राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 4 जून को क्रैश कर गया। बाजार खुलते ही शेयर में बड़ी गिरावट दिखी। 5 फीसदी गिरने के बाद शेयर में लोअर सर्किट लग गया। इसकी वजह सेबी का एक अंतरिम आदेश है। मार्केट रेगुलेटर ने अपने आदेश में कंपनी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सेबी ने कहा है कि कंपनी में बड़े लेवल की वित्तीय गड़बड़ी पाई गई है। कंपनी और इसके प्रमोटर ने फंड के इस्तेमाल में भी हेराफेरी की है।
बाजार खुलते ही शेयर में लोअर सर्किट
4 जून को शेयर बाजार खुलते ही Rajesh Exports के शेयर 4.99 फीसदी गिरकर 103.92 रुपये पर आ गए। इसके बाद शेयर में लोअर सर्किट लग गया। SEBI ने कंपनी और इसके चेयरमैन राजेश मेहता पर प्रतिबंध लगा दिया है। दोनों मामले की जांच पूरी होने तक सिक्योरिटीज मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शंस नहीं कर सकेंगे।
सेबी ने कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप
सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी विदेशी सब्सिडियरीज कंपनियों के जरिए कई सालों तक रेवेन्यू को बढ़ाकर दिखाया। आरोप है कि कंपनी ने करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये (158.3 अरब डॉलर) का ज्यादा रेवेन्यू दिखाया। रेगुलेटर ने यह भी पाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स का करीब 97 से 99 फीसदी तक कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू उसकी विदेशी सब्सिडियरीज कंपनियों खासकर स्विट्जरलैंड में रजिस्टर्ड Valcambi SA से जुड़ा था।
सब्सिडियरीज के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स डिसक्लोज नहीं किए
राजेश एक्सपोर्ट्स पर यह भी आरोप है कि उसने अपनी इन सब्सिडियरीज के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की जानकारी डिसक्लोज नहीं किया। दूसरी तरफ, Valcambi के स्टैंडएलोन ऑडिटेड अकाउंट्स में नाममात्र का रेवेन्यू मिला है। सेबी का कहना है कि रेवेन्यू में हेराफेरी का यह मामला करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। यह रेवेन्यू FY21-FY25 के बीच का है।
स्टैंडएलोन रेवेन्यू में भी फर्जीवाड़ा के आरोप
सेबी ने FY21-FY24 के दौरान 12,557 करोड़ रुपये के स्टैंडएलोन रेवेन्यू में भी हेराफेरी का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने राजेश मेहता के फर्जी डेरिवेटिव्स ट्रांजेक्शंस दिखाए। ये ट्रांजेक्शंस मेहता ने व्यक्तिगत रूप से किए थे।
राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की 11 फीसदी हिस्सेदारी
मामले की पूरी जांच के बाद ही पता चलेगा कि यह फर्जीवाड़ा कितना बड़ा है। कंपनी के शेयरहोल्डिंग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इस कंपनी में इस साल मार्च के अंत में LIC की 10.80 फीसदी हिस्सेदारी थी। एलआईसी देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी है। इसने कई कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है।