Nikkei at 700000: जापान के इक्विटी मार्केट में बहार, पहली बार निक्केई 700000 के पार, इस कारण शानदार रौनक

Nikkei at 700000: जापान का इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई पहली बार 70 हजार के पार पहुंचा। खास बात ये है कि भारत में सेंसेक्स के बाद ऐसा करने वाला यह एशिया के अहम बाजारों के बेंचमार्क में पहला है और दो महीने से भी कम समय में इसने 10 हजार से अधिक प्वाइंट्स का सफर तय किया। जानिए इस तेजी की वजह

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 1:12 PM
Nikkei at 700000: 23 अप्रैल को निक्केई 225 ने पहली बार 60 हजार का लेवल पार किया था और अब दो महीने से भी कम समय में इसने 10 हजार प्वाइंट्स का सफर और तय कर लिया।

Nikkei at 700000: जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 ने पहली बार आज मंगलवार को 70,000 का लेवल पार किया। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े शेयरों में तेजी और जापान की इकॉनमी को लेकर निवेशकों के बढ़ते भरोसे के दम पर निक्केई 225 ने यह उपलब्धि हासिल की है। इससे पहले 23 अप्रैल को निक्केई 225 ने पहली बार 60 हजार का लेवल पार किया था और अब दो महीने से भी कम समय में इसने 10 हजार प्वाइंट्स का सफर और तय कर लिया। इंट्रा-डे में आज यह 70,020.68 के रिकॉर्ड हाई तक पहुंचा था।

खास बात ये है कि भारत को छोड़ पहली बार एशिया के अहम बाजारों में से किसी के इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स ने 70 हजार का लेवल पार किया है। भारतीय मार्केट में सेंसेक्स की बात करें तो यह 1 दिसंबर 2025 को 86,159.02 के रिकॉर्ड हाई पर था और अभी भी यह 76600 के पार ही है।

Nikkei at 700000: Bank of Japan के फैसले को भी निवेशकों ने माना पॉजिटिव


आज बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरों को लेकर फैसला आना था तो बाजार की नजर इस पर भी थी। बैंक ऑफ जापान ने अपने बेंचमार्क ब्याज दर में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी कर इसे 0.75% से बढ़ाकर 1% कर दिया। इसके साथ ही जापान की नीतिगर दर को करीब तीस साल के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया। हालांकि ब्याज दर बढ़ने के बावजूद निवेशकों ने इसे कॉरपोरेट मुनाफे के लिए खतरे की बजाय जापान की आर्थिक सुधार प्रक्रिया की मजबूती का संकेत माना।

Nikkei at 700000: इन वजहों से मिला सपोर्ट

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर सहमति बनी तो इसने दुनिया भर के बाजारों में रौनक लौटा दी। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई फिर से सामान्य होने की उम्मीद पर निवेशक चहक उठे। होर्मुज से फिर तेल की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद ने दुनिया भर के मार्केट में चहल-पहल बढ़ा दी। हालांकि निक्केई की रिकॉर्ड तेजी सिर्फ वैश्विक फैक्टर्स के चलते नहीं बल्कि घरेलू फैक्टर्स के चलते भी रही। कंपनियों के शानदार कारोबारी नतीजे, वेज ग्रोथ में सुधार और एआई से जुड़ी मांग में उछाल से भी इसे सपोर्ट मिला।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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