RBI MPC Meeting Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी 'न्यूट्रल' पर बनाए रखा है, जिससे भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर दरों में बदलाव के विकल्प खुले रहेंगे
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी 'न्यूट्रल' पर बनाए रखा है, जिससे भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर दरों में बदलाव के विकल्प खुले रहेंगे। रिजर्व बैंक के इस निर्णय का सीधा मतलब है कि आम लोगों के होम,
RBI Monetary Policy Committee Highlights: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने अपनी समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने नीतिगत रुख को भी 'न्यूट्रल' पर बनाए रखा है, जिससे भविष्य में आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर दरों में बदलाव के विकल्प खुले रहेंगे। रिजर्व बैंक के इस निर्णय का सीधा मतलब है कि आम लोगों के होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई में फिलहाल कोई फेरबदल नहीं होगा और ब्याज दरें अपने मौजूदा स्तर पर ही बनी रहेंगी।
अल नीनो और क्रूड ऑयल के उतार-चढ़ाव से बढ़ा महंगाई का जोखिम
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि जून में महंगाई में आई तेजी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है, जबकि खाद्य व ईंधन को छोड़कर कोर इंफ्लेशन मई और जून में 3.9 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा। गवर्नर ने कहा कि मानसून पर अल नीनो का प्रभाव और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जारी भारी उतार-चढ़ाव निकट अवधि में महंगाई के परिदृश्य को धुंधला बना रहे हैं। हालांकि अभी व्यापक स्तर पर मूल्य वृद्धि सीमित है, लेकिन खाद्य, ईंधन और इनपुट लागत में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों में फैलने का जोखिम लगातार बना हुआ है।
Q3 में पीक पर पहुंचेगी दर फिर आएगी गिरावट: आरबीआई गवर्नर
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने महंगाई के परिदृश्य पर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में वास्तविक महंगाई दर अनुमान से मामूली रूप से कम रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में महंगाई में आई तेजी मुख्य रूप से खाद्य और ईंधन की कीमतों की वजह से है, जबकि व्यापक आर्थिक स्तर पर कीमतों का दबाव काफी सीमित देखा गया है। गवर्नर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (Q3) में मुख्य महंगाई दर अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें नरमी आने की संभावना है। वहीं, कीमती धातुओं को अलग रखकर देखें तो मुख्य महंगाई दर पूरी तरह नियंत्रण में और अनुमानों के अनुरूप बनी हुई है।
जून की पिछली MPC बैठक में क्या हुआ था?
इससे पहले 3 से 5 जून 2026 के बीच हुई MPC बैठक में भी RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था और अपना रुख 'न्यूट्रल' बरकरार रखा था। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट को 5% और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट को 5.5% पर बरकरार रखा गया था। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 6.6% और रिटेल महंगाई 5.1% रहने का अनुमान जताया है।
जून में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटें बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को झेलने के लिए पूरी तरह मजबूत है।