एनालिस्ट्स में इस बारे में एक राय नहीं है कि इंफ्रास्ट्रक्टर प्रोजेक्ट्स को लोन पर आरबीआई के नए निर्देश का पीएफसी और आरईसी जैसी एनबीएफसी पर कितना असर पड़ेगा। इसका बैंकों खासकर पीएसयू बैंकों पर कितना असर पड़ेगा, यह स्पष्ट है। उन्हें अब ज्यादा प्रोविजनिंग करनी पड़ेगी, जो उनके लिए अच्छी खबर नहीं है। आईआईएफएल का मानना है कि आरबीआई के नए निर्देश का असर एनबीएफसी की टियर 1 कैपिटल रिक्वायरमेंट पर पड़ेगा। यह वैल्यूएशन मल्टीपल पर भी असर डालेगा। उधर, सीएलएसए का कहना है कि पीएफसी और आरईसी के पास पर्याप्त पूंजी है। इसलिए निवेशकों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पीएफसी (PFC) और आरईसी (REC) के स्टॉक्स 6 मई को शुरुआती गिरावट के बाद संभल गए। सवाल है कि क्या इन दोनों कंपनियों पर आरबीआई (RBI) के निर्देश का कोई असर नहीं पड़ेगा? दरअसल, जब कोई धारणा बहुत मजबूत हो जाती है तो अनिश्चितता के छोटे संकेत का भी उस पर बड़ा असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि जो इनवेस्टर्स बड़े मुनाफे पर बैठे हैं, वे कुछ मुनाफा बुक करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इसका व्यापक असर नहीं पड़ेगा, लेकिन फिलहाल नई खरीदारी देखने को नहीं मिलेगी। इससे पिछले साल पीएफसी और आरईसी में देखी शानदार तेजी पर ब्रेक लग सकता है।
इंटरेस्ट कॉस्ट बढ़ने का असर चौथी तिमाही में Titan Company के नेट प्रॉफिट पर दिखा। बुल्स का कहना है कि ग्रोथ को लेकर कंपनी का रुख आक्रामक है। वह तेजी से नए स्टोर्स ओपन कर रही है। उधर, बेयर्स की दलील है कि गोल्ड की कीमतें बढ़ने का असर ज्वैलरी की डिमांड पर पड़ सकता है। कंपनी को यूरोप, चीन और मध्य-पूर्व में लैब में तैयार डायमंड को लेकर कुछ संकेत मिले हैं। कंपनी के कर्ज की कॉस्ट बढ़ी है।
कंपनी के चौथी तिमाही के नतीजों पर मार्केट की प्रतिक्रिया अच्छी रही है। कंपनी का फोकस वॉल्यूम ग्रोथ के जरिए रेवेन्यू बढ़ाने पर है। एनालिस्ट्स का कहना है कि लोकसभा चुनावों के बाद और अच्छे मानसून से डिमांड बढ़ेगी, जिसका फायदा Britannia को मिलेगा। उधर, बेयर्स ने एनालिस्ट्स की रिपोर्ट के आधार पर यह बताया है कि कच्चे माल की लागत और प्रोडक्ट्स के प्रमोशन की कॉस्ट बढ़ने का असर कंपनी के मार्जिन पर पड़ सकता है।
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एमआरएफ का स्टॉक कीमत के लिहाज से इंडिया का सबसे महंगा स्टॉक है। मार्च तिमाही के कमजोर नतीजों के बाद MRF के स्टॉक्स में गिरावट आई। कंपनी ने घरेलू ट्रक रिप्लेसमेंट मार्केट में अपनी लीडरशिप पॉजिशन बनाई रखी है। महंगी बाइक के स्टील रेडियल टायर्स में कंपनी की एंट्री का असर आगे दिखेगा। बेयर्स का कहना है कि मार्च तिमाही के नतीजे कमजोर रहे। तिमाही दर तिमाही आधार पर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन में सीएट के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई। उधर, क्रूड ऑयल और रबर की कीमतें बढ़ रही हैं।