दलाल स्ट्रीट पर 24,500 का ऐतिहासिक ब्रेकआउट! क्या 25,000 छूने से पहले थमेगी निफ्टी की चाल? जानिए दिग्गजों का आउटलुक
Nifty Outlook: भारतीय शेयर बाजार में 5 नवंबर को ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। FIIs की बंपर खरीददारी और कच्चे तेल की कीमतों में 10% की बड़ी गिरावट से निफ्टी 24,560 और सेंसेक्स 79,400 के हाई पर पहुंच गए हैं। क्या बाजार बिना रुकावट 25,000 के जादुई आंकड़े को छुएगा या ऊपरी स्तरों पर रेजिस्टेंस देखने को मिलेगा? जानिए मार्केट एक्सपर्ट्स आउटलुक
सेंसेक्स 2,100 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज करते हुए 79,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है
Nifty Outlook: भारतीय शेयर बाजार में आज, 5 नवंबर को ऐतिहासिक तेजी देखने को मिली है। बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी-50 2.5% की जोरदार छलांग लगाकर 24,500 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए 24,560 पर पहुंच गया। वहीं, सेंसेक्स 2,100 से अधिक अंकों का उछाल दर्ज करते हुए 79,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8.7% की बड़ी गिरावट ($94.62 प्रति बैरल का स्तर) और विदेशी निवेशकों (FIIs) की ₹7,284 करोड़ की बंपर खरीदारी ने दलाल स्ट्रीट पर लिवाली के नए दौर की शुरुआत कर दी है। क्या लगातार 6 दिनों की इस तूफानी तेजी के बाद निफ्टी बिना किसी रुकावट 25,000 के जादुई आंकड़े को छू लेगा? आइए आपको बताते हैं बाजार एक्सपर्ट्स का क्या है अनुमान।
पहले जानिए बाजार में आई तूफानी तेजी के 3 मुख्य ट्रिगर्स
1. विदेशी निवेशकों (FIIs) का बड़ा कमबैक: पिछले 4 कारोबारी सत्रों में FIIs ने भारतीय शेयर बाजार में कुल ₹20,834 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है। 5 नवंबर के सत्र में दर्ज की गई ₹7,284 करोड़ की खरीदारी अक्टूबर 2025 के बाद से एक दिन में की गई सबसे बड़ी लिवाली है।
2. कच्चे तेल में भारी गिरावट: ब्रेंट क्रूड ऑयल में 8.7% की तेज गिरावट आई और यह $94.62 प्रति बैरल पर आ गया, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था के मैक्रो-इकोनॉमिक आउटलुक को जबरदस्त मजबूती मिली है।
3. वैश्विक और टैक्स संकेत: अमेरिकी मिडटर्म नतीजों के बाद AI आधारित वैश्विक निवेश का दायरा अन्य उभरते बाजारों में ट्रांसफर होने और आगामी केंद्रीय बजट में LTCG टैक्स से जुड़े राहत भरे संकेतों ने निवेशकों का भरोसा काफी बढ़ाया है।
एनालिस्ट्स से जानें आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?
1. चोलामंडलम सिक्योरिटीज के हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च धर्मेश कांत के अनुसार, 'ग्लोबल फ्रंट पर बदलती परिस्थितियों और एआई सेक्टर पर कसती रेगुलेटरी सख्ती के कारण विदेशी निवेशक अब भारत जैसे मजबूत बुनियादी ढांचे वाले इमर्जिंग मार्केट्स का रुख कर रहे हैं। भारतीय बाजार पिछले दो सालों के सुस्त प्रदर्शन से उबरकर अब क्रूड और एफआईआई इनफ्लो के बेहतर तालमेल के दम पर नई ऊंचाई छू रहा है।'
बाजार में बढ़त का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है और निफ्टी 24,835 के इंटरनल ट्रेंडलाइन को टारगेट कर सकता है। जब तक निफ्टी 24,079-24,130 के सपोर्ट जोन से ऊपर बना हुआ है, तब तक तेजी का ट्रेंड कायम रहेगा। केवल इस जोन से नीचे फिसलने पर ही 23,700 का डाउनसाइड रिस्क बनेगा।'
3. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स (डॉ. वी के विजयकुमार, चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट)
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मजबूत कॉरपोरेट अर्निंग्स ने दलाल स्ट्रीट का मूड पूरी तरह बदल दिया है। लार्ज-कैप्स और विशेषकर बैंकिंग व फाइनेंशियल शेयरों में शॉर्ट-कवरिंग से तेजी को आगे भी बल मिलेगा। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) हल्की मुनाफावसूली कर सकते हैं।'
'शॉर्ट-टर्म मार्केट टेक्सचर पूरी तरह पॉजिटिव है, लेकिन ओवरबॉट स्थिति को देखते हुए ऊपरी स्तरों पर इंडेक्स कुछ समय के लिए दायरा-बद्ध रह सकता है। ट्रेडर्स के लिए 'बाय ऑन डिप्स' यानी हर गिरावट पर खरीदारी की रणनीति बेहतर रहेगी। निफ्टी के लिए 23,800-23,750 और सेंसेक्स के लिए 76,700-76,500 मजबूत सपोर्ट का काम करेंगे।'
जब तक इंडेक्स 24,000 के ऊपर टिका है, आने वाले सत्रों में 24,400 और 24,700 के स्तर आसानी से खुलेंगे। निफ्टी का शॉर्ट-टर्म सपोर्ट ऊपर की ओर रिवाइज होकर 23,200-23,400 (50-डे EMA) पर आ चुका है। जब तक यह बेस कायम है, हर गिरावट को खरीदारी के मौके के रूप में देखा जाना चाहिए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।