प्राइवेट मार्केट्स में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की वैल्यूएशन पिछले 4 महीनों में दोगुना बढ़कर 36 अरब डॉलर हो गई है। मामले से वाकिफ सूत्रों के मुताबिक, निवेशकों को उम्मीद है कि स्टॉक एक्सचेंज का IPO अगले साल की पहली तिमाही तक देखने को मिल सकता है। सूत्रों ने नाम जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर बताया कि कॉन्ट्रैक्ट्स के हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव एक्सचेंज में अनलिस्टेड शेयरों की बड़ी मांग है। उनके मुताबिक, इन शेयरों की मांग सप्लाई से ज्यादा है और इनकी बिक्री 5,700 रुपये से 6,500 रुपये की रेंज में हुई है।
सूत्रों के मुताबिक, लिस्टिंग प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही आने वाले महीनों में फर्म के वैल्यूएशन में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। एक सूत्र ने बताया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अगले साल के शुरू तक IPO के लिए दस्तावेज संबंधी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, लिस्टिंग में एक्सचेंज को अभी और वक्त लग सकता है।
इस सिलसिले में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भेजी गई ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। शेयर मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने NSE को एक दशक पुराने एक मामले में आरोपों से बरी कर दिया था, जो एक्सचेंज की पब्लिक लिस्टिंग में अहम बाधा थी। लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (LIC) और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट जैसे बड़े निवेशकों की मदद से एक्सचेंज ने 2016 में IPO के लिए दस्तावेज सौंपे थे।
हालांकि, उस वक्त रेगुलेटर ने एक्सचेंज की सिक्योरिटीज मार्केट में एंट्री पर 6 महीने की पाबंदी लगा दी थी और उस पर जुर्माना भी लगाया था। सेबी ने ब्रोकरेज फर्म OPG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गलत तरीके से मार्केट ऐक्सेस के मामले में स्टॉक एक्सचेंज पर यह कार्रवाई की थी। इस साल मई में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की वैल्यूएशन 17-18 अरब डॉलर आंकी गई थी।