नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) अहमदाबाद ने ICICI बैंक को मार्केट रेगुलेटर का वह ऑर्डर साझा करने को कहा है, जिसमें उसे ICICI सिक्योरिटीज की डीलिस्टिंग के मामले में ढील दी गई है। बेंगलुरु के पोर्टफोलियो मैनेजर मनु ऋषि गुप्ता की तरफ से दायर याचिका पर यह निर्देश दिया गया है। गुप्ता ने ICICI सिक्योरिटीज (ICICI Securities) की डीलिस्टिंग पर आपत्ति जताई है।
ICICI सिक्योरिटीज ने 29 जून 2023 को डीलिस्टिंग का प्लान सौंपा था और इसके बाद पेरेंट फर्म ICICI बैंक के साथ उसका मर्जर हुआ था। ICICI बैंक ने 29 जून 2023 को इस प्लान को मंजूरी दी थी। शेयरहोल्डर्स ने इस साल मार्च में डीलिस्टिंग प्लान को मंजूरी दी थी। इसके तहत 72% माइनिरिटी इनवेस्टर्स ने मर्जर के पक्ष में वोटिंग की थी।
ट्राइब्यूनल ने 19 सितंबर को जारी अपने आदेश में कहा है, ' सेबी ने 20 जून 2023 की चिट्ठी के जरिये सेबी डीलिस्टिंग रेगुलेशंस के मामले में जो ढील दी है, वह रिकॉर्ड में नहीं है। सेबी ने 6 जुलाई 2021 के सर्कुलर को ध्यान में रखते हुए यह ढील दी थी। इसके अलावा, सेबी की तरफ से 28 नवंबर 2023 को दी गई मंजूरी भी रिकॉर्ड में नहीं है।'
ट्राइब्यूनल के ऑर्डर में कहा गया है कि याचिकाकर्ता कंपनी ने 9 मई 2024 को कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI)के जवाब के बाद हलफनामा भी दायर नहीं किया है। CCI ने NCLT अहमदाबाद द्वारा कंपनी एक्ट के सेक्शन 230 के तहत जाीर किए नोटिस का जवाब दिया था। ICICI बैंक के सीनियर वकील का कहना था कि CCI का जवाब कंपनी को नहीं मिला, क्योंकि जवाब सीधे ट्राइब्यूनल को दिया गया था।