उसके डेट फंड मैनेजरों पर कुल 1.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

ये जुर्माना एस्सेल समूह की कंपनियों में निवेश करते समय सेबी के नियमों का उल्लंघन करने पर लगाया गया था।

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पीजीआईएम एएमसी की तरह कोटक एएमसी का एपिसोड भी बड़े क्रेडिट संकट का हिस्सा था। इसने 2018 (IL&FS संकट का वर्ष) और 2020 (जब Franklin Templeton India ने अपने छह डेट फंड बंद कर दिए थे) के बीच एमएफ इंडस्ट्री और डेट मार्केट में हाहाकार मचा दिया था।

पीजीआईएम एएमसी के मामले में रेग्युलेटर ने इंटर-स्कीम ट्रांसफर के 315 मामले पाए हैं। इनमें से 25 मामले सिक्योरिटीज से संबंधित थे जिन्हें शिफ्ट से पहले या बाद में डाउनग्रेड किया गया था। इंटर-स्कीम ट्रांसफर के दौरान सेबी ने पाया कि फंड हाउस ने स्ट्रेस्ड सिक्योरिटीज को ओपन-एंडेड स्कीम्स से क्लोज-एंडेड स्कीम्स में ट्रांसफर किया। जबकि अच्छी सिक्योरिटीज को क्लोज-एंडेड स्कीम्स से ओपन-एंडेड स्कीम में ट्रांसफर किया था।

बता दें कि सालों से फंड हाउस द्वारा इंटर-स्कीम्स ट्रांसफर्स किए जा रहे हैं। बशर्ते सिक्योरिटीज उस स्कीम के उद्देश्यों को पूरा करती हों जिसमें उन्हें ट्रांसफर किया जाता है। लेकिन फंड हाउस स्ट्रेस्ड सिक्योरिटीज को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करते पाए गए हैं। खासकर फंड हाउसेज ने ओपन-एंडेड स्कीम्स को लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के लिए ज्यादातर ओपन-एंडेड फंड्स से क्लोज-एंडेड फंड्स में ट्रांसफर किया है। ओपन-एंडेड फंड्स में डेली बेसिस पर खरीदारी और बिकवाली होती है। इसलिए ऐसी स्कीम्स में लिक्विडिटी बहुत अहम होती है।

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PGIM ने बचाव में क्या कहा

सेबी के आदेश के बाद PGIM AMC ने अपने एक्शन का बचाव करते हुए कहा कि ओपन-एंडेड स्कीम्स से क्लोज-एंड स्कीम्स में सिक्योरिटीज को ट्रांसफर करने के बाद भी पहल की स्कीम्स में अभी भी उन्हीं सिक्योरिटीज का बड़ा हिस्सा मौजूद है। फंड हाउस ने कहा कि पहले से मौजूद सिक्योरिटीज ने ब्याज देना जारी रखा है। सेबी ने जो भी डाउनग्रेड नोटिस किया है, वह "केवल एक छोटा मामला है" था। ये इंटर-स्कीम ट्रांसफर के "बहुत बाद में" या "पहले" हुआ है।

इस संबंध में जब मनीकंट्रोल ने PGIM India Mutual Fund से संपर्क किया तो उनके एक प्रवक्ता ने कहा कि हमारी तरफ से कोई भी अनियमितता नहीं बरती गई है। हम सेबी के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। हम इसके लिए अपने पास उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करेंगे।

 

 

 

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