Nifty IT worst in 15 years: दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों के मूवमेंट को ट्रैक करने वाले निफ्टी आईटी के लिए यह साल काफी बुरा साबित हुआ। इस साल के पहले छह महीने में निफ्टी आईटी 31% टूटा। इतनी भारी गिरावट इससे पहले साल 2001 में हुई थी जब यह 44% फिसला था। फिलहाल यह तीन साल के निचले स्तर पर है। इस दौरान अधिकतर लार्जकैप आईटी कंपनियों के शेयर 30%-35% तक टूट चुके हैं तो बुधवार को 17% की गिरावट के बाद केपीआईटी टेक का शेयर इस साल अब तक 50% से अधिक गिर चुका है।
गिरावट के बावजूद वैल्यूएशन अभी भी महंगा
शेयर धड़ाम होते हैं तो आमतौर पर वैल्यूएशन सस्ता होता है लेकिन इस बार आईटी शेयरों की भारी गिरावट भी इसके वैल्यूएशन को कम नहीं कर पाई है। हालांकि अधिकतर आईटी कंपनियों का वैल्यूएशन घटकर वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले लगभग 13 गुना (13x P/E) पर आ गया है, जो उनके पिछले 10 वर्षों के औसत 15 से 20 गुना के मुकाबले काफी कम है लेकिन इसके बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों के शेयर अब भी अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी महंगे हैं।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियां अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले 14 गुना P/E पर ट्रेड कर रही हैं जोकि उनके 10-वर्ष के औसत से 25% और 5-वर्ष के औसत से 35% कम है लेकिन दूसरी तरफ एसेंचर (Accenture), कॉग्निजेंट (Cognizant) और केपजेमिनी (Capgemini) जैसी वैश्विक आईटी कंपनियों का औसत Forward P/E केवल 8 गुना है। इसका मतलब है कि भारतीय आईटी कंपनियां अभी भी अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले लगभग 90% प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं, जबकि आमतौर पर पहले यह प्रीमियम महज 20% से 30% के बीच रहता था।
क्या है गिरावट की वजह और आगे क्या है रुझान
आईटी स्टॉक्स में गिरावट की वजह ग्रोथ की सुस्ती है। वित्त वर्ष 2027 आईटी कंपनियों के लिए लगातार चौथा ऐसा वर्ष हो सकता है, जिसमें ग्रोथ बहुत कमजोर या सुस्त रहे। मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि 35-40% की गिरावट के बाद भी भारतीय आईटी शेयर अभी भी महंगे हैं और कमजोर विकास (Low Single-Digit Growth) को देखते हुए इनमें खरीदारी का मजबूत कारण फिलहाल नजर नहीं आता। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का भी कहना है कि आईटी शेयरों के वैल्यूएशन कम होने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। पिछली बार लार्जकैप आईटी शेयरों ने 11 से 13 गुना P/E पर जाकर निचला स्तर बनाया था। इसलिए मौजूदा स्तरों से इनमें और गिरावट की संभावना बनी हुई है।
IT Stocks के लिए ये पांच नेक्स्ट ट्रिगर्स
डिस्क्रिशनरी खर्च: क्या BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियस सर्विसेज एंड इंश्योरेंस) सेक्टर में कॉस्ट-टेकआउट डील्स यानी लागत कम करने वाले सौदों के कारण बनी मजबूती टेलीकॉम और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कमजोरी की भरपाई कर पाएगी?
AI का दबाव: क्या एआई के चलते वैल्यू में गिरावट का असर निवेशकों के अनुमान 2%–4% से अधिक होगा?
कमाई के नई स्रोत: क्या एआई से होने वाली कमाई ट्रेडिशनल बिजनेस में हो रही गिरावट की भरपाई कर पाएगी या केवल मौजूदा कारोबार की जगह ही लेगी?
एआई में निवेश की रफ्तार: कंपनियां एआई तकनीक और नई क्षमताओं के विकास पर कितना निवेश कर रही हैं?
कॉस्ट एफिसिएंसी प्रोग्राम: इंफोसिस में प्रोजेक्ट मैक्सिमस, टेक महिंद्रा में प्रोजेक्ट फोर्टियस और एचसीएलटेक में प्रोजेक्ट एसेंट जैसे कॉस्ट-एफिसिएंसी प्रोग्राम्स। इसके अलावा पूरे आईटी सेक्टर में भर्ती की रफ्तार भी फिलहाल धीमी रहने की संभावना है।
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