When to Start SIP: मार्केट के हाई या क्रैश, कब शुरू करें एसआईपी, 30 साल के आंकड़ों से सामने आई चौंकाने वाली बात

घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) रिकॉर्ड हाई से नीचे बने हुए हैं। ऐसे में निवेशकों को उलझन है कि क्या SIP (सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान्स) अभी शुरू करने का सही समय है या मार्केट में रिकवरी तक का इंतजार करना चाहिए। जानिए इसे लेकर 30 साल के आंकड़े क्या संकेत देते हैं

अपडेटेड May 25, 2026 पर 2:35 PM
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When to Start SIP: 30 साल के आंकड़ों को एनालाइज करने के बाद यह तय हो गया है कि हर महीने की एसआईपी के लिए सही समय पकड़ने की कोशिश लॉन्ग टर्म में अधिक फर्क नहीं पेदा करती है।

When to Start SIP: मार्केट की उठा-पटक से घबराने वाले निवेशकों के लिए एसआईपी (सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान्स) मार्केट में पैसे लगाने का शानदार विकल्प पेश करता है। हालांकि सवाल ये उठता है कि जैसे शेयरों के बारे में कहा जाता है कि जब यह काफी नीचे हो, तो खरीदना चाहिए और हाई पर बेचना चाहिए, क्या वैसा ही एसआईपी के लिए भी सही है यानी कि मार्केट हाई पर हो तो एसआईपी शुरू करना चाहिए या मार्केट क्रैश में इसे शुरू करना बेहतर है। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचूअल फंड एसआईपी एनालिसिस रिपोर्ट (मई 2026) में सामने आया है कि मार्केट के निचले स्तर पर शुरू किए गए एसआईपी ने फीसदी रिटर्न के मामले में थोड़ा बेहतर परफॉर्म किया, लेकिन हाई मार्केट पर शुरू किए गए एसआईपी से कुल रुपये के हिसाब से अधिक दौलत बनी।

इसकी मुख्य वजह ये है कि जिन्होंने पहले निवेश शुरू किया, वे लंबे समय तक बने रहे जिससे कंपाउंडिंग को अपना जादू दिखाने के लिए लंबा निवेश आधार मिल गया। रिपोर्ट में निवेश शुरू करने में देरी यानी कॉस्ट ऑफ डिले का भी खुलासा किया गया है। जितना अधिक बाजार के गिरने का इंतजार करेंगे, उतना ही पैसे बनाने का मौका खोते रहेंगे।

क्या कहते हैं आंकड़े


म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट में साल 1996 से BSE Sensex TRI के उन 9 बड़े करेक्शन साइकल को एनालाइज किया गया है, जिनमें मार्केट अपने हाई लेवल से 20% से अधिक गिरा था। तुलना के लिए मान लेते हैं कि दो निवेशकों में से एक ने बाजार के हाई लेवल के आस-पास ₹10 हजार की मंथली एसआईपी शुरू की तो दूसरे निवेशक ने मार्केट के निचले स्तर के आस-पास एसआईपी शुरू की। इन दोनों ने अप्रैल 2026 तक निवेश जारी रखा। रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट के निचले स्तर पर शुरू हुए SIPs का फीसदी रिटर्न थोड़ा अधिक रहा, लेकिन कुल पैसे के मामले में मार्केट के हाई लेवल पर शुरू की गई SIPs ने बाजी मारी।

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जैसे कि 2008 के साइकिल में मार्केट के हाई लेवल पर जनवरी 2008 में शुरू की गई एसआईपी 18.3 वर्षों तक बनी रही और अप्रैल 2026 में ₹73.46 करोड़ की दौलत तैयार हुई। वहीं मार्च 2009 में जब मार्केट काफी नीचे आ गया था, उस समय शुरू की गई एसआईपी से 17.2 वर्षों में ₹63.03 लाख की ही दौलत बनी। इसका मतलब हुआ कि पहले निवेश शुरू करने वाले निवेशक को अतिरिक्त साल के नियमित समय पर निवेश का फायदा मिला, न कि बेहतर मार्केट टाइमिंग का। रिपोर्ट के मुताबिक समय के साथ यह फर्क और बढ़ सकता है। इसमें दावा किया गया है कि बाजार जितना अधिक समय बॉटन तक फिसलने में लेता है, उतना ही अधिक मौका निवेशक खो देता है।

इस रिपोर्ट से एक और अहम बात सामने आई है कि अलग-अलग एंट्री प्वाइंट्स और बड़े मार्केट करेक्शंस के बावजूद एसआईपी रिटर्न काफी समान रहे। जैसे कि साल 2000 के डॉटकॉम क्रैश में मार्केट 54% गिरा था। फिर भी फरवरी 2000 में बाजार के पीक पर SIP शुरू करने वाले निवेशक को 13.85% का XIRR मिला, जबकि सितंबर 2001 में बाजार के बॉटम पर SIP शुरू करने वाले निवेशक को 13.92% का XIRR मिला। इस प्रकार लगभग 20 साल के लंबे समय में एसआईपी में निवेश ने टाइमिंग के असर को काफी हद तक कम कर दिया और लगभग समान सालाना रिटर्न दिए।

क्या करना चाहिए निवेशकों को?

30 साल के आंकड़ों को एनालाइज करने के बाद यह तय हो गया है कि हर महीने की एसआईपी के लिए सही समय पकड़ने की कोशिश लॉन्ग टर्म में अधिक फर्क नहीं पेदा करती है। अगस्त 1996 से अप्रैल 2026 के बीच BSE Sensex TRI में महीने के सबसे अच्छे दिन शुरू किए गए SIP ने 13.80% का XIRR दिया, जबकि सबसे खराब दिन निवेश करने पर भी 13.32% का रिटर्न मिला। इससे यह पक्का हो जाता है कि अच्छा मौका तलाशने की बजाय लंबे समय तक एसआईपी में निवेश बनाए रखें और मार्केट की गिरावट में भी पैसे लगाते रहें।

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