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नौसिखिए रिटेल निवेशक मार्केट में मचा रहे धूम, बुल की सवारी करें लेकिन संभल के: वीके विजय कुमार

नए निवेशकों का बाजार में कूदना घर बैठकर ट्रेडिंग करना अब ग्लोबल ट्रेंड बन चुका है.

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 18, 2021 पर 5:25 PM
नौसिखिए रिटेल निवेशक मार्केट में मचा रहे धूम, बुल की सवारी करें लेकिन संभल के: वीके विजय कुमार

VK VIJAYAKUMAR, Chief Investment Strategist at Geojit Financial Services.

भारत में वित्त वर्ष 2021 में 1.47 करोड़ नए डीमैट एकाउंट खुले हैं। नए निवेशकों का बाजार में कूदना घर बैठकर ट्रेडिंग करना अब ग्लोबल ट्रेंड बन चुका है। इस बात को ध्यान में रखें कि शेटर बाजार अक्सर दोनों तरफ यानी ऊपर या नीचे रिएक्ट करता है।

बियर फेज खासकर बाजार में किसी क्रैश की स्थिति में जब निवेश पेनिक में आकर बिकवाली करते हैं, स्टॉक्स की कीमतें उनकी फेयर वैल्यू के काफी नीचे चली जाती हैं। इसी तरह बुल रन में निवेशकों का अति उत्साह स्टॉक प्राइसेज को अवास्तविक स्तर तक पहुंचा देता है। हालांकि बाजार का यही व्यवहार निवेशकों के लिए  मौके भी बनाता है। वारेन वफे को अक्सर ये कहते हुए कोट किया जाता है कि डर के माहौल में खरीदारी करें और अंधाधुंध खरीदारी के दोर में सतर्क रहें (greedy when others are fearful and fearful when others are greedy)। लेकिन ये निवेश रणनीति लागू करना इतना आसान नहीं है। क्योंकि बाजार के अर्श और गर्त (पीक और बॉटम) को पहचानना काफी मुश्किल है।

इस समय सबसे बेतर रणनीति ये होगी कि लॉन्गटर्म एवरेज वैल्यूएशन के सापेक्ष मार्केट वैल्यूशन को रखा जाए। आइए हम वैल्यूशन के तीन पॉपुलर पैरामीटरों पर एक नजर डालते हैं। ये हैं मार्केट कैप टू जीडीपी रेश्यो, पीई मल्टिपल और प्राइस टू बुक वैल्यू। भारत में लॉन्ग टर्म मार्केट टू जीडीपी रेश्यो 77 फीसदी के आसपास है। वहीं, लॉन्ग टर्म पीई मल्टिपल 16 के आसपास है जबकि प्राइस टू बुक वैल्यू 3.23 पर है।

इस समय ये तीनों पैरामीटर कहां हैं इस पर नजर डालें तो मार्केट कैप टू जीडीपी रेश्यो (Market cap to GDP)110 फीसदी पर है।  वन ईयर फारवर्ड पीई (one-year forward PE) 21के आसपास है। वहीं, प्राइस टू बुक (price to book) 4.44 पर है। ये तीनों  ही पैरामीटर अब लाल सिगनल दिखा रहे हैं।

हालांकि इनके खिलाफ बुल्स के अपने तर्क हैं लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बाजार में वैल्यूएशन काफी महंगे हो गए हैं। अब निवेशकों को सतर्क हो जाना चाहिए। वर्तमान स्थिति में आंशिक मुनाफा वसूली एक अच्छी रणनीति है।


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