निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ऊपर से 20% फिसले, एक्सपर्ट्स से जानिए आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल

एनालिस्ट का कहना है कि पूर्वी यूरोप में बढ़ते संघर्ष और ग्लोबल इकोनॉमी पर इसके प्रभाव का असर निवेशकों के सेटिमेंट पर पड़ेगा.

अपडेटेड Mar 07, 2022 पर 2:27 PM
Geojit Financial Services के विनोद नायर का कहना है कि वर्तमान स्थितियों में राज्य चुनावों के परिणामों का बाजार पर कोई बड़ा और लंबा असर नहीं होगा। इसकी वजह से शॉर्ट टर्म में नेगेटिव या पॉजिटिव रिएक्शन देखने को मिल सकता है.

निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 मंदी वाले जोन में जाते नजर आ रहे हैं। कमजोर ग्लोबल संकेतों के साथ ही आज भी इन्होंनें शुरुआत कमजोरी के साथ ही की थी। गौरतलब है कि 19 अक्टूबर 2019 को Nifty MidCap 100 ने 33,243.50 का रिकॉर्ड हाई छुआ था तब से इसमें 20.18 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। इसी तरह Nifty SmallCap100 18 ने जनवरी 2022 के अपने 12,047.45 अंक के ऑल टाइम हाई से अब तक करीब 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की है।

ये भी बता दें कि बीयर मार्केट की पुष्टि तब होती है जब कोई इंडेक्स हाल के क्लोजिंग हाई से 20 फीसदी या उससे ज्यादा टूट जाता है। सेंसेक्स और निफ्टी भी अपने ताजे क्लोजिंग हाई से 15 फीसदी टूट चुके हैं।

आज के कारोबार में 11.45 बजे के आसपास निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 2 फीसदी टूटकर 26,966 पर नजर आ रहा था। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.7 फीसदी टूटकर 9585 पर नजर आ रहा था। बाजार की आज की गिरावट की वजह वह खबर है जिसमें मुताबिक अमेरिका और उसके सहयोगी देश रशियन ऑयल एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। इस खबर के चलते ब्रेंट क्रूड के भाव 130 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए।


Geojit Financial Services के वी के विजयकुमार का कहना है कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध की वजह से कमोडिटी मार्केट में भारी उथल पुथल देखने को मिल रही है। क्रूड का 128 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। क्रूड के भाव में इस तेजी से ग्लोबल ग्रोथ पर नेगेटिव असर पड़ सकता है और महंगाई बढ़ती नजर आ सकती है। इस सब के चलते बाजार मंदी के दौर में (बियरिश टेरीटोरी) में जाता नजर आ रहा है। ऐसे में निवेशकों को सर्तक रहने की जरुरत है।

वी के विजयकुमार ने आगे कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में एनर्जी स्टॉक्स में एनर्जी, मेटल और एक्सपोर्ट से जुड़े सेगमेंट में निवेश करना तुलनात्मक रुप से बेहतर रहेगा। इन सेक्टर से जुड़े अच्छे शेयरों में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खरीदारी की सलाह होगी।

एनालिस्ट का कहना है कि पूर्वी यूरोप में बढ़ते संघर्ष और ग्लोबल इकोनॉमी पर इसके प्रभाव का असर निवेशकों के सेटिमेंट पर पड़ेगा। इस बीच विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपने पैसे निकालकर रहे हैं। अक्टूबर से अब तक एफआईआई ने भारतीय बाजारों से 2 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। आने वाले सप्ताहों में वर्तमान जियोपॉलिटिकल तनाव के अलावा निवेशकों की नजर राज्य चुनावों के एक्जिट पोल के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूएस फेड पॉलिसी स्टेटमेंट पर रहेगा।

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Geojit Financial Services के विनोद नायर का कहना है कि वर्तमान स्थितियों में राज्य चुनावों के परिणामों का बाजार पर कोई बड़ा और लंबा असर नहीं होगा। इसकी वजह से शॉर्ट टर्म में नेगेटिव या पॉजिटिव रिएक्शन देखने को मिल सकता है। पूर्वी यूरोप में चल रही लड़ाई के चलते उत्पन्न स्थितियों के कारण सेंट्रल बैंक अपनी दरों में बढ़ोतरी की निर्णय की समीक्षा करते नजर आ सकते हैं।

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