Press Note 3 under review : भारत जल्द ही ऑटोमैटिक रूट के जरिए चीन से होने वाले छोटे निवेश में ला सकता है तेजी: रिपोर्ट

Press Note 3 under review: भारत एक ‘डी मिनिमिस’ लिमिट लागू कर सकता है और इससे छोटे विदेशी इन्वेस्टमेंट को अगल-अलल क्लियरेंस की ज़रूरत के बजाय ऑटोमैटिक मंज़ूरी मिल सकती है

अपडेटेड Feb 16, 2026 पर 11:08 AM
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इस लिमिट को परसेंटेज स्टेक या मॉनेटरी वैल्यू के आधार पर तय किया जा सकता है। ET ने सूत्रों हवाले से जानकारी दी है कि इस पर सिक्योरिटी से जुड़ी बातों समेत सभी चिंताओं पर गौर करने के बाद ही कोई आखिरी फैसला लिया जाएगा

Press Note 3 under review : भारत पड़ोसियों से छोटे FDI के लिए ऑटोमैटिक रूट की मंज़ूरी दे सकता है। 'डी मिनिमिस' लिमिट से छोटे निवेश के नियम आसान हो सकते हैं। प्रेस नोट 3 कम कीमत वाले सौदों को जांच से छूट दे सकता है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक पिछले साल से भारत और चीन के बीच रिश्ते बेहतर होने के साथ ही केंद्र सरकार प्रेस नोट 3 की समीक्षा कर रही है और जल्द ही छोटे विदेशी इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमैटिक अप्रूवल की इजाज़त दी जा सकती है। बता दें कि छह साल पहले यूनियन कॉमर्स मिनिस्ट्री ने प्रेस नोट 3 पेश किया था। इसमें भारत की फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) पॉलिसी में बदलाव किया गया था ताकि भारत के साथ ज़मीनी बॉर्डर शेयर करने वाले देशों से इन्वेस्टमेंट के नियमों को और कड़ा किया जा सके।

इसने घरेलू कंपनियों के अवसरवादी टेकओवर को रोकने और इन्वेस्टमेंट,खासकर चीन से आने वाले इन्वेस्टमेंट पर निगरानी बढ़ाने के लिए सरकारी मंज़ूरी ज़रूरी कर दी थी। नोट 3 के तहत अभी बॉर्डर शेयर करने वाले देशों के इन्वेस्टमेंट प्रपोज़ल की जांच गृह और विदेश मंत्रालय करते हैं।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक,भारत एक ‘डी मिनिमिस’ (कम दांव वाले सौदे) लिमिट लागू कर सकता है और इससे छोटे विदेशी इन्वेस्टमेंट को अगल-अलल क्लियरेंस की ज़रूरत के बजाय ऑटोमैटिक मंज़ूरी मिल सकती है।


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अभी,बॉर्डर वाले देशों से आने वाले किसी भी FDI प्रपोज़ल को सरकारी अप्रूवल प्रोसेस से गुज़रना होता है,चाहे इन्वेस्टमेंट का साइज़ कुछ भी हो। इस वजह से भारतीय फ़र्मों ने केंद्र पर क्लीयरेंस देने के प्रोसेस में तेज़ी लाने का दबाव डाला है क्योंकि देरी से बिज़नेस प्लान में रुकावट आई है। यहां तक कि पहले से अप्रूव्ड वेंचर्स में छोटी हिस्सेदारी खरीदने या फ़ॉलो-ऑन इन्वेस्टमेंट के मामलों में भी परेशानी हो रही है।

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि भारत की ‘डी मिनिमिस’ लिमिट का मकसद कम्प्लायंस का बोझ कम करना और छोटे निवेश को तेज़ करना है। इससे खासकर उन सेक्टर्स को फायदा होगा जहां फंडिंग की तुरंत ज़रूरत होती है और सेंसिटिव टेक्नोलॉजी शामिल नहीं होती हैं। ‘डी मिनिमिस’ लिमिट लागू होने से छोटे इन्वेस्टमेंट को अलग से मंज़ूरी की जरूरत नहीं होगी।

इस लिमिट को परसेंटेज स्टेक या मॉनेटरी वैल्यू के आधार पर तय किया जा सकता है। ET ने सूत्रों हवाले से जानकारी दी है कि इस पर सिक्योरिटी से जुड़ी बातों समेत सभी चिंताओं पर गौर करने के बाद ही कोई आखिरी फैसला लिया जाएगा, लेकिन प्रेस नोट 3 को पूरी तरह रद्द नहीं किया जाएगा। सरकार का फोकस इस बात पर होगा कि हमारे अहम सेक्टरों में कोई अवसरवादी अधिग्रहण न हो साथ ही छोटे विदेशी निवेश भी आसानी से आ सकें।

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