एल्गो ट्रेडिंग फर्म फाइंडोक फाइनेंशियल सर्विसेज ग्रुप (Findoc Financial Services Group)के संस्थापक और प्रबंध निदेशक, हेमंत सूद ने चेतावनी के लहजे में कहा है कि रिटेल एफ एंड ओ निवेशकों को एक्पायरी के दिन वीकली कॉन्ट्रैक्टों में हाल के दिनों में देखने को मिले अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के कारण भारी घाटा उठाना पड़ सकता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग में बहुत ज्यादा जोखिम हैं। इनकी अनदेखी करने पर रिटेल एफ एंड ओ निवेशकों को "भारी कीमत" चुकानी पड़ सकती है।
मनीकंट्रोल से हुई बातचीत में हेमंत सूद ने कहा, "ज्यादातर रिटेल निवेशक ऑप्शन ट्रेडिंग से जुड़े जोखिम को कम करके आंक रहे हैं, फिर भी पैसा कमा रहे हैं क्योंकि बाजार पिछले 5-6 सालों में काफी स्थिर रहा है।"
महामारी के बाद इक्विटी ऑप्शन में ट्रेडिंग की वॉल्यूम काफी बढ़ गया है। इंडेक्स ऑप्शन वॉल्यूम में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी और स्टॉक ऑप्शन वॉल्यूम में इनकी हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी के आसपास पहुंच गई है।
मनीकंट्रोल के साथ फ्री-व्हीलिंग चैट में हेमंत सूद ने आगे कहा “अधिकांश ट्रेडर पिछले कुछ समय से हर महीनें लगातार 3-4 फीसदी रिटर्न कमा रहे हैं। क्योंकि वे पैसा कमा रहे हैं, ऐसे में उन्होंने जोखिम का विश्लेषण करने की जहमत नहीं उठाई। उनका तर्क यह है कि हमने इतने लंबे समय तक मुनाफा कमाया है कि हमें इसमें से कुछ खोने का कोई मलाल नहीं है। ”
सेबी के एक बहुप्रचारित सर्वेक्षण से पता चलता है कि 10 में से लगभग 9 ट्रेडर फ्यूटर्स और ऑप्शन (एफएंडओ) में पैसा गंवाते हैं। इसके बावजूद ऑप्शन कारोबार में रिटेल निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। 2005 में सब-ब्रोकर के रूप में अपना फाइनेंशियल मार्केट करियर शुरू करने वाले और फाइंडॉक के फाउंडर सूद ने कहा, "हमने अभी तक कोई बहुत ज्यादा वोलेटाइल इंट्रा-डे सेशन नहीं देखा है, लेकिन जब भी ऐसा होगा तब जोखिमों से अनजान अधिकांश लोगों को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।"
हाल ही में, एक्सिस म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी आशीष गुप्ता ने एक रिपोर्ट में लिखा था कि डेरिवेटिव वॉल्यूम अब नकद ट्रेडिंग वॉल्यूम से 400 गुना से ज्यादा हो गया है। यह बाजार के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
इस बातचीत में हेमंत सूद ने आगे कहा कि अधिकांश ऑप्शन राइटर हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स हैं जो या तो शेयरों में अपने अंडरलाइंग निवेश के खिलाफ ऑप्शन राइट करते हैं या शेयरों और म्यूचुअल फंड के अपने मौजूदा पोर्टफोलियो पर उधार ले रहे होते हैं। औसक ऑप्शन सेलर को इस बाजार की अच्छी या मध्यम जानकारी होती है। वीकली ऑप्शन कॉन्ट्रेक्ट में अचानक वोलैटिलिटी बढ़ने के बारे में बात करते हुए सूद ने कहा कि यह कई कारणों से हो सकता है। उन्होंने कहा “यह बाज़ार से जुड़ा हो सकता है, यह मांग और आपूर्ति से संबंधित हो सकता है; आप सभी एक्सपायरी तिथियों [कॉन्ट्रैक्ट] को एक ही ब्रश से पेंट नहीं कर सकते। लेकिन मुझे उम्मीद है कि आगे चलकर एक्सपायरी के दिनों में और अधिक वोलैटिलिटी देखने को मिलेगी।''
इस बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि एफ एंड ओ सेगमेंट में काफी ज्यादा विदेशी निवेशक प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स के तौर पर सक्रीय हो गए हैं और ये हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग गेम खेल रहे हैं, जिसने दूसरे बाजारों में उनको अच्छा मुनाफा दिया है। सूद ने कहा, "बाजार काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गया है। लोग अपनी रिसर्च तकनीक में बहुत पैसा निवेश कर रहे हैं। बाजार तेजी से हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडकी ओर बढ़ रहा है और एलएफटी (लो फ्रीक्वेंसी ट्रेड) और एमएफटी (मीडिय फ्रीक्वेंसी ट्रेड) रणनीतियों के लिए एचएफटी के साथ प्रतिस्पर्धा करना कठिन होता जा रहा है। अब तक हमारा ध्यान ज्यादातर एमएफटी पर रहा है। लेकिन आगे हमें एचएफटी ट्रेडिंग में बने रहने के लिए बहुत सारे संसाधनों का निवेश करना होगा।"
रिटेल निवेशकों के लिए सूद की सलाह है कि उन्हें परंपरागत निवेश पर ही कायम रहना चाहिए क्योंकि उनके लिए सोफेस्टीकेटेड एल्गो फर्मों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन होगा। रिटेल निवेशकों के लिए यही बेहतर है कि वे लंबी अवधि के लिए शेयरों में निवेश करें। कुछ खुदरा निवेशक हैं जो अपना शोध करते हैं और फिर ऑप्शन में ट्रेड करते हैं। लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है।
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