फटाफट लॉन्च होंगी AIF की फंड स्कीम्स, SEBI ने बदले नियम, लेकिन बढ़ा इनका काम

SEBI New Rule: अब एआईएफ फटाफट नई स्कीम लॉन्च कर सकेंगे। सेबी ने नया नियम लागू किया है जिससे सेबी के पास एप्लीकेशन फाइल करने के 30 दिन बाद ही फंड लॉन्च हो सकता है। जानिए कि पहले इसमें देरी क्यों होती थी और अब इसे फटाफट लॉन्च करने की व्यवस्था कैसे संभव हो पा रही है

अपडेटेड May 02, 2026 पर 11:59 AM
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SEBI के नए फ्रेमवर्क के तहत AIF के फंड से जुड़े डिस्क्लोजर्स की जिम्मेदारी अब स्पष्ट रूप से इंटरमीडिएट्स पर आ गई है।

बाजार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के प्रोसेसिंग प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPMs) की प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म शुरू किया है। इसका लक्ष्य मंजूरी की समयसीमा कम करना और फंड लॉन्च को आसान बनाना है। नए फ्रेमवर्क के तहत, बड़ी वैल्यू वाले फंड्स (LVFs) को छोड़कर AIFs अब सेबी के पास फाइलिंग के 30 दिनों बाद नई स्कीम लॉन्च कर सकते हैं और अपने PPM निवेशकों को भेज सकते हैं, अगर सेबी कोई आपत्ति नहीं जताता है। पहले यह प्रक्रिया काफी लंबी थी क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर जांच, कई चरणों की कमेंट्स और फिर से सबमिशन जैसे स्टेप थे।

बता दें कि सेबी का यह सर्कुलर तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है और ऐसे एप्लिकेशन पर भी लागू होगा, जोकि अभी पेंडिंग है। सेबी का यह कदम फटाफट पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ इंटरमीडिएट्स की जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

SEBI ने बनाए ये नियम


पहली बार लॉन्च हो रही स्कीमों को लेकर सेबी का कहना है कि फंड रजिस्ट्रेशन पाने या फाइलिंग के 30 दिन पूरे होने, इसमें से जो बाद में हो, तब आगे बढ़ सकते हैं। इन 30 दिनों के भीतर अगर सेबी कोई कमेंट कर देता है तो पीपीएम के सर्कुलेशन या स्कीम लॉन्च होने के पहले इस पर काम करना होगा। सेबी ने फंड जुटाने के लिए एक निश्चित समयसीमा भी तय की है। AIFs को स्कीम लॉन्च करने की मंजूरी मिलने के 12 महीनों के भीतर उसका पहला क्लोज घोषित करना होगा।

तो क्या अब नहीं होगी जांच?

सेबी के नए फ्रेमवर्क के तहत डिस्क्लोजर्स की जिम्मेदारी अब स्पष्ट रूप से इंटरमीडिएट्स पर आ गई है। अब पीपीएम में जो भी जानकारियां दी जा रही हैं, वह सही है और पूरी है, इसकी पूरी जवाबदेही मर्चेंट बैंकर्स और एआईएफ मैनेजर्स की होगी। नए नियमों के तहत AIF को ड्यू डिलिजेंस सर्टिफिकेट, फिट-एंड-प्रॉपर डिक्लेरेशन, स्पॉन्सर के प्रतिबद्धता की डिटेल्स और प्रमुख एंटिटीज और एंप्लॉयीज की पहचान से जुड़े डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे। सेबी ने एक स्टैंडर्ड डिस्क्लेमर लागू किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि पीपीएफ फाइल करना नियामकीय मंजूरी के बराबर नहीं है और खुलासों की जिम्मेदारी फंड मैनेजर और मर्चेंट बैंकर की होगी।

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