Nifty Option Trading Tips: जब निफ्टी गिरता है तो आमतौर पर ट्रेडर्स की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है कि पुट खरीद लिया जाए। अगर निफ्टी नीचे जा रहा है, तो पुट से पैसा बनना चाहिए लेकिन हर बार ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं। अभी मार्केट ऐसा ही है। जब निफ्टी गिर रहा हो और India VIX ऊपर न भागे तो इसका संकेत अलग हो सकता है। मार्केट कमजोर हो सकता है लेकिन ट्रेडर्स में घबराहट नहीं है। बस इसी से तय होता है कि पुट खरीदने वाले मुनाफा मिलेगा या उसका प्रीमियम धीरे-धीरे गलने लगेगा। ऐसी स्थिति में क्वांटसैप (Qunatsapp) के रिसर्च हेड और सीईओ शुभम अग्रवाल ने खास स्ट्रैटेजी सुझाई है।
गिरावट है लेकिन घबराहट नहीं
वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX से यह पता चलता है कि आने वाले समय में मार्केट में कितनी हलचल के आसार हैं। मार्केट की तेज गिरावट के बीच ऑप्शंस की मांग बढ़ जाती है, जिससे प्रीमियम आमतौर पर महंगा हो जाता है और इंडिया विक्स भी बढ़ता है। ऐसे में निफ्टी में गिरावट के साथ विक्स का बढ़ना गंभीर संकेत माना जा सकता है लेकिन निफ्टी के गिरने के बावजूद विक्स स्थिर है तो इसे कंसालिडेशन का संकेत माना जा सकता है यानी इंडेक्स सपोर्ट और रेजिस्टेंस के बीच एक सीमित दायरे में घूम रहा है।
ऐसी स्थिति में पुट खरीदना महंगा पड़ सकता है। डायरेक्शन व्यू सही होने के बावजूद ऑप्शन की वैल्यू कम हो सकती है क्योंकि समय बीतने के साथ थीटा डिके प्रीमियम को लगातार घटाता रहता है और वोलैटिलिटी में भी कोई बड़ा उछाल नहीं आता। उदाहरण के लिए निफ्टी 24,200 से गिरकर 24,100 पर आ जाता है और आपको लगता है कि गिरावट आगे भी जारी रहेगी और आप पुट खरीद लेते हैं, लेकिन इसके बाद निफ्टी कई सेशंस तक साइडवेज चलता रहता है। यहां ट्रेडर्स के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही होती है कि जिस गिरावच का इंतजार हो रहा हो, वह बहुत देर से आए और दूसरी तरफ थीटा डिके के चलते आपके ऑप्शन का प्रीमियम कम होता रहे।
अगर आपका व्यू बेयरेश तो है, लेकिन तुरंत बड़ी गिरावट की उम्मीद भी नहीं है, तो बेय पुट स्प्रेड अधिक व्यावहारिक रणनीति हो सकती है। इसमें ऐट-द-मनी या इन-द-मनी पुट खरीदना होता है और उससे नीचे के स्ट्राइक का पुट बेचना होता है। जैसे कि अगर निफ्टी लगभग 24,200 पर है, तो आप 24,200 पुट खरीद सकते हैं और 24,000 पुट बेच सकते हैं।
इस स्ट्रैटेजी के तहत बेचे गए पुट से मिलने वाला प्रीमियम आपके शुरुआती खर्च को कम करता है। इसके बदले आपका अधिक मुनाफा सीमित हो जाता है, लेकिन आपका अधिकतम घाटा भी सीमित रहता है और महंगे प्रीमियम को लेकर आपका एक्सपोजर कम हो जाता है। कम वोलैटिलिटी वाले माहौल में यह रणनीति ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है। हालांकि ध्यान दें कि यह भी मुनाफे की गारंटी नहीं है। यह सिर्फ कम प्रीमियम खर्च करके और तय रिस्क के साथ बेयरेश व्यू लेने का एक तरीका है।
इस तरह से लें ट्रेड लेने का फैसला
अकेले इंडिया विक्स को ही देखकर ट्रेड लेने का फैसला नहीं लेना चाहिए बल्कि इसे निफ्टी प्राइस एक्शन के साथ मिलाकर देखें। अगर निफ्टी निर्णायक ढंग से सपोर्ट को नीचे तोड़ता है और उसी समय विक्स भी बढ़ने लगे तो बड़ी गिरावट के आसार मजबूत हो जाते हैं। जब तक ऐसा कंफर्मेशन नहीं मिलता, तब तक जल्दबाजी में ट्रेड करने की बजाय इंतजार अच्छी रणनीति हो सकती है।
निफ्टी के लगातार एक रेंज में फंसे होने पर टाइम डिके से पुट बायर्स को नुकसान हो सकता है। ऐसे में निफ्टी गिरने पर फटाक से पुट खरीदने की बजाय यह भी देखें कि निफ्टी की गिरावट के साथ-साथ वोलैटिलिटी भी बढ़ रही है या नहीं और अगर इसका जवाब नहीं है तो मार्केट अभी कंसालिडेशन फेज में है। कुल मिलाकर प्राइस, वोलैटिलिटी, रिस्क और टाइम डिके को ध्यान में रखते हुए फैसला लेना चाहिए।
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