IndusInd Bank Shares: इंडसइंड बैंक के शेयरों में मंगलवार को आई 25% की भारी गिरावट ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को भी जोरदार झटका दिया है। म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग्स को इस गिरावट के चलते 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा है। यह गिरावट तब आई जब इंडसइंड बैंक ने अपने डेरेविटिव पोर्टफोलियो को लेकर एक बड़ा खुलासा किया। बैंक ने बताया कि उसने एक आंतरिक समीक्षा में अपने डेरिवेटिव खातों से जुड़े लेनदने में कुछ गड़बड़िया पाई और इसके चलते इसके नेटवर्थ में 2.35 फीसदी की कमी आने का अनुमान है।
दोपहर के कारोबार में इंडसइंड बैंक के शेयर NSE पर करीब 26% गिरकर 666.25 रुपये के अपने नए 52-वीक लो पर आ गए। यह मार्च 2020 के बाद का इसका सबसे निचला स्तर है। इस गिरावट से बैंक का मार्केट कैप 14,000 करोड़ रुपये से अधिक घट गया।
फरवरी तक कुल 35 म्यूचुअल फंडों के पास इंडसइंड बैंक के 20.88 करोड़ से अधिक शेयर थे। इन होल्डिंग्स की कुल वैल्यू 20,670 करोड़ रुपये थी, लेकिन हालांकि आज की गिरावट के बाद अब इनकी वैल्यू घटकर 14,600 करोड़ रुपये रह गई है।
ICICI प्रूडेंशियल MS के पास सबसे अधिक हिस्सदारी थी, जिसकी होल्डिंग्स की वैल्यू 3,779 करोड़ रुपये थी। इसके बाद HDFC म्यूचुअल फंड के पास 3,564 करोड़ रुपये और SBI म्यूचुअल फंड के पास 3,048 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी थी। इसके अलावा यूटीआई, निप्पॉन इंडिया, बंधन और फ्रैंकलिन टेम्पलटन म्यूचुअल फंडों के पास इंडसइंड बैंक में 740 करोड़ रुपये से लेकर 2,447 करोड़ रुपये तक की हिस्सेदारी थी।
अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 के बीच, म्यूचुअल फंड्स ने इंडसइंड बैंक के शेयरों में करीब 10,200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। हालांकि फरवरी 2025 में उन्होंने 1,600 करोड़ रुपये की निकासी की थी। इंडसइंड बैंक के शेयर ने अप्रैल 2024 में 1,576 रुपये का अपना 52-वीक हाई छुआ था और तब से अबतक इसमें करीब 55 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नेटवर्थ पर 2.4% के नकारात्मक असर के चलते इंडसइंड बैंक के मुनाफे में मार्च तिमाही के दौरान 1,500 करोड़ की संभावित गिरावट का कारण बन सकता है। हालांकि वित्तीय असर ज्यादा गंभीर नहीं है, लेकिन एनालिस्ट्स का कहना है कि असली चिंता बैंक की साख को लेकर है, जिसे फिर से बहाल करने में कई तिमाहियों का समय लग सकता है।
इंडसइंड बैंक ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी को नियुक्त किया है, जो इसकी आंतरिक समीक्षा और निष्कर्षों की पुष्टि करेगी। हालांकि, कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। Kotak के अनुसार, यदि माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में सुधार और स्थिर डिपॉजिट ग्रोथ बनी रहती है, तो निवेशकों की चिंता कम हो सकती है।
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