Get App

Daily Voice: RBI से 2025 से पहले नीतिगत दर में नरमी की उम्मीद नहीं, लेकिन सरप्राइज कट की संभावना से भी इनकार नहीं

श्रीराम एएमसी के वरिष्ठ फंड मैनेजर दीपक रामराजू ने कहा कि सरकार सतत ऊर्जा पर अधिक जोर दे रही है। इस पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी पर होने वाला है। यह पावर सेक्टर में दीर्घकालिक निवेश का एक शानदार मौका पेश करता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 01, 2024 पर 9:23 AM
Daily Voice: RBI से 2025 से पहले नीतिगत दर में नरमी की उम्मीद नहीं, लेकिन सरप्राइज कट की संभावना से भी इनकार नहीं
इक्विटी और कैपिटल मार्केट का करीब 20 सालों का अनुभव रखने वाले दीपक रामाराजू का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर के मार्जिन पर दबाव की संभावना है। साथ ही इनका वैल्यूशन भी महंगा है

Daily Voice:  श्रीराम एसेट मैनेजमेंट कंपनी के वरिष्ठ फंड मैनेजर दीपक रामाराजू ने मनीकंट्रोल को दिए गए एक साक्षात्कार में कहा है कि आरबीआई द्वारा कैलेंडर वर्ष 2025 से पहले ब्याज दरों में कटौती का कोई निर्णय लिए जाने की संभावना नहीं है। हालांकि, ब्याज दरों में अचानक कटौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। उनके मुताबिक, आरबीआई से महंगाई के आंकड़ों पर बारीकी से नज़र रखने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि उभरती भू-राजनीतिक स्थिति, मानसून की स्थिति और खरीफ फसलों की बुवाई ऐसे कारक होंगे जिन पर आरबीआई नज़र रखेगा।

इक्विटी और कैपिटल मार्केट का करीब 20 सालों का अनुभव रखने वाले दीपक रामाराजू का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल सेक्टर के मार्जिन पर दबाव की संभावना है। साथ ही इनका वैल्यूशन भी महंगा है। ऐसे में शार्ट टर्म में इन सेक्टरों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम से लंबी अवधि में आय के नजरिए से सरकारी खर्च और ब्याज दर में कटौती के साथ-साथ मजबूत ऑर्डर प्रवाह इन सेक्टरों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

क्या स्मॉल और मिडकैप में वैल्यूएशन बहुत महंगा है? क्या इसका मतलब यह है कि दोनों सेगमेंट में निवेश के कम अवसर हैं?

इसके जवाब में दीपक ने कहा कि मिड और स्मॉल कैप इंडेक्स (निफ्टी मिडकैप 50 और निफ्टी स्मॉल कैप 100 इंडेक्स) ने पिछले एक साल की अवधि में लगभग 48 फीसदी और 59 फीसदी रिटर्न दिया है। वैल्यूएशन के हिसाब से, वे TTM (पिछले बारह महीने) के आधार पर महंगे हैं, और P/BV 2x स्टैंडर्ड डेविएशन लेवल से ऊपर है। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो सामान्य से ऊपर के रिटर्न ने म्यूचुअल फंड के जरिए बहुत अधिक निवेश आकर्षित किया। अगस्त में स्मॉल-कैप फंड में 3,209.3 करोड़ रुपये का निवेश हुआ (जुलाई के 2,109.2 करोड़ रुपये से काफी ज्यादा) जबकि मिड-कैप फंड में 3,054.58 करोड़ रुपये (जुलाई में 1,644.2 करोड़ रुपये) का निवेश हुआ। अब निकट भविष्य में मध्यम रिटर्न की उम्मीद है। बेहतर वैल्यूएशन और डाइवर्सिफिकोशन का लाभ उठाने के लिए तमाम फंड लार्जकैप और फ्लेक्सीकैप कटेगरी की ओर भी शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि, लंबी अवधि में, आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कटौती के परिणामस्वरूप मिड और स्मॉल-कैप फंडों में तेजी आ सकती है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें