रेलिगेयर एंटरप्राइजेज पर उसके सबसे बड़े शेयरहोल्डर की नजर, जानिए बिजनेस हथियाने की पूरी कहानी
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बर्मन परिवार है। बर्मन परिवार इस फाइनेंशियल कंपनी पर कब्जा करना चाहता है लेकिन रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की चेयरपर्सन रश्मि सलूजा और बोर्ड मेंबर्स इस अधिग्रहण को रोकने की तमाम कोशिशे कर रहे हैं, जानिए क्या है पूरा मामला
। क्या ये फाइनेंशियल कंपनी खुद को जबरन अधिग्रहण करने से बचा पाएगी। या फिर इस फाइनेंशियल कंपनी की किस्मत हमेशा के लिए बदलने वाली है
एक बड़ी फाइनेंशियल कंपनी खुद को अपने ही शेयरहोल्डर से बचाने की कोशिश कर रही है। कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर उस पर जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। क्या ये फाइनेंशियल कंपनी खुद को जबरन अधिग्रहण करने से बचा पाएगी। या फिर इस फाइनेंशियल कंपनी की किस्मत हमेशा के लिए बदलने वाली है।
यहां बात हो रही है फाइनेंशियल सर्विसेज मुहैया कराने वाली कंपनी रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की। कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है डाबर का बर्मन परिवार। और अब ये बात किसी से छिपी नहीं है कि बर्मन परिवार साम दाम दंड भेद.. कुछ भी करके रेलिगेयर एंटरप्राइज पर अपना अधिकार करना चाहती है। बर्मन परिवार देश के पुराने कारोबारी घरानों में से एक है। इनकी कंपनी और ब्रांड डाबर है जिसे हर घर में जगह मिल चुकी है। बर्मन परिवार का कारोबारी घराना 100 साल से भी ज्यादा पुराना है।
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज पर कब्जा चाहती है बर्मन परिवार
एक तरफ बर्मन परिवार रेलिगेयर एंटरप्राइजेज पर कब्जे की तमाम कोशिशें कर रहा है तो दूसरी तरफ रेलिगेयर एंटरप्राइजेज का मैनेजमेंट कंपनी को बचाने के लिए हर प्रयास करने में लगा है। इन सबके बीच एक मुश्किल ये भी है कि रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की चेयरपर्सन रश्मि सलूजा पर इनसाइडर ट्रेडिंग करने का आरोप है। इस मामले में सेबी उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेज चुका है। रश्मि सलूजा को ये नोटिस भेजने से करीब एक महीना पहले सेबी ने कंपनी और इसके बोर्ड को कहा था कि बर्मन ग्रुप की तरफ से ओपन ऑफर लाने की तैयारी की जाए।
इतना ही नहीं, इस बीच ED ने भी रेलिगेयर एंटरप्राइजेज की चेयरपर्सन और दो डायरेक्टर्स के खिलाफ अपनी जांच शुरू कर दी। रेगुलेरटर ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के शेयर रश्मि सलूजा को ट्रांसफर करने पर रोक लगा दिया। सलूजा ने इस मामले में तुरंत पीएम ऑफिस और फाइनेंस मिनिस्ट्री को दखल देने की मांग की।
रेलिगेयर और बर्मन परिवार के बीच क्या है विवाद?
अब आइए जान लेते हैं कि आखिर ये पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? ये पूरी खींचतान तब शुरू हुई जब बर्मन फैमिली ने रेलिगेयर एंटरप्राइज पर टेकओवर करना चाहा। इसके बाद ही अचानक रेलिगेयर एंटरप्राइज की सब्सिडियरी के शेयर्स Esops के तौर पर रेलिगेयर एंटरप्राइज की चेयरपर्सन रश्मि सलूजा के अकाउंट में ट्रांसफर की बात शुरू हुई। यानि सब्सिडियरी कंपनी के शेयर भी रेलिगेयर एंटरप्राइज की चेयरपर्सन के पास आने वाले थे। रेलिगेयर एंटरप्राइज सिर्फ इस आधार पर टेकओवर का विरोध कर रहा था कि बर्मन परिवार को फाइनेंशियल कंपनी चलाने का अनुभव नहीं है। दूसरी तरफ बर्मन परिवार ने भी इस बात का विरोध किया कि सब्सिडियरी कंपनी के शेयर रश्मि सलुजा के खातों में क्यों आ रहे हैं।
proxy advisory InGovern के मुताबिक, सलूजा को 630 से 740 करोड़ रुपए के शेयर ट्रांसफर किए गए थे। इसमें 150 से 200 करोड़ रुपए के शेयर रेलिगेयर फिनवेस्ट के और 480 करोड़ रुपए के शेयर हेल्थइंश्योरेंस के थे।
डाबर के बर्मन परिवार के पास है बड़ी हिस्सेदारी
बर्मन परिवार रेलिगेयर एंटप्राइजेज का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर है। इसने 25 सितंबर 2023 को रेलिगेयर एंटप्राइजेज का 5.27 पर्सेंट स्टेक खरीदा था। जबकि पहले से ही उसके पास 21.24 फीसदी का स्टेक था। इसी के साथ बर्मन परिवार की कुल हिस्सेदारी 26.51 फीसदी हो गई। और सेबी के नियमों के मुताबिक किसी भी कंपनी में 25 फीसदी से ज्यादा स्टेक होने पर ओपन ऑफर लाना पड़ता है और बर्मन परिवार भी ओपन ऑफर लेकर आए।
बर्मन परिवार ने 26 सितंबर 2023 को ओपन ऑफर पेश किया और उसके अगले दिन ही रेलिगेयर एंटप्राइजेज की चेयरपर्सन रश्मि सलूजा और दूसरे एग्जिक्यूटिव्स ने अपने शेयर बेच दिए। बर्मन फैमिली ने सेबी से इस मामले की जांच की मांग की। बर्मन ग्रुप का आरोप है कि रेलिगेयर एंटप्राइजेज का मैनेजमेंट कंपनी पर उसके नियंत्रण की कोशिशों में अड़चन डाल रहा है।
इस टेकओवर के खिलाफ रेलिगेयर एंटप्राइजेज और इसके इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमिटी ने सेबी के सामने एक प्रेजेंटेशन भी पेश किया और बताया कि क्यों बर्मन फैमिली इस अधिग्रहण के लिए फिट नहीं है। इस बीच बर्मन परिवार ने भी सेबी को लेटर लिखकर शिकायत की है कि चेयरपर्सन रेलिगेयर एंटरप्राइजेज से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दे रही है और ओपन ऑफर प्रक्रिया को रोकने की कोशिश कर रही है।
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज क्या ओपन ऑफर में रोड़े अटका रहा है
सेबी ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज को हिदायत दी कि वह RBI, इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा और सेबी को एप्लिकेशन जमा करे ताकि ओपन ऑफर की प्रक्रिया पूरी हो सके। तीन-तीन मंजूरी इसलिए जरूरी है क्योंकि रेलिगेयर एंटरप्राइजेज एक NBFC है। और इसकी सब्सिडियरी केयर हेल्थ इंश्योरेंस बीमा रेगुलेटर के दायरे में आती है। जबकि इसकी सब्सिडियरी रेलिगेयर ब्रोकिंग और RFL सेबी के तहत है।
19 जून 2024 को सेबी ने रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के मैनेजमेंट को इंटरिम ऑर्डर और कारण बताओ नोटिस भेजा है ताकि वो बर्मन परिवार को रेगुलेटरी क्लीयरेंस लेने में सहयोग करे। सेबी ने तो रेलिगेयर एंटरप्राइजेज के मैनेजमेंट से अंडरटेकिंग भी मांग लिया कि वह सभी रेगुलेटरी अथॉरिटी में ओपन ऑफर के लिए आवेदन डालेगी।
क्या बर्मन परिवार टेकओवर के लिए फिट है?
रेलिगेयर एंटरप्राइजेज का मैनेजमेंट बार बार यह दोहरा रहा है कि बर्मन परिवार इस टेकओवर के लिए फिट नहीं है। इस पर सेबी का कहना है कि Substantial Acquisition of Shares and Takeovers के नियमों के मुताबिक अगर किसी कंपनी ने पहले डिफॉल्ट नहीं किया हो या फिर इकोनॉमिक ऑफेंडर्स ना हो तो FIT AND PROPER क्राइटेरिया में उसकी जांच नहीं हो सकती है।
बाद में ऐसी खबरें भी आईं कि सेबी ने इनसाइडर ट्रेडिंक के आरोप में रश्मि सलूजा को नोटिस भेजा गया है। इस मामले में अब जो खबरें आई हैं उसके मुताबिक, सेबी रश्मि सलूजा के 21 और 22 सितंबर 2023 के ट्रेड की जांच कर रहा है। दिलचस्प है कि ये तारीख बर्मन ग्रुप के ओपन ऑफर लाने की तारीख से कुछ ही दिन पहले की है। बर्मन परिवार से जुड़ी चार इनवेस्टमेंट फर्म्स ने इसकी शिकायत की है। उनके मुताबिक, रश्मी ने इन दो दिनों में 12.9 लाख शेयर बेचे हैं जिनकी वैल्यू तब 34.71 करोड़ रुपए थी।
रेलिगेयर की सब्सिडियरी कंपनी पर लगी पेनाल्टी
इस साल जुलाई में इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा ने केयर हेल्थ इंश्योरेंस पर 1 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई थी। साथ ही कंपनी को फटकार लगाते हुए कहा था कि रश्मि सलूजा को जो ESOPS दिए गए हैं वो तुरंत Buy Back किया जाए। क्योंकि बिना रेगुलेटर की मंजूरी के किसी भी नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को सैलरी और सीटिंग फीस के अलावा कुछ नहीं अलॉट किया जा सकता।
अगस्त में सिक्योरिटीज अपीलिएट ट्राइब्यूनल यानि SAT ने अंतिम फैसला लिए जाने तक रेगुलेटर के आदेश पर रोक लगा दिया था। इसके साथ ही केयर हेल्थ इंश्योरेंस हाफ पेनाल्टी जमा करने के साथ रश्मी सलूजा को और ESOPs इश्यू ना करने का निर्देश दिया। इतना ही नहीं सलूजा पर यह पाबंदी भी लगा दी कि वह esop के तहत मिले इंश्योरेंस कंपनी के शेयरों में ट्रेडिंग नहीं करेंगी।
रेलिगेयर के चेयरपर्सन रश्मि सलूजा पर ED का एक्शन
इसके बाद सितंबर में ED ने भी एक्शन लिया और सलूजा और उनके दो अन्य बोर्ड मेंबर्स के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने और साजिश रचकर टेकओवर को रोकने का केस फाइल कर दिया। बोर्ड मेंबर पर आरोप था उन्होंने किसी शख्स का इस्तेमाल करते हुए बर्मन ब्रदर्स पर झूठे आरोप लगाए हैं।
ED के मुताबिक, रेलिगेयर एंटरप्राइज के शेयरधारक वैभव गावली ने खुद माना कि बर्मन ब्रदर्स के खिलाफ उन्होंने एक शिकायत दर्ज कराई थी। गावली ने ये भी स्वीकार कर लिया कि रश्मी सलूजा और दो बोर्ड मेंबर के कहने पर उन्होंने ये आरोप लगाया था कि शिविंदर और मालविंदर मोहन सिंह के साथ मिलकर बर्मन परिवार ने स्कैम किया है। ED के मुताबिक, गावली अब दावा कर रहे हैं कि उन्हें रेलिगेयर एंटरप्राइज के शेयर खरीदने और शिकायत दर्ज कराने के लिए पैसे दिए गए थे। और उनके पास अपनी शिकायतों के सपोर्ट में कोई पेपर नहीं है।
ऐसा लग रहा है कि रश्मि सलूजा की पूरी चाल उनपर उल्टी पड़ गई है। proxy advisory firm InGovern ने कहा है कि सलूजा और बोर्ड के सभी इंपॉर्टेंट मेंबर्स को इस्तीफा देना चाहिए। एडवाइजरी फर्म ने कहा कि बिना कोई वजह बताए कंपनी एनुअल जनरल मीटिंग में देर कर रही है इससे गवर्नेंस पर भी सवाल उठ सकता है।