Reliance Industries Share Price : रेलिगेयर ब्रोकिंग की एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि जियो प्लेटफॉर्म्स की प्रस्तावित लिस्टिंग रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (RIL) की री-रेटिंग के लिए एक बड़ा कारण बन सकती है। इससे कंपनी के सबसे बड़े ग्रोथ एसेट को एक स्वतंत्र मार्केट वैल्यूएशन मिलेगा और इसके 'सम-ऑफ-द-पार्ट्स' (SOTP) स्ट्रक्चर में ज़्यादा पारदर्शिता आएगी। ब्रोकरेज ने RIL को 'BUY' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,696 तय किया है। इसका मतलब है कि 12 अक्टूबर को स्टॉक की क्लोजिंग कीमत ₹1,156 से इसमें 46.7% की बढ़त हो सकती है। अभी यह स्टॉक ₹1,175 पर ट्रेड कर रहा है।
रेलिगेयर के इन्वेस्टमेंट थीसिस का मुख्य आधार यह संभावना है कि जियो की लिस्टिंग से उस 'होल्डिंग-कंपनी डिस्काउंट' में कमी आएगी, जिस पर आम तौर पर बड़े ग्रुप्स (कॉन्ग्लोमरेट्स) के शेयर ट्रेड करते हैं। अलग-अलग बिज़नेस की वैल्यूएशन में पारदर्शिता की कमी और इंटरनल कैपिटल एलोकेशन को लेकर अस्पष्टता अक्सर बड़े ग्रुप्स की वैल्यूएशन पर असर डालती है। जियो की एक स्वतंत्र और पब्लिकली कोटेड कीमत होने से RIL के सबसे बड़े ग्रोथ एसेट की वैल्यूएशन आसान हो जाएगी और ग्रुप की SOTP वैल्यूएशन के बारे में ज़्यादा स्पष्टता मिलेगी।
ब्रोकरेज का कहना है कि जियो के IPO से वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद है। इसके कैश फ्लो में सुधार होगा और कारोबार ग्रोथ भी पॉजिटिव होगी। इससे शेयर में प्राइस और टाइम करेक्शन खत्म होने की उम्मीद है। जियो की वैल्यू डिस्कवरी बड़ा ट्रिगर साबित होगी। बैलेंस शीट में सुधार से वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। अन्य कारोबारों में भी कंपाउंडिंग ग्रोथ के संकेत हैं। इस समय RIL के लिए रिस्क-रिवार्ड बेहतर हैं। लंबी अवधि के करेक्शन से इसके वैल्युएशन आकर्षक हो गए है। यह शेयर 52 हफ्ते की ऊंचाई से 28% फिसल चुका है।
रेलिगेयर का मानना है कि निवेशकों को जियो के मार्केट में आने का इंतजार करने के बजाय,प्रस्तावित लिस्टिंग से पहले ही RIL के शेयर एक्युमुलेट कर लेने चाहिए। इंस्टीट्यूशनल इक्विटी मार्केट अक्सर बड़ी कॉर्पोरेट घटनाओं के होने से पहले ही उनकी कीमत तय कर लेते हैं। ऐसे में लिस्टिंग तक इंतजार करने का मतलब मल्टीपल एक्सपेंशन के शुरुआती दौर को गंवाना हो सकता है।
RIL: मार्केट का वेल्थ किएशन किंग
जब बात वेल्थ क्रिएशन की हो तो रिलायंस का मुकाबला दूर-दूर तक कोई नहीं कर सकता। पिछले 50 सालों से ये अपने निवेशकों को रिवॉर्ड करता आ रहा है। 20% से ज्यादा के CAGR से इसने रिटर्न दिए है। रिलायंस की वेल्थ क्रिएशन जर्नी को समझने के लिए आइए डालते हैं इसके स्टॉक मार्केट सफर पर एक नजर।
RIL का आईपीओ 1977 में 10 के फेस वैल्यू पर आया था। उस समय इसमें 1000 रुपए लगाने पर 100 शेयर मिले थे। 1977 में IPO में लगाए 1000 रुपए आज लाखों रुपए बन गए है। कंपनी द्वारा अब तक दिए गए बोनस शेयर के चलते ये 100 शेयर, 4096 शेयर बन गए हैं। ऐसे में 1977 में किया गया 1000 रुपए का निवेश 47.5 लाख रुपए का हो गया है। अगर जियो फाइनेंस को जोड़ कर देखें तो यह निवेश वैल्यू 52 लाख रुपए से ज्यादा हो जाती है।
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