नोमुरा की राय, भारतीय IPO मार्केट साल के दूसरी छमाही से पकड़ेगा रफ्तार

ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से बाजार के उतार-चढ़ाव भरे इस दौर में ग्लोबल स्तर पर आईपीओ गतिविधियों में सुस्ती आई है

अपडेटेड Apr 12, 2022 पर 7:02 PM
अमित थवानी ने ब्लूमबर्ग से हुई अपनी इस बातचीत में आगे कहा कि भारतीय कैपिटल मार्केट में फंड जुटाने की गतिविधि अगले 6 से 12 महीने में काफी तेज रहेगी

भारत के प्राइमरी मार्केट पर अपनी राय देते हुए नोमुरा का कहना है कि सेकेंडरी मार्केट में आ रही तेजी से संकेत मिलता है कि इस साल की दूसरी छमाही से भारत के प्राइमरी मार्केट में भी गहमागहमी बढ़ती दिखाई देगी। नोमुरा के अमित थवानी (Amit Thawani) ने ब्लूमबर्ग टीवी को मंगलवार को दिए अपने इंटरव्यू में कहा है कि भारत में सेकेंडरी मार्केट में एक बार फिर चहल-पहल देखने को मिल रही है। QIPs में भी गति आती नजर आ रही है जिसको देखते हुए उम्मीद है कि इस साल के दूसरी छमाही से आईपीओ बाजार में भी जोश लौटता दिखेगा।

लाइव मिंट में प्रकाशित खबर के मुताबिक ब्लूमबर्ग द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की वजह से बाजार के उतार-चढ़ाव भरे इस दौर में ग्लोबल स्तर पर आईपीओ गतिविधियों में सुस्ती आई है। इस साल अब तक भारत में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए बाजार से करीब 1.1 अरब डॉलर जुटाए हैं जबकि पिछले साल यानी 2021 में इसी अवधि में भारतीय बाजार में आईपीओ के जरिए 2.6 अरब डॉलर जुटाए गए थे।

अमित थवानी ने ब्लूमबर्ग से हुई अपनी इस बातचीत में आगे कहा कि भारतीय कैपिटल मार्केट में फंड जुटाने की गतिविधि अगले 6 से 12 महीने में काफी तेज रहेगी। इस अवधि में लाइफ इंश्योरेंस के अलावा कई टेक्नोलॉजी कंपनियां अपना आईपीओ लाने की तैयारी में हैं। अधिकांश कंपनियां विदेशी लिस्टिंग की जगह घरेलू बाजार में लिस्टिंग को वरीयता देंगी।


अमित थवानी ने इस बातचीत में आगे कहा कि प्राइवेट इक्विटी फंड भारत में मर्जर और अधिग्रहण की प्रक्रिया को सपोर्ट देते नजर आएंगे। इसके अलावा बड़े -बड़े कारोबारी समूहों द्वारा अपने घरेलू कारोबार के कंसोलिडेशन पर फोकस ही बाजार को सपोर्ट देगा।

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इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि इसी महीने भारत के सबसे ज्यादा वैल्यू वाला HDFC Bank देश के सबसे बड़े मॉर्गेज लेंडर Housing Development Finance Corp के टेक ओवर के लिए एक करार करता नजर आया है। यह सौदा करीब 60 अरब डॉलर का है। यह मर्जर देश के कुछ बड़े वित्तीय संस्थाओं को यह सोचने के लिए प्रेरित कर सकता है कि आने वाले वर्षों के लिए उनकी कारोबारी रणनीति क्या होनी चाहिए। थवानी का मानना है कि आगे हमें फाइनेंशियल सेक्टरों में इस तरह के कई और कंसोलिडेशन होते नजर आ सकते हैं।

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