Roopa Screen IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट और पैसा डबल, ₹64 के शेयरों ने मचाया धमाल

Roopa Screen IPO Listing: रूपा स्क्रीन रोटरी स्क्रीन-प्रिंटिंग मशीनों में इस्तेमाल होने वाली रोटरी निकेल स्क्रीन बनाती है। अब आईपीओ को धांसू रिस्पांस के बाद इसके शेयर लिस्ट हुए हैं। इसके आईपीओ के तहत सिर्फ नए शेयर जारी हुए हैं। नई खरीदारी से पहले चेक करें कंपनी की कारोबारी सेहत कैसी है और आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी कैसे करेगी

अपडेटेड Oct 01, 2026 पर 10:07 AM
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Roopa Screen IPO Listing: रूपा स्क्रीन का ₹19 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 24-28 सितंबर तक खुला था। आज इसके शेयरों की लिस्टिंग हुई है।

Roopa Screen IPO Listing: रोटरी निकेल स्क्रीन बनाने वाली रूपा स्क्रीन के शेयरों की आज BSE SME पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे करीब 272 गुना बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹64 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹121.60 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 90% का लिस्टिंग गेन (Roopa Screen Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹127.68 (Roopa Screen Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशकों का पैसा लगभग डबल हो गया।

Roopa Screen IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

रूपा स्क्रीन का ₹19 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 24-28 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 271.94 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 44.81 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 421.94 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 529.82 गुना भरा था।


इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 30 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹9.90 करोड़ नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी लगाने, ₹6.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹2 लाख आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹3.28 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Roopa Screen के बारे में

रूपा स्क्रीन रोटरी स्क्रीन-प्रिंटिंग मशीनों में इस्तेमाल होने वाली रोटरी निकेल स्क्रीन बनाती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से टेक्सटाइल बनाने वाली कंपनियां कपड़े की छपाई के लिए करती हैं। ये मेटल स्क्रीन बेलनाकार होती हैं और इनमें छेद होता है, जिनसे प्रिंटिंग पेस्ट निकलकर कपड़े पर पैटर्न बनाता है। रोटरी निकेल स्क्रीन के अलावा कंपनी निकेल कैथोड भी बेचती है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से निकेल स्क्रीन बनाने में एक जरूरी कच्चे माल के तौर पर होता है। वित्त वर्ष 2026 में इसने देश भर में 200 से अधिक ग्राहकों को रोटरी निकेल स्क्रीन सप्लाई की और इसके रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और तमिलनाडु से आया।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 108% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹6.48 करोड़ और टोटल इनकम करीब 20% के सीएजीआर से ₹51.32 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹7.42 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹8.31 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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