Rajesh Exports Probe: सेबी को कैसे लगा कथित फर्जीवाड़े का पता, शुरुआती जांच में क्या मिला?

सेबी को मार्च 2024 में एक शिकायत मिली थी। इसमें राजेश एक्सपोर्ट्स के एक शेयरहोल्डर ने कंपनी की बुक्स (अकाउंटिंग) में वित्तीय हेराफेरी का संदेह जताया था। इसके बाद सेबी ने मामले की जांच शुरू की। हालांकि, अभी सेबी ने सिर्फ मामले की शुरुआती जांच की है

अपडेटेड Jun 04, 2026 पर 12:19 PM
सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयर में 4 जून को लोअर सर्किट लग गया।

इनवेस्टर्स बीते कई सालों से राजेश एक्सपोर्ट्स को सफलता की एक कहानी के रूप में देख रहे थे। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू कई लाख करोड़ रुपये में पहुंच गया था। लेकिन, सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स की कहानी बदल गई है। रेगुलेटर ने पाया है कि कंपनी ज्यादा रेवेन्यू दिखाने के लिए अकाउंटिंग में कई तरह का फर्जीवाड़ा करती थी।

सेबी को 2024 में मिली थी शिकायत

सेबी को मार्च 2024 में एक शिकायत मिली थी। इसमें राजेश एक्सपोर्ट्स के एक शेयरहोल्डर ने कंपनी की बुक्स (अकाउंटिंग) में वित्तीय हेराफेरी का संदेह जताया था। इसके बाद सेबी ने मामले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि यह पूरी फर्जीवाड़ा राजेश एक्सपोर्ट्स विदेश में रजिस्टर्ड अपनी सब्सिडियरीज कंपनियों खासकर स्विट्जरलैंड में रजिस्टर्ड सब्सिडियरीज के जरिए कर रही है।


99 फीसदी रेवेन्यू सब्सिडियरीज कंपनियों के जरिए

रेगुलेटर ने जांच में पाया कि FY21 से FY25 के बीच ग्रुप का 97-99 फीसदी रेवेन्यू भारत में उसके बिजनेस से नहीं बल्कि विदेशी सब्सिडियरीज के बिजनेस से आया था। राजेश एक्सपोर्ट्स ने यह दिखाने की कोशिश की थी कि उसके ग्लोबल गोल्ड बिजनेस को आसमान की ऊंचाई पर पहुंचाने में इन विदेशी सब्सिडियरीज का हाथ है। लेकिन, जांच में सेबी को अकाउंटिंग में ऐसे डेटा मिले, जो कंपनी के दावे से मेल नहीं खाते थे।

स्विस सब्सिडियरी के रेवेन्यू ने पैदा किया संदेह

जांच में यह पाया गया कि स्विट्जरलैंड में रजिस्टर्ड अपनी सब्सिडियरी Valcambi SA का रेवेन्यू ग्रुप के कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू के मुकाबले बहुत कम था। खास बात यह कि राजेश एक्सपोर्ट्स Valcambi SA को ग्रुप की सबसे अहम सब्सिडियरीज बताती थी। इस तथ्य ने सेबी को आश्चर्य में डाल दिया। Valcambi SA का ऑडिटेड स्टैंडएलोन रेवेन्यू कैलेंडर ईयर 2023 में 542.68 करोड़ रुपये था, जबकि कंसॉलिडेटेड जीजीआर 2.93 लाख करोड़ रुपये दिखाया गया था।

राजेश एक्सपोर्ट्स दावे के पक्ष में सबूत पेश नहीं कर पाई

राजेश एक्सपोर्ट्स ने 2.81 लाख करोड़ रुपये का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू दिखाया था। सेबी ने अमाउंट में इस फर्क पर सवाल पूछे। तब कंपनी ने जवाब दिया कि इस फर्क की वजह यह है कि Valcambi ने सिर्फ प्रोसेसिंग इनकम दिखाई है, जबकि जीजीआर में ग्रॉस गोल्ड ट्रांजेक्शन वैल्यू बताई गई है। सेबी कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ, क्योंकि कंपनी ने अपने दावे के पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं किए।

करीब 15.15 लाख करोड़ के कथित फर्जीवाड़े का संदेह

सेबी के होल-टाइम मेंबर कमलेश वार्ष्णेय ने अंतरिम आदेश में राजेश एक्सपोर्ट्स के जवाब पर कुछ बुनियादी सवाल उठाए। सेबी का मानना है कि रेवेन्यू ग्रॉस बेसिस पर रिकॉर्ड किया गया होगा, न कि इसमें सिर्फ रिफाइनिंग या प्रोसेसिंग इनकम दिखाई गई होगी। ऐसा होने पर अकाउंटिंग में टर्नओवर काफी बढ़ जाएगा, जबकि वास्तविक इकोनॉमिक एक्टिविटी में उस तरह की वृद्धि नहीं दिखेगी। सेबी का अनुमान है कि सब्सिडियरीज कंपनियों की 15.15 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू को साबित करने वाले रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं।

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शुरुआती जांच के बाद सेबी ने अंतरिम आदेश जारी किया

इतना ही नहीं, सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स से कस्टमर लिस्ट्स, अकाउंटिंग लेजर्स, सब्सिडियरी फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड मांगे। लेकिन, उसे कभी ये डॉक्युमेंट्स नहीं सौंपे गए। राजेश एक्सपोर्ट्स ने इसके लिए स्विट्जरलैंड में कंपनी कानूनों की आड़ लेकर बचने की कोशिश की। उसने कहा कि ये नियम यह तय करते हैं कि वह किस तरह के डॉक्युमेंट्स सौंप सकती है। सेबी का मानना है कि स्विस कानून में ये प्रतिबंध व्यक्ति पर लागू होते हैं न कि कंपनियों पर। हालांकि, सेबी ने अभी मामले में अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। उसने सिर्फ अंतरिम आदेश दिया है।

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