Online Gaming stocks : ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। इसके चलते आज ये शेयर काफी ज्यादा पिटते नजर आ रहे हैं। डेल्टा कॉर्प लिमिटेड के शेयरों में भारी गिरावट आई। फिलहाल यह शेयर 14.25% की गिरावट के साथ 69 रुपये के आसपास कारोबार रहा है। नजारा टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के शेयर भी लाल निशान हैं। एनएसई पर यह शेयर 1.52% की गिरावट के साथ 285 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के मामले में किए गए फैसले में ये साफ किया है कि ऑनलाइन गेमिंग,फैंटेसी स्पोर्ट्स,कसीनो ये सब सट्टेबाजी और जुए की तरह हैं। इन पर जीएसटी लगेगा,इनको स्पोर्ट्स की कटेगरी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि जब इस तरह के गेम में पैसा लगाया जाता है तो वह पैसा किसी अनसर्टेन रिजल्ट के लिए लगाया जाता है क्योंकि ये पता नहीं होता कि उसका परिणाम क्या होगा। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वो स्किल बेस्ड गेम है या फिर चांस बेस्ड गेम है। इसको जीएसटी के लिहाज से बेटिंग या सट्टा ही माना जाएगा। इसी वजह को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा है कि सभी तरह के ऑनलाइन गेम जीएसटी के दायरे में आएंगे। कोर्ट का यह फैसला पूर्व प्रभाव (retrospective effect) से लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को केवल मध्यस्थ के रूप में नहीं माना जा सकता है। ऐसी गतिविधियां जीएसटी कानून के तहत आती हैं। अदालत ने आगे कहा कि 28% जीएसटी लगाने को वैध बनाने वाले कानूनी बदलाव वैध स्पष्टीकरण दिए गए है इसलिए उन्हें पूर्वव्यापी (retrospective effect)रूप से लागू किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट यह फैसला ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है। इन कंपनियों ने जीएसटी के पूर्वव्यापी मांग को यह तर्क देते हुए चुनौती दी थी कि जीएसटी कानून के तहत ऑनलाइन गेमिंग की "जुआ" के रूप में सरकार की व्याख्या सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों द्वारा निर्धारित कई दशकों की न्यायिक मिसालों के खिलाफ है।
यह विवाद सितंबर 2023 में तब शुरू हुआ था,जब सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी,जिसमें गेम्सक्राफ्ट से जीएसटी में लगभग 21,000 करोड़ रुपये की मांग करने वाले जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय के नोटिस को रद्द कर दिया गया था।
टैक्स नोटिस में आरोप लगाया गया था कि गेम्सक्राफ्ट ने रम्मी कल्चर,गेमज़ी और रम्मी टाइम जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से ऑनलाइन सट्टेबाजी को बढ़ावा दिया। वहीं गेम्सक्राफ्ट का तर्क था कि ऑनलाइन गेमिंग ऑपरेटर खिलाड़ियों को कार्रवाई योग्य दावे नहीं देते हैं और इसलिए इन पर जीएसटी लेवी सही नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म केवल प्रतियोगिताओं को सुविधादेने वाले मध्यस्थों के रूप में कार्य करते हैं और पुरस्कार राशि में हिस्सा और साइड-बेटिंग गतिविधियों में भाग नहीं लेते।