Nifty@20k : बाजार में घरेलू निवेशकों का बढ़ेगा दबदबा, शॉर्ट टर्म के नजरिए से अब हो जाएं सतर्क

Nifty@20k: जूलियस बेयर के मार्क मैथ्यूज का कहना है कि वे भारत को लेकर ओवरवेट हैं। भारतीय बाजार में तेजी जारी रहेगी। लेकिन उनका यह भी कहना है कि अब भारतीय बाजारों की तेजी में विदेशी फंडों की जगह घरेलू फंडों का अहम योगदान होगा। मार्क मैथ्यूज के मुताबिक जब किसी बाजार में घरेलू फंड बड़ी हैसियल हासिल कर लेते हैं तो इससे बाजार के लिए एक बहुत बड़ा सहारा बन जाता है

अपडेटेड Sep 17, 2023 पर 4:08 PM
Nifty@20k: जूलियस बेयर के मार्क मैथ्यूज ने कहा कि भारत में वर्किंग एज के लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा ज्यादा भुगतान करने वाले टेक्नोलॉजी सेक्टर का आकार भी बढ़ रहा है। ऐसे में इक्विटी बाजार में लोकल लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है। यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा

Nifty@20k: 15 सितंबर को बीते हफ्ते में बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। निफ्टी लगभग 52 कारोबारी सत्रों के बाद 20000 का स्तर पार करते दिखा। हालांकि उम्मीद के मुताबिक ही हफ्ते के आखिरी दिनों में मिड और स्मॉल कैप शेयरों में करेक्शन भी आता दिखा। इस पूरे हफ्ते हमने बाजार की आगे की दशा और दिशा के बारे में कई एक्सपर्ट्स से बातचीत की। इस बातचीत से निकलकर आया है कि मार्केट एक्सपर्ट्स भारतीय बाजार को लेकर बुलिश बने हुए हैं। लेकिन वे यह भी मानते हैं कि इतनी तेजी के बाद अब बाजार को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत भी है। यहां हम आपके लिए तमाम मार्केट एक्सपर्ट्स से हुई बातचीत का संपादित अंश दे रहे हैं।

मिड-कैप्स में आई बिकवाली पर प्रशांत खेमका की राय

व्हाइटओक के प्रशांत खेमका का मानना है कि इसके बावजूद कि फंडामेंटल्स काफी अच्छे हैं अब मिड और स्मॉल कैप की ये तेजी कायम रहनी मुश्किल लग रही है। छोटे-मझोले शेयर काफी महंगे हो गए हैं। अब इनमें आगे काफी वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है। 12 सितंबर को इसकी शुरुआत भी हो गई है। ये पिछले 5 महीनों का ऐसा पहला दिन था जब हमें मिड और स्मॉल कैप में दबाव बनते दिखा। आने वाले दिनों में हमें ऐसी और भी घटनाएं देखने को मिलेंगी।


विजय केडिया को नए निवेशकों की चिंता

मिड और स्मॉल कैप में अचानक बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी के बारे में बात करते हुए केडिया सिक्योरिटीज के विजय केडिया ने कहा कि वह "भंगार कैप" या पेनी स्टॉक में नए निवेशकों की बढ़ती रूचि के देखकर परेशान हैं। उनकी निवेशकों को सतर्क रहने और निफ्टी के 20000 के पार करने के अतिउत्साह में न फंसने की सलाह है। अपनी बात को कविता के रूप में समझाते हुए उन्होंने का “तेजी में हैं सभी जीनियस, सभी समझते खुद को हीरो, मंदी की आंधी में, बनते और बिगड़ते फिर जीरो। बनने और बिगडने में ही, नई जिंदगी शुरू हुई है, फिर भी अपना होश न खोना, चाहे पार्टी शुरू हुई है''। दूसरे शब्दों में कहें तो उनका कहना है कि नए भारत की लॉन्ग टर्म पार्टी शुरू हो गई है, हालांकि, निवेशकों को हमेशा उन बाधाओं से सावधान रहने की जरूरत है जो बीच-बीच में आ सकती हैं।

सुनील सिंघानिया भारत में एफआईआई के निवेश को लेकर पॉजिटिव

अबेकस एसेट मैनेजर (Abakkus Asset Manager) के सुनील सिंघानिया ने कहा कि उनका मानना है कि ग्रोथ पर नए सिरे से फोकस बढ़ने के साथ ही भारत में काफी संभावनाएं हैं। सिंघानिया का यह भी मानना है कि भारतीय बाजारों में लॉन्ग टर्म में विदेशी निवेश में बढ़त देखने को मिलेगी। भले ही शॉर्ट टर्म में इस पर दबाव हो। उनका मानना है कि अगले दो से तीन सालों में भारत में जमकर एफआईआई निवेश आएगा।

संदीप टंडन की राय वैल्यू स्टॉक बिखेरते रहेंगे चमक

क्वांट म्यूचुअल फंड के संदीप टंडन का मानना है कि वैल्यू स्टॉक्स इस दशक में ग्रोथ स्टॉक की तुलना में बेहतर रिटर्न देंगे। उन्होंने कहा “मुझे लगता है कि यह दशक वैल्यू स्टॉक्स का है। भारत के बाजार में वैल्यू स्टॉक बेहतर रिटर्न देंगे और यही हम 2019 से कह रहे हैं ”। उन्होंने आगे कहा कि यह बात न केवल भारत के लिए बल्कि ग्लोबल मार्केट के लिए भी सच है। सितंबर 2021 में जब ग्लोबल इक्विटी मार्केट में होने वाला निवेश अपने लाइफ टाइम हाई पर था तब सब का फोकस केवल ग्रोथ और नए युग के टेक शेयरों पर था। लेकिन अब बाजार का रुझान वैल्यू स्टॉक्स की तरफ दिख रहा है।

नीलेश शाह लॉन्ग टर्म को लेकर बुलिश, लेकिन शॉर्ट टर्म में सतर्क रहने की सलाह

एनविज़न कैपिटल (Envision Capital) के नीलेश शाह का कहना है कि भारत के बाजार लंबी अवधि के नजरिए से बहुत अच्छे दिख रहे हैं लेकिन शॉर्ट टर्म के नजरिए से सावधान रहने की जरूरत है। भारत की मैक्रो और माइक्रो दोनों ही स्थितियां लंबे नजरिए से काफी अच्छी दिख रही हैं। ग्लोबल मैक्रो की तुलना में भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति ज्यादा बेहतर स्थिति में है। जिसके चलते भारतीय बाजार दुनिया के दूसरे बाजारों के तुलना में बेहतर दिख रहे हैं। G20 सम्मेलन में मिली सफलता से भी भारत का कद बढ़ा है। लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर शॉर्ट टर्म में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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बाजार में घरेलू निवेशकों का बढ़ेगा दबदबा

जूलियस बेयर के मार्क मैथ्यूज का कहना है कि वे भारत को लेकर ओवरवेट हैं। भारतीय बाजार में तेजी जारी रहेगी। लेकिन उनका यह भी कहना है कि अब भारतीय बाजारों की तेजी में विदेशी फंडों की जगह घरेलू फंडों का अहम योगदान होगा। उनका कहना कि जब किसी बाजार में घरेलू फंड बड़ी हैसियत हासिल कर लेते हैं तो इससे बाजार के लिए एक बहुत बड़ा सहारा बन जाता है। देश में एसआईपी के जरिए होने वाला निवेश लगातार बढ़ रहा है। रोज बड़ी संख्या में नए एकाउंट खुल रहे हैं। भारत की प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के साथ ही घरेलू निवेशकों आमद भी बढ़ रही है। ये बाजार के लिए शुभ संकेत हैं।

इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि भारत में वर्किंग एज के लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसके अलावा ज्यादा भुगतान करने वाले टेक्नोलॉजी सेक्टर का आकार भी बढ़ रहा है। ऐसे में इक्विटी बाजार में लोकल लोगों की भागीदारी भी बढ़ रही है। यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। इससे विदेशी निवेशकों पर भारतीय बाजारों की निर्भरता कम होगी। अपनी बात को समझाने के लिए मैथ्यूज ने ऑस्ट्रेलिया और मलेशिया जैसे देशों का उदाहरण दिया जहां लोग अपने रिटायरमेंट स्कीम के तहत पैसे जुटाने के लिए हर महीने इक्विटी बाजार में पैसा लगाते हैं।

 

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