NSE Share Price: लिस्टिंग के बाद 5% भागा शेयर, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

BSE में एनएसई का शेयर 0.84 फीसदी प्रीमियम के साथ 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के बाद एक्सचेंज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,45,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एक्सचेंज ने आईपीओ में शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये तय किया था। इनवेस्टर्स को शेयर 1,785 रुपये पर इश्यू हुए थे

अपडेटेड Sep 24, 2026 पर 11:35 AM
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11 बजे शेयर करीब 4 फीसदी चढ़कर 1,855.55 रुपये पर चल रहा था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का शेयर 24 सितंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में लिस्ट हो गया। शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले मामूली प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ। लेकिन, उसके बाद उसमें तेजी देखने को मिली। 11 बजे शेयर करीब 4 फीसदी चढ़कर 1,855.55 रुपये पर चल रहा था। सवाल है कि क्या इस शेयर को खरीदने का अच्छा मौका है? जिन इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, उन्हें क्या करना चाहिए? उन्हें शेयर को होल्ड करना चाहिए या प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

शेयर की 1 फीसदी से कम प्रीमियम पर लिस्टिंग

BSE में एनएसई का शेयर 0.84 फीसदी प्रीमियम के साथ 1,800 रुपये पर लिस्ट हुआ। लिस्टिंग के बाद एक्सचेंज का मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,45,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एक्सचेंज ने आईपीओ में शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये तय किया था। इनवेस्टर्स को शेयर 1,785 रुपये पर इश्यू हुए थे। यह आईपीओ 5.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। एनएसई ट्रेडिंग वॉल्यूम के लिहाज से देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका मुकाबले BSE से है, जो न सिर्फ भारत बल्कि एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है।


मैक्वायरी ने शेयर पर दी 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग

विदेशी ब्रोकरेज फर्म Macquarie ने एनएसई के शेयर को 'आउटपरफॉर्म' रेटिंग के साथ कवर करना शुरू किया है। उसने शेयर के लिए 1,965 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। बोनांजा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा है कि एनएसई के शेयरों की लिस्टिंग से एक्सचेंज का शेयरहोल्डर बेस काफी बढ़ गया है। आईपीओ से पहले यह करीब 2 लाख था, जो अब करीब 36 लाख हो गया है। उन्होंने कहा कि शेयर के वैल्यूएशन के बारे में कुछ कहने के लिए हमें कम से कम एक तिमाही इंतजार करना होगा।

वैल्यूएशन बीएसई के मुकाबले कम 

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में वेल्थ की हेड शिवानी नयाती ने कहा कि 1,700-1,785 के प्राइस पर इसकी वैल्यूएशन FY26 की डायल्यूटेड ईपीएस का करीब 40.9-42.9 गुना है। यह बीएसई के 54.29 गुना के मुकाबले कम है। इसका मतलब है कि शेयर को वैल्यूएशन सपोर्ट हासिल है। हालांकि, यह ध्यान में रखना होगा कि एक्सचेंज का करीब 79 फीसदी रेवेन्यू ट्रेडिंग एक्टिविटी से आता है। इसका मतलब है कि एक्सचेंज की अर्निंग्स सीधे तौर पर मार्केट वाल्यूम और रेगुलेटरी चेंजेज पर निर्भर है।

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क्या निवेश करना चाहिए?

अभी भारत में कैपिटल मार्केट्स में लोगों का पार्टिसिपेशन काफी कम है। भविष्य में इसके बढ़ने की उम्मीद है, जिसका फायदा एनएसई और बीएसई को मिलेगा। जो इनवेस्टर्स भारत में कैपिटल मार्केट की ग्रोथ पर दांव लगाना चाहते हैं, वे लंबी अवधि के लिहाज से एनएसई के शेयर में इनवेस्ट कर सकते हैं।

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