इनवेस्टर्स बीते कई सालों से राजेश एक्सपोर्ट्स को सफलता की एक कहानी के रूप में देख रहे थे। कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू कई लाख करोड़ रुपये में पहुंच गया था। लेकिन, सेबी के अंतरिम आदेश के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स की कहानी बदल गई है। रेगुलेटर ने पाया है कि कंपनी ज्यादा रेवेन्यू दिखाने के लिए अकाउंटिंग में कई तरह का फर्जीवाड़ा करती थी।
