Railway Stocks: भारतीय रेलवे सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कवच (Kavach) सिस्टम को तेजी से लागू कर रहा है। यह स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो सिग्नल तोड़ने या तय रफ्तार से ज्यादा गति होने पर ट्रेन को खुद रोक सकता है। मार्च 2026 तक यह 3,103 रूट किलोमीटर पर शुरू हो चुका है। 24,427 रूट किलोमीटर पर काम जारी है। सरकार अगले दो वर्षों में 9,000 रूट किलोमीटर और जोड़ने की तैयारी में है।
Concord Control Systems के मुताबिक, कवच से जुड़ा कुल बाजार अवसर करीब ₹50,000 करोड़ का हो सकता है। यही वजह है कि रेलवे सेक्टर की कई कंपनियां इस अवसर का फायदा उठाने की दौड़ में हैं।
Kernex रेलवे सुरक्षा और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस उपलब्ध कराती है। कवच 4.0 इसका प्रमुख प्रोडक्ट है। कंपनी हर महीने 450 कवच यूनिट बनाने की क्षमता रखती है और मार्च 2026 में BHEL के साथ एक जॉइंट वेंचर भी बना चुकी है।
29 मई 2026 तक कंपनी के पास ₹4,150 करोड़ का ऑर्डर बुक था, जो FY26 के रेवेन्यू के आधार पर करीब 10 साल की कमाई का नजरिया देता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 127% बढ़कर ₹430 करोड़ पहुंच गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹149 करोड़ रहा। हालांकि, तेजी से बढ़ते ऑर्डर के साथ वर्किंग कैपिटल पर दबाव भी बढ़ा है।
Concord Control Systems कवच 4.0 के लिए जरूरी तकनीक और कई अहम कंपोनेंट बनाती है। कंपनी को RDSO की प्रोटोटाइप मंजूरी मिल चुकी है और फील्ड ट्रायल शुरू हो चुके हैं।
31 मार्च 2026 तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक ₹697 करोड़ था। इसके बाद मई 2026 में उसे ₹279.9 करोड़ का नया कवच ऑर्डर मिला। कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स के साथ 15 साल तक मेंटेनेंस से भी कमाई होगी। इससे लंबी अवधि की कमाई का रास्ता बनता है। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 69% बढ़कर ₹210.5 करोड़ और नेट प्रॉफिट 88% बढ़कर ₹42.7 करोड़ रहा।
HBL Engineering को कवच का शुरुआती खिलाड़ी माना जाता है। कंपनी 2005 से इस तकनीक पर काम कर रही है। यह Kavach 4.0 का सर्टिफिकेशन हासिल करने वाली पहली कंपनी रही है।
22 जून 2026 तक HBL का ऑर्डर बुक ₹5,748 करोड़ था। कंपनी का अनुमान है कि FY26 से FY28 तक कवच से हर साल ₹1,300-1,500 करोड़ की बिक्री हो सकती है। साथ ही कंपनी ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य रेल सिग्नलिंग प्रोडक्ट्स पर भी फोकस बढ़ा रही है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
कवच भारत के रेलवे सेक्टर में लंबे समय तक चलने वाली बड़ी थीम बन चुका है। इन तीनों कंपनियों ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई है। लेकिन सिर्फ बड़े ऑर्डर मिलना ही काफी नहीं होगा। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि ये कंपनियां समय पर प्रोजेक्ट पूरे कर पाती हैं या नहीं, वर्किंग कैपिटल को कैसे संभालती हैं और कवच के अलावा नए रेलवे सॉल्यूशंस में कितनी तेजी से विस्तार करती हैं।
फिलहाल, रेलवे सुरक्षा सेक्टर में दिलचस्पी रखने वाले निवेशको इन तीनों कंपनियों को अपनी वॉचलिस्ट में रख सकते हैं। इससे सही समय पर एंट्री लेने में मदद मिल सकती है।
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