रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infra) के शेयरधारकों ने कंपनी की 6000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। कंपनी यह फंड प्रेफरेंशियल इश्यू और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए जुटाने जा रही है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि दोनों प्रस्तावों को शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है, जिसमें डाक मतपत्र के माध्यम से प्रस्तावों के पक्ष में 98 फीसदी से अधिक मतदान हुआ है। कंपनी के शेयरों में बीते शुक्रवार को 1.10 फीसदी की तेजी देखी गई और यह स्टॉक NSE पर 281 रुपये के भाव पर बंद हुआ है।
Reliance Infra का क्या है प्लान?
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 19 सितंबर को 6,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना को मंजूरी दी थी। इसमें से 3014 करोड़ रुपये शेयरों या कनवर्टिबल वारंट के प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए जुटाए जाने थे, जबकि 3000 करोड़ रुपये QIP के माध्यम से जुटाए जाएंगे।
पहले फेज में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर 240 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर 12.56 करोड़ इक्विटी शेयर या कनवर्टिबल वारंट जारी करके 3014 करोड़ रुपये का प्रेफरेंशियल इश्यू शुरू कर रहा है। इसमें से 1104 करोड़ रुपये रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रमोटर्स द्वारा प्रमोटर कंपनी राइजी इनफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से निवेश किए जाएंगे। राइजी 4.60 करोड़ शेयर खरीदेगी।
प्रेफरेंशियल इश्यू में भाग लेने वाले दो अन्य निवेशक मुंबई स्थित फॉर्च्यून फाइनेंशियल एंड इक्विटीज सर्विसेज और फ्लोरिंट्री इनोवेशन एलएलपी हैं। वे ₹1058 करोड़ और ₹852 करोड़ का निवेश करेंगे, जिससे कुल 7.96 करोड़ शेयरों की खरीदारी की जाएगी। फ्लोरिंट्री का स्वामित्व ब्लैकस्टोन के पूर्व कार्यकारी मैथ्यू साइरियाक के पास है, जबकि फॉर्च्यून फाइनेंशियल का स्वामित्व निमिश शाह के पास है।
Reliance Infra कहां करेगी फंड का इस्तेमाल
इस प्रेफरेंशियल इश्यू से रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर की नेटवर्थ ₹9000 करोड़ से बढ़कर ₹12000 करोड़ हो जाने की उम्मीद है, जिससे इसका कर्ज काफी कम हो जाएगा। फंड का इस्तेमाल सब्सिडियरी कंपनियों और ज्वाइंट वेंचर्स में निवेश सहित बिजनेस ऑपरेशन के लिए किया जाएगा। इसके साथ ही लॉन्ग टर्म वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा।
फंड जुटाने को मंजूरी देने के अलावा शेयरधारकों ने Manjari Kacker को इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में नियुक्त करने के पक्ष में भी मतदान किया। उनकी नियुक्ति से कंपनी के गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स में सुधार होने और इसके बोर्ड में वैल्यूएबल एक्सपर्टाइज आने की उम्मीद है।