Power Stocks: भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ नई पावर क्षमता भी जोड़ी जा रही है। लेकिन इस बार एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। बिजली क्षमता बढ़ाने में सरकारी कंपनियों के मुकाबले प्राइवेट कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। खासकर रिन्यूएबल एनर्जी में उनका दबदबा बढ़ रहा है।
ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies के मुताबिक, FY26 से FY30 के बीच भारत में जुड़ने वाली नई बिजली क्षमता में प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी 63% तक हो सकती है। इसी वजह से ब्रोकरेज ने कई पावर स्टॉक्स पर Buy रेटिंग दी है।
प्राइवेट कंपनियां क्यों आगे निकल रही हैं?
Jefferies का अनुमान है कि FY26-FY30 के दौरान बिजली की मांग करीब 6% सालाना बढ़ सकती है। वहीं प्राइवेट कंपनियों की बिजली उत्पादन क्षमता करीब 9% सालाना बढ़ने की उम्मीद है।
सीधी बात है। बिजली की जरूरत बढ़ रही है और नई क्षमता जोड़ने में प्राइवेट कंपनियां ज्यादा तेजी दिखा रही हैं।
FY30 तक 724 GW हो सकती है क्षमता
ब्रोकरेज के मुताबिक भारत की कुल इंस्टॉल्ड पावर क्षमता FY30 तक करीब 724 GW हो सकती है। FY26 से FY30 के बीच करीब 191 GW नई क्षमता जुड़ने का अनुमान है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी का होगा। नई क्षमता में करीब 76% रिन्यूएबल, 18% थर्मल और 6% हाइड्रो पावर की हिस्सेदारी रह सकती है।
रिन्यूएबल में प्राइवेट सेक्टर क दबदबा
रिन्यूएबल एनर्जी में प्राइवेट कंपनियों का दबदबा और बढ़ सकता है। Jefferies के मुताबिक नई रिन्यूएबल क्षमता में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी करीब 72% रह सकती है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि रिन्यूएबल बिजली उत्पादन का 80% से ज्यादा हिस्सा प्राइवेट कंपनियों से आ सकता है। Adani Green Energy अकेले नई रिन्यूएबल क्षमता में करीब 17% योगदान दे सकती है। थर्मल पावर में भी प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी करीब आधी रह सकती है। Adani Power नई थर्मल क्षमता में करीब 34% योगदान दे सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि सरकारी कंपनियां पीछे छूट जाएंगी। NTPC और Power Grid जैसी कंपनियों के पास पहले से बड़ा एसेट बेस है।
हालांकि कुल इंस्टॉल्ड क्षमता में PSU की हिस्सेदारी FY26 के 48% से घटकर FY30 तक 45% रह सकती है।
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