बाजार की सबसे बुलंद आवाज़ रमेश दमानी ने कहा , ये बुलरन रुकने वाला नहीं, 1991 के बाद आज निवेश का सबसे अच्छा दौर
रमेश दमानी ने कहा कि रिटेल के अच्छा पैसा बनाने पर खुशी है। इक्विटी में जिसने भी निवेश किया, उसने पैसा बनाया है। वहीं, F&O में करीब 90 फीसदी ट्रेडर्स ने पैसा गंवाया है। वायदा में रिटेल को 50000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। 50000 करोड़ में बायोकॉन, टाटा एलेक्सी जैसी कंपनी आ जाती हैं। खुशी है कि भारत की समृद्धि में भारतीयों का हिस्सा रहा है
MoneyControl News
अपडेटेड Sep 26, 2024 पर 1:22 PM
रमेश दमानी का कहना है कि भारत तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की राह पर है। भारत में प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की जरुरत है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ी तो बाजार तेजी से बढ़ेगा। भारत में अगले 5 साल में तेज ग्रोथ की संभावनाएं हैं।IPO मार्केट में यूफोरिया काफी है। लेकिन निवेशित रहें
सीएनबीसी-आवाज़ के गेट रिच सीरीजके दूसरे सीजन की शुरूआत बाजार की सबसे बड़ी आवाज़ रमेश दमानी से हुई है। CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल से हुई खास बातचीत में उन्होंने PSU कंपनियों पर खुलकर बात की। उनके मुताबिक PSU कंपनियों में अब भी मौके हैं। उनका कहना है कि सरकारी कंपनियों में अभी भी दम है। बड़ी तेजी के बाद PSU कंपनियों में करेक्शन दिखा है। कोई भी शेयर लगातार नहीं चल सकता है। PSU ने निवेशकों की अच्छी वेल्थ बनवाई है। PSU में आयल एंड गैस, इंजीनियरिंग,कंस्ट्रक्शन और पावर में कमाई के मौके हैं।
बाजार में रिटेल की भूमिका पर क्या कहेंगे?
इसके जवाब में रमेश दमानी ने कहा कि रिटेल के अच्छा पैसा बनाने पर खुशी है। इक्विटी में जिसने भी निवेश किया, उसने पैसा बनाया है। वहीं, F&O में करीब 90 फीसदी ट्रेडर्स ने पैसा गंवाया है। वायदा में रिटेल को 50000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। 50000 करोड़ में बायोकॉन, टाटा एलेक्सी जैसी कंपनी आ जाती हैं। खुशी है कि भारत की समृद्धि में भारतीयों का हिस्सा रहा है। F&O में रिटेल के पैसा गंवाने से दुख हुआ है। F&O स्पेस को अच्छी तरह समझने के बाद ही एंट्री करनी चाहिए।
इन्वेंस्टिग की जगह ट्रेडिंग कल्चर क्यों बढ़ा?
इसका जवाब देते हुए रमेश दमानी ने कहा कि मार्केट में जो भी स्कैम हुए उसमें ट्रेडर्स की भूमिका थी। निवेश करने वाले लोग स्कैम में शामिल नहीं थे। निवेशक और ट्रेडर का नजरिया अलग होता है। ट्रेडर्स सिर्फ भाव बढ़ाने में यकीन रखते हैं। 30-40 साल में मार्केट में 16 फीसदी की दर से कंपाउंडिग रही है। लंबी अवधि के निवेशकों का धन कई गुना बढ़ा है।
गिफ्ट के तौर पर शेयर की सौगात देते हैं?
इस पर रमेश ने कहा कि गिफ्ट के तौर शेयर देंगे तो वैल्यू बढ़ने की संभावना है। लोगों को शेयर मार्केट में निवेश करना चाहिए। बच्चों के लिए निवेश करना चाहिए। मैं अपने पोतों के लिए निवेश कर रहा हूं। मैंने बेटे को HDFC बैंक का शेयर गिफ्ट किया था। HDFC बैंक में 25000 रुपए के निवेश की वैल्यू अब करोड़ में है।
बुल मार्केट की कौन सी स्टेज में हैं?
रमेश जी ने कहा कि 2019 में बुलरन शुरू हुआ था। कॉरपोरेट टैक्स घटने के बाद बुलरन शुरू हुआ था। 5 साल में निफ्टी और सेंसेक्स दोगुने हुए हैं। कोई भी बुल रन हमेशा नहीं चलता है। कई एशियाई बाजारों में सालों से नया शिखर नहीं बना है। भारतीय बाजरों लगातार नए शिखर बना रहे हैं। लार्जकैप की तरफ लीडरशिप शिफ्ट हो रही है। जब लार्जकैप बहुत तेजी से बढ़े तो सतर्क हो जाना चाहिए। लार्जकैप में बड़ी तेजी से बुलरन पूरा होने का संकेत मिलता है। अच्छे वैल्युएशन के चलते ह्युंडई और सैमसंग जैसे IPO आ रहे हैं। इन कंपनियों को भारत में अच्छा वैल्युएशन मिल रहा है। ह्युंडई और सैमसंग जैसे IPO बाजार से काफी पैसा उठाएंगे। ह्युंडई और सैमसंग के IPO से लिक्विडिटी पर असर संभव है। अच्छे बिजनेस में लंबे समय के लिए निवेशित रहें। पोर्टफोलियो में बदलाव के साथ निवेशित रहना चाहिए
क्या IPO मार्केट में काफी ज्यादा यूफोरिया है ?
प्राइमरी मार्केट में काफी एक्शन है। कई सारे IPO आ रहे हैं। कोरियाई IPO का वैल्युएशन महंगा है। कोरियाई IPO से लिक्विडिटी पर असर संभव है।
4 दशक के ग्रोथ को क्या बाजार अभी ही डिस्काउंट कर लेगा?
रमेश दमानी का कहना है कि भारत तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की राह पर है। भारत में प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने की जरुरत है। प्रति व्यक्ति आय बढ़ी तो बाजार तेजी से बढ़ेगा। भारत में अगले 5 साल में तेज ग्रोथ की संभावनाएं हैं।IPO मार्केट में यूफोरिया काफी है। लेकिन निवेशित रहें।
क्या स्मॉलकैप-मिडकैप से लॉजकैप की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं ?
मिडकैप में थोड़ा एक्सोजर घटाया है। मैं मूल रूप से स्मॉलकैप-मिडकैप इंवेस्टर रहा हूं। मिडकैप का वैल्युएशन थोड़ा महंगा हो गया है। मिडकैप से पैसा निकालकर लार्जकैप में निवेश बढ़ाया है।
राकेश जी के बैगर दिवाली अधूरी लगती है
बिगबुल राकेश झुनझुनवाला को याद करते हुए रमेश जी ने कहा कि राकेश जी के बैगर दिवाली अधूरी लगती है। राकेश जी ने कुछ हजार रुपए से निवेश की शुरुआत की थी। कुछ हजार रुपए से राकेश झुनझुनवाला ने बड़ा वेल्थ बनाया। राकेश झुनझुनवाला अपने वक्त से आगे की सोचते थे।
क्या अभी पूरी तरह से निवेशित हैं या फिर कुछ कैश पर है?
रमेश जी ने बताया कि वे कुछ हद तक कैश पर है ताकि नया निवेश कर सकें। वे बाजार पर बियरिश नहीं हैं। नए मौके की तलाश में हैं। कैश पर होने का मतलब बियरिश नजरिया नहीं है। इस समय बाजार का टेक्सचर अच्छा लग रहा है। कोरियाई IPO से बाजार की लिक्विडिटी घटेगी।
PSUs की रैली से रिटेल निवेशक क्या सीखे?
इसका जवाब देते हुए रमेश दमानी ने कहा कि बाजार के चहेते बैंक और FMCG शेयर 4 साल नहीं चले हैं। 4 साल से लोग पॉपुलर शेयर खरीदने में लगे थे। अच्छे वैल्युएशन वाले शेयरों पर लोगों की नजर नहीं थी। कोई शेयर ना चले तो ये मतलब नहीं है कि वह खराब है। रुपए की चीज 10-20 पैसे में मिले जो जरूर खरीदें। PSU कंपनियां काफी सस्ते में मिल रही थीं। PSU कंपनियों के डिविडेंड यील्ड और नतीजे बेहतर रहे हैं। निवेशकों को बिजनेस की वैल्यू समझनी चाहिए।
बैंकों के सामने डिपॉजिट का संकट है क्या?
इस पर रमेश ने कहा कि लोग बचत का पैसा बाजार में लगा रहे हैं। फाइनेंशियलाइजेशन ऑफ सेविंग का कल्चर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वे फाइनेंशियल में निवेशित नहीं हैं। फाइनेंशियल स्पेस अच्छा कर सकता है।
आपके इंवेस्टमेंट का सफर कैसा रहा है?
इस सवाल के जवाब में रमेश दमानी ने कहा कि मैं अभी भी बाजार का छात्र हूं ना कि लीडर। 1989 से सफर की शुरुआत की, इस दौरान कई बड़े मेंटॉर मिले। राकेश झुनझुनवाला और आर के दमानी से काफी सीखा। रमेश जी के पिता स्टॉक मार्केट से जुड़े थे। उनसे भी उन्होंने काफी कुछ सीखा। रमेश जी ने ये भी कहा कि मार्केट में काफी मौके थे लेकिन वे सब को नहीं भुना सके। अच्छे मौकों पर भरोसा करने की जरुरत होती है। उन्होंने बाताया कि अच्छे मौके में निवेश करने से राकेश झुनझुनवाला जी डरते नहीं थे।
आर के दमानी से क्या सीखा?
इस पर रमेश जी ने कहा कि आर के दमानी बड़े अच्छे श्रोता हैं। आर के दमानी सबको बड़े ध्यान से सुनते हैं।
रिटर्न के लिए रिटेल किन बातों का ध्यान रखे?
कोई भी बाजार की भविष्यवाणी नहीं कर सकता। भारत में निवेश करने का सबसे सही समय 1991 था। 1991 के बाद आज निवेश का सबसे अच्छा दौर है। अच्छे बिजनेस की तलाश करें और निवेशित रहें। बाजार को टाइम करने की कोशिश नहीं करें। टाटा एलेक्सी में 10 साल बाद अच्छा रिटर्न मिला है।अच्छे शेयर कई गुना रिटर्न देते हैं। वैल्युएश महंगा हो और कारोबार ना समझ आए तो निकल जाएं।
भारतीय मार्केट का फादर कौन है?
इसके जवाब में रमेश दमानी ने कहा कि मार्केट के विस्तार में जॉर्ज फर्नांडिस की बड़ी भूमिका रही है। 1977 में जॉर्ज फर्नांडिस इंडस्ट्री मिनिस्टर थे। जॉर्ज फर्नांडिस चाहते थे कि कंपनियों में MNC का हिस्सा घटे। जॉर्ज फर्नांडिस MNC का 40 फीसदी से कम हिस्सा चाहते थे। ऐसे में IBM और कोक जैसी कंपनियां भारत से चली गईं। यूनीलिवर ने हिस्सा घटाने का फैसला किया। MNC के चलते अच्छी कंपनियों में निवेश का मौका मिला। जॉर्ज फर्नांडिस को लोग फादर ऑफ स्टॉक मार्केट मानते हैं।
अगला दशक भारत का
इस बातचीत में रमेश जी ने आगे कहा कि अगला दशक भारत का है, ये निवेश का शानदार समय है। अगले 10-20 साल में भारत में निवेश के बड़े मौके मिलेंगे। भारत में उद्यमियों के लिए ये शानदार समय है। अगला 30 साल निवेश के लिए अच्छा रहेगा।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।