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RBI के नये ड्राफ्ट से बैंकिंग के वैल्युएशन पर लॉन्ग टर्म के नजरिये से खास असर नहीं होगा- राहुल सिंह, Tata Mutual Fund

Tata Mutual Fund के CIO-Equities राहुल सिंह ने आरबीआई के नये रेगुलेशन पर कहा कि लायब्लिटी को लेकर जो कुछ भी रिस्क है उसको मैनेज करने के लिए आरबीआई द्वारा नये नियम लाया जा सकते हैं। नये नियम लॉन्ग टर्म के लिहाज से बाजार के लिए ठीक रहेंगे। मेरा मानना है कि इससे बैंकिंग के वैल्युएशन पर खास असर नहीं होगा

Edited By: Sunil Guptaअपडेटेड Jul 27, 2024 पर 2:42 PM
RBI के नये ड्राफ्ट से बैंकिंग के वैल्युएशन पर लॉन्ग टर्म के नजरिये से खास असर नहीं होगा- राहुल सिंह, Tata Mutual Fund
राहुल सिंह ने कहा कि इस समय फार्मा में वैल्युएशन महंगा नहीं है। इसकी ग्रोथ भी अच्छी है। वहीं IT का वैल्युएशन सस्ता है। लेकिन ग्रोथ आउटलुक कमजोर है

RBI ने liquidity coverage ratio के नियम के बारे में नया ड्राफ्ट बनाया है। केंद्रीय बैंक ने इसमेंं नियमों को सख्त करने की तैयारी दिखाई है। इसकी वजह से बैंकिंग शेयरों पर दबाव भी नजर आया। फेडरल बैंक में करीब 4 परसेंट की गिरावट नजर आई। आरबीआई के नए फ्रेमवर्क के तहत इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग बेस्ड डिपॉजिट को ज्यादा वेटेज देना पड़ सकता है। हालांकि अभी इन नियमों पर RBI ने 31 अगस्त तक एक्सपर्ट्स से कमेंट मांगे हैं। इस बारे में हमारे सहयोगी चैन सीएनबीसी-आवाज़ से BIG MARKET VOICE में Tata Mutual Fund के CIO-Equities राहुल सिंह ने कहा कि उन्हें लगता है कि आरबीआई के एक्शन को शॉर्ट टर्म की बजाय लॉन्ग टर्म के नजरिये से देखा जाना चाहिए।

बैंकिंग डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ पर दबाव रह सकता है जारी

राहुल सिंह ने कहा कि पिछले कुछ क्वार्टर्स से बैंकिंग में दबाव दिख रहा है। इसमें डिपॉजिट रेट पर दबाव दिख रहा है। इसके अलावा डिपॉजिट और क्रेडिट ग्रोथ में गैप भी नजर आ रहा है। उन्होंने कहा अगले 6 से 9 महीनों तक ये जारी रह सकता है। बैंक इस समय अपनी ग्रोथ को भी स्लोडाउन कर रहे हैं। जो पहले ग्रोथ अनुमान 16 से 17 परसेंट थी वह इस समय 13 से 14 परसेंट नजर आ रही है। डिपॉजिट ग्रोथ पिक अप होने पर ही इस दबाव को कम किया जा सकता है।

आरबीआई के नये रेगुलेशन पर उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आरबीआई प्रोएक्टिव रहता है। लायब्लिटी को लेकर जो कुछ भी रिस्क है उसको मैनेज करने के लिए नये नियम आ सकते हैं। नये नियम लॉन्ग टर्म के लिए बाजार के लिए ठीक रहेंगे। इसे शॉर्ट टर्म के एंगल से ना देख कर लॉन्ग टर्म के एंगल से देखना चाहिए। मेरा मानना है कि इससे बैंकिंग के वैल्युएशन पर खास असर नहीं होगा।

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